सोशल मीडिया प्लेटफार्म इंस्टाग्राम की मूल कंपनी मेटा प्रबंधन ने बुधवार को हाई कोर्ट में कहा कि उसके द्वारा एंड-टू-एंड एंक्रिप्टेड मैसेजिंग सेवा जारी रखी गई है। उसने पॉलिसी में परिवर्तन जरूर किया है लेकिन सिर्फ इतना कि अगर शासन किसी मामले में उससे जानकारी मांगेगी तो वह शासन को जानकारी उपलब्ध कराएगी। किसी तीसरे व्यक्ति को किसी तरह की जानकारी नहीं दी जाएगी। मेटा ने यह मौखिक जानकारी बुधवार को उस जनहित याचिका में दी जिसमें इंस्टाग्राम की एंड-टू-एंड एंक्रिप्टेड मैसेजिंग सेवा समाप्त होने की सूचना को चुनौती दी गई है। कोर्ट ने मेटा को नोटिस जारी कर छह सप्ताह में लिखित जवाब मांगा है। इंस्टाग्राम द्वारा अपने प्लेटफॉर्म से एंड-टू-एंड एंक्रिप्टेड मैसेजिंग सेवा आठ मई से समाप्त करने की सूचना जारी की गई है। इसे चुनौती देते हुए अभिभाषक पार्थ शर्मा ने जनहित याचिका प्रस्तुत की है। इसमें आरोप है कि कंपनी की इस पालिसी से निजता का हनन होगा। आशंका है कि इस साइट का उपयोग करने वालों के डेटा को इस प्लेटफार्म की मालिक कंपनी मेटा सहित अन्य भी देख सकेंगे। यह संविधान द्वारा नागरिकों को दिए गए निजता के अधिकार का हनन होगा। कपिल सिब्बल ने स्पष्ट की कंपनी की नई नीति बुधवार को मेटा की ओर से वरिष्ठ अभिभाषक कपिल सिब्बल वीसी से उपस्थित हुए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि समाचार पत्रों में प्रकाशित समाचारों के बाद वे उपस्थित हुए हैं। उन्होंने मेटा की इंस्टाग्राम को लेकर बनाई गई नई नीति को स्पष्ट करते हुए बताया कि कंपनी कानून के दायरे में रहकर काम कर रही है। तय किया गया है कि गैरकानूनी गतिविधि होने, आपराधिक मामले इत्यादि रोकने के लिए शासन द्वारा जानकारी मांगने पर कंपनी शासन को डेटा उपलब्ध कराएगी। यह जानकारी किसी अन्य को उपलब्ध नहीं होगी। डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड में नियुक्ति न होने का मुद्दा सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील जैन ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन अधिनियम के तहत बनाए गए डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड ऑफ इंडिया (डीपीबीआइ) के समक्ष शिकायत प्रस्तुत कर सकते हैं, लेकिन वर्तमान में इस बोर्ड में कोई नियुक्ति ही नहीं हुई है। इसी कारण मामले को सीधे न्यायालय के समक्ष लाना पड़ा। कोर्ट ने अब इस पूरे प्रकरण में मेटा से विस्तृत लिखित जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।


