Mother’s Day Success Story: बालोतरा: ‘मां सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि वह शक्ति है जो हर संघर्ष को जीत में बदल देती है।’ मदर्स डे के अवसर पर यूपीएससी (आईएएस) और आरपीएससी (आरएएस) में सफलता हासिल करने वाले बालोतरा जिले के प्रतिभाशाली युवाओं की कहानियों ने इसी भाव को जीवंत कर दिया।
किसी मां ने बेटे की पढ़ाई के लिए वर्षों तक मजदूरी की, किसी ने बेटे की आंखें बनकर उसे पढ़ाया, तो किसी ने लगातार असफलताओं के बीच बच्चों का आत्मविश्वास टूटने नहीं दिया। इन सफलताओं के पीछे माताओं का त्याग, समर्पण, धैर्य और अटूट विश्वास सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आया।
बेटे की आंख बनी मां, बनाया आरएएस
बालोतरा जिले के दृष्टिबाधित मोहित कुमार सोनी ने राजस्थान प्रशासनिक सेवा (आरएएस) परीक्षा में ब्लाइंड वर्ग में चौथा स्थान प्राप्त कर यह साबित कर दिया कि मजबूत इच्छाशक्ति और मां की प्रेरण किसी भी कठिनाई को पार कर सकता है। मोहित ने स्नातक-स्नातकोत्तर दोनों परीक्षाएं प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण कीं। उनकी सफलता के पीछे उनकी मां हेमलता सोनी का विशेष योगदान रहा।

बना लिया मिशन
अंग्रेजी विषय में स्नातकोत्तर हेमलता ने बेटे की पढ़ाई को अपना मिशन बना लिया। वह घंटों तक अध्ययन सामग्री रिकॉर्ड करती थीं, ताकि मोहित आसानी से पढ़ाई कर सके। परीक्षा की तैयारी के दौरान उन्होंने हर विषय को समझाने और मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई।
मां बनी बेटे की आंखें, रोशन किया भविष्य
दृष्टिबाधित मोहित कुमार सोनी ने आरएएस परीक्षा में ब्लाइंड वर्ग में चौथा स्थान प्राप्त कर सफलता हासिल की। उनकी इस उपलब्धि के पीछे उनकी मां हेमलता सोनी का अद्भुत समर्पण रहा। अंग्रेजी विषय में स्नातकोत्तर हेमलता सोनी ने बेटे की पढ़ाई को अपना मिशन बना लिया।
उन्होंने घंटों रिकॉर्डिंग कर अध्ययन सामग्री तैयार की और हर कठिन परिस्थिति में बेटे का मानसिक संबल बनी रही। मोहित की सफलता को केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि मां की तपस्या, त्याग और विश्वास की जीत माना जा रहा है। ऐसे में किसी भी व्यक्ति की सफलता के पीछे मां का स्नेह, संघर्ष और समर्पण सबसे मजबूत आधार होता है।
मां बनीं हौसले की सबसे बड़ी ताकत
संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) सिविल सेवा परीक्षा 2025 में ऑल इंडिया रैंक 83 हासिल करने वाले गौरव चोपड़ा ने अपनी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय अपनी मां संतोष देवी चोपड़ा को दिया। उन्होंने कहा कि कठिन तैयारी के दौरान जब भी आत्मविश्वास डगमगाया, मां ने संभालते हुए आगे बढ़ने का हौसला दिया।
पढ़ाई के दबाव के बीच मां ने उनकी सेहत, खानपान और आराम तक का विशेष ध्यान रखा। गौरव ने कहा कि उनकी यह उपलब्धि केवल उनकी नहीं, बल्कि मां के संघर्ष और समर्पण की भी सफलता है।

असफलताओं के बीच मां बनी सबसे बड़ी ताकत
यूपीएससी में 287वीं रैंक हासिल करने वाले जितेंद्र प्रजापत ने बताया कि नौवें प्रयास में मिली सफलता के पीछे उनकी मां मुन्ना देवी का अटूट विश्वास सबसे बड़ा आधार रहा। केवल साक्षर और गृहणी होने के बावजूद मां ने हर असफलता के बाद उन्हें दोबारा खड़े होने की प्रेरणा दी।
इंजीनियरिंग के दौरान कैंपस प्लेसमेंट में टाटा कंपनी से चयन होने के बाद भी उन्होंने यूपीएससी की तैयारी का निर्णय लिया, जिसमें मां ने पूरा साथ दिया। उन्होंने अपनी बेटी को भी चार्टेड अकाउंटेंट बनाकर आत्मनिर्भर बनने की राह दिखाई।

मां ने संघर्ष को बनाया सफलता की सीढ़ी
आरएएस 2024 में 460वीं रैंक प्राप्त करने वाले विजय कुमार ने अपनी मां संतोष देवी को जीवन की “नींव” बताया। उन्होंने कहा कि मां ने बचपन से मेहनत, स्वाभिमान और धैर्य का पाठ पढ़ाया। परिवार की आर्थिक परिस्थितियों के बीच मां ने मजदूरी और कैटरिंग का कार्य करते हुए बेटे के सपनों को जिंदा रखा।
लगातार संघर्ष और असफलताओं के बावजूद मां ने कभी हार मानने नहीं दी। विजय ने बताया कि पिछले दो वर्षों में चार सरकारी नौकरियों में चयन और आरएएस में सफलता उनकी मां की तपस्या का परिणाम है।


