वृंदावन में हरियाली तीज के अवसर पर गाड़ी एंट्री को लेकर हाथरस से मेला ड्यूटी पर आए DSP का अलीगढ़ की कोल विधानसभा क्षेत्र से विधायक के बीच हुए विवाद के मामले में अब MLA ने अपना पक्ष रखते हुए वीडियो जारी किया है। इस वीडियो में विधायक ने कहा कि वहां मौजूद सीओ को परिचय देने के बावजूद भी उन्होंने कोई रिस्पॉन्स नहीं दिया,जबकि वहां से पुलिस कर्मी अपने परिवार के लोगों को गाड़ियों में बिठाकर आसानी से निकल रहे थे। बैरियर पर मौजूद पुलिस कर्मियों ने जन प्रतिनिधि का सम्मान करने की बजाय अपमान किया। पहले जानिए क्या था विवाद शनिवार को हरियाली तीज पर्व को लेकर पुलिस ने वृंदावन में बाहरी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा रखी थी। सौ शैय्या तिराहे पर एंट्री को लेकर अलीगढ़ की कोल विधानसभा क्षेत्र से विधायक अनिल पाराशर का वहां ड्यूटी पर आए हाथरस के सिकंदराराऊ सर्कल के सीओ अमित पाठक से विवाद हो गया। कहासुनी का वीडियो रविवार को सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। जिसमें विधायक DSP अमित पाठक से कह रहे हैं कि वर्दी का सम्मान करो। आप लोग तानाशाही कर रहे हैं,जन प्रतिनिधि को जन प्रतिनिधि नहीं समझ रहे। वीडियो वायरल होने के बाद विधायक ने रखा पक्ष 1 मिनट 13 सेकंड के वायरल हुए वीडियो के बाद रविवार की देर शाम भाजपा विधायक अनिल पाराशर ने अपना बयान देते हुए वीडियो जारी किया। अनिल पाराशर ने कहा कि वह अपने एक रिश्तेदार का हालचाल लेने के लिए वृंदावन के अटल्ला चुंगी चौराहा पर जा रहे थे। बैरियर पर पुलिस कर्मी व्यवस्था में लगे थे। विधायक ने कहा कि वह मथुरा रोड से होकर वृंदावन की तरफ आ रहे थे लेकिन वहां जाम लगा था। काफी देर तक वह जाम में फंसे रहे,जबकि बैरियर के दूसरी तरफ बिल्कुल रोड खाली थी। आधा पौने घंटे तक नहीं निकलने दी गाड़ी विधायक अनिल पाराशर ने जारी किए वीडियो में कहा कि जब उनकी गाड़ी बैरियर के पास पहुंची तो उनके साथ मौजूद पुलिस स्टाफ ने वहां तैनात पुलिस कर्मियों से कहा कि गाड़ी में विधायक जी हैं और वह अपने रिश्तेदार के यहां जा रहे हैं। इसके बाद भी पुलिस ने कोई रिस्पॉन्स नहीं दिया। वहां मौजूद सीओ जो कुर्सी पर बैठे थे उन्होंने कहा जिसको जरूरत है वह उनके पास आए। जबकि दोनों के बीच 10 मीटर का फासला नहीं था। जबकि वहां से पुलिस कर्मी अपने परिवार के साथ गाड़ियों में बैठकर आसानी से निकल रहे थे। जन प्रतिनिधियों से है कोई दुश्मनी इसके बाद विधायक ने कहा कि वह गाड़ी से उतरकर सीओ के पास गए और कहा कि पाठक जी आपकी जन प्रतिनिधियों से कोई दुश्मनी है क्या। विधायक ने कहा आधा पौने घंटे तक वह बहस करते रहे,स्टाफ से कहा जिसको जरूरत है उनके पास आ जाए। वह ऐसा व्यवहार कर रहे थे जैसे कोई दुश्मनी हो,कोई नाराजगी हो। इसको उन्होंने अनर्गल रूप दिया,तानाशाही का परिचय दिया और जो मैने कहा वह वीडियो वायरल करा दिया,जबकि खुद के द्वारा कही बातों का वीडियो वायरल नहीं कराया। विधायक ने स्वीकार किया कि उन्होंने इतना जरूर कहा कि जन प्रतिनिधि का सम्मान करना सीखिए,वर्दी का सम्मान करिए। विधायक का प्रोटोकॉल चीफ सेक्रेटरी से ज्यादा विधायक अनिल पाराशर ने कहा कि एक तरफ कहा जाता है विधायक का प्रोटोकॉल चीफ सेक्रेटरी से ऊपर है,दूसरी तरफ उनके सामने ही अधिनस्थों की गाड़ियां वहां से निकल रहे हैं। एक जन प्रतिनिधि विधायक की गाड़ी को जान बूझकर रोका गया,दुर्भावना से रोका और आधा पौने घंटे तक वहां रोके रखना इसमें पुलिस का कौन सा प्रोटोकॉल बिगड़ गया यह उनकी समझ में नहीं आया। हमारे व्यवहार को कोई गलत नहीं कह सकता विधायक अनिल पाराशर ने कहा कि 9 साल का कार्यकाल हो चुका है अलीगढ़ में भी उनके व्यवहार के बारे में बता सकता है। वह बांके बिहारी के दर्शन करने नहीं जा रहे थे,अपने रिश्तेदार का हालचाल जानने जा रहे थे,यह गलत है क्या। आपातस्थिति में कोई कहीं नहीं जा सकता। विधायक ने कहा कि पुलिस को अपने विवेक का इस्तेमाल करना चाहिए मौके पर जो स्थिति है उसके अनुसार निपटना चाहिए। इस मामले में एक तरफा वीडियो जानबूझकर वायरल किया गया। विधायक ने कहा कि इसका पुलिस के अधिकारी संज्ञान लें,उन्होंने कहा अगर दुर्व्यवहार करना होता तो में एसएसपी को फोन क्यों करता,उनके PRO का फोन मेरे पास क्यों आता। उन्होंने कहा कि एक विधायक का जानबूझकर अपमान करना सीधा सीधा विधायक के ऊपर कुठाराघात है। उन्होंने कहा कि इस मामले को मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष को वह बताएंगे।


