MEA Briefing : West Asia, China, Bangladesh, Palestine मुद्दों पर India ने कही बड़ी बात, Pakistan से Sugar खरीदने की संभावनाओं पर भी दिया जवाब

MEA Briefing : West Asia, China, Bangladesh, Palestine मुद्दों पर India ने कही बड़ी बात, Pakistan से Sugar खरीदने की संभावनाओं पर भी दिया जवाब
भारतीय विदेश मंत्रालय की प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने विभिन्न मुद्दों पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दिए। पाकिस्तान में भारतीय उच्चायोग से जुड़े ढांचों को हटाए जाने, समुद्री लुटेरों द्वारा अगवा किए गए जहाजों में सवार भारतीय नाविकों की सुरक्षा, पश्चिम एशिया की स्थिति, बांग्लादेश, भारत-चीन सीमा, नेपाल, अरिहा शाह, गंगा जल संधि, सार्क और जम्मू-कश्मीर से लेकर फिलिस्तीन तथा USCIRF की रिपोर्ट तक कई अहम मुद्दों पर भारत का आधिकारिक पक्ष सामने आया।
सबसे पहले पाकिस्तान में भारतीय उच्चायोग से जुड़े घटनाक्रम पर विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि वहां कुछ ढांचों को भारत के अनुरोध के बावजूद हटा दिया गया। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि इस कार्रवाई के बाद भारत ने भी इसे “अनुपातिक कार्रवाई” के तौर पर देखा और नई दिल्ली स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग के बाहर की लेन में मौजूद कुछ अस्थायी ढांचों को हटा दिया। हालांकि, पाकिस्तान द्वारा अमेरिकी राजनयिक को तलब किए जाने के सवाल पर जायसवाल ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें “पाकिस्तान की निराशा पर टिप्पणी करने का कोई कारण नहीं दिखता।”

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समुद्री सुरक्षा के मुद्दे पर विदेश मंत्रालय ने दो विदेशी ध्वज वाले जहाजों के समुद्री लुटेरों द्वारा अगवा किए जाने की पुष्टि की। इन दोनों जहाजों पर कुल 22 भारतीय नाविक सवार हैं, जिनमें एक जहाज पर 16 और दूसरे पर छह भारतीय शामिल हैं। जायसवाल ने कहा कि अब तक मिली जानकारी के अनुसार सभी 22 भारतीय सुरक्षित हैं और भारत संबंधित अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है। उन्होंने दोहराया कि भारतीय नाविकों और समुद्री समुदाय की सुरक्षा और कल्याण भारत की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है तथा किसी भी संकट की स्थिति में भारत संबंधित अधिकारियों के समक्ष यह मुद्दा सक्रियता से उठाता है।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और घटनाक्रम पर भारत ने फिलहाल सतर्क रुख अपनाया है। प्रवक्ता ने कहा कि भारत क्षेत्र की स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है। हालांकि, फिलिस्तीन के प्रति भारत की स्थिति को विदेश मंत्रालय ने विस्तार से स्पष्ट किया। विदेश मंत्रालय की सचिव श्रीप्रिया रंगनाथन ने 18 से 20 अगस्त तक फिलिस्तीन की तीन दिवसीय यात्रा की, जहां उन्होंने फिलिस्तीन के प्रधानमंत्री समेत विदेश मंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, श्रम मंत्री और शिक्षा मंत्री के साथ उच्चस्तरीय बैठकें कीं।
फिलिस्तीनी नेतृत्व के साथ बातचीत के दौरान भारत ने बातचीत के जरिए समाधान और दो-राष्ट्र समाधान के प्रति अपनी लंबे समय से चली आ रही प्रतिबद्धता दोहराई। भारत ने गाजा की मानवीय स्थिति पर भी चिंता जताई और सतत मानवीय सहायता, संवाद और कूटनीति की जरूरत पर जोर दिया। भारत ने फिलिस्तीन के विकास में एक मजबूत साझेदार बने रहने की अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई। इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष पर भी जायसवाल का रुख स्पष्ट रहा—भारत दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन करता है।
भारत-चीन संबंधों और सीमा मुद्दे पर प्रवक्ता ने कहा कि सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय के लिए गठित कार्य तंत्र, यानी WMCC की बैठक हो चुकी है और उसके दौरान हुई चर्चा की जानकारी पहले ही साझा की जा चुकी है। बैठक के बाद के घटनाक्रम और आगे की प्रगति के बारे में भारत समय आने पर जानकारी देगा।
भारत-चीन सीमा व्यापार को लेकर भी अहम संकेत मिले। विदेश मंत्रालय ने बताया कि तीन ट्रेडिंग पोस्ट खोलने का निर्णय लिया गया है। नाथुला व्यापारिक मार्ग खुल चुका है, जबकि सीमा व्यापार के दो अन्य बिंदुओं को सक्रिय करने पर भी निर्णय लिया गया है। हालांकि इन दोनों बिंदुओं की वर्तमान स्थिति के बारे में विदेश मंत्रालय बाद में विस्तृत जानकारी देगा।
नेपाल के साथ भारत के रक्षा संबंधों पर भी प्रवक्ता ने सकारात्मक तस्वीर पेश की। भारतीय सेना प्रमुख की हालिया नेपाल यात्रा को “बहुत अच्छी यात्रा” बताते हुए जायसवाल ने कहा कि उन्हें वहां मानद जनरल की उपाधि दी गई, जो दोनों देशों और दोनों सेनाओं के बीच गहरी मित्रता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि सेना प्रमुख की यात्रा ने विशेष रूप से रक्षा क्षेत्र में भारत-नेपाल संबंधों को और मजबूत किया है। अग्निपथ योजना से जुड़े सवाल पर उन्होंने रक्षा मंत्रालय को इस विषय पर अधिक उपयुक्त बताया।
बांग्लादेश से जुड़े सवालों पर विदेश मंत्रालय ने फिलहाल संयमित रुख अपनाया। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री की भारत यात्रा की संभावनाओं पर जायसवाल ने कहा कि उनके पास इस विषय पर फिलहाल साझा करने के लिए कुछ नहीं है और कोई अपडेट होने पर जानकारी दी जाएगी। वहीं गंगा जल संधि के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि यह समझौता 1996 में 30 वर्षों के लिए किया गया था। भारत और बांग्लादेश के बीच जल और नदियों से जुड़े सभी मुद्दों पर द्विपक्षीय संयुक्त नदी आयोग के एजेंडे के तहत चर्चा होती है, जबकि गंगा जल संधि की संयुक्त समिति की तकनीकी स्तर पर बैठकें भी जारी रहती हैं।
अरिहा शाह के मामले पर प्रवक्ता ने कहा कि उनके पास फिलहाल कोई नया अपडेट नहीं है, लेकिन भारत उसकी सांस्कृतिक जरूरतों का ध्यान रख रहा है। भारतीय दूतावास अरिहा और जर्मन अधिकारियों के संपर्क में बना हुआ है।
सार्क के भविष्य पर पूछे गए सवाल पर जायसवाल ने एक बार फिर भारत की पुरानी स्थिति दोहराई और कहा कि सभी जानते हैं कि सार्क की प्रगति क्यों रुकी हुई है तथा इसके लिए एक विशेष देश जिम्मेदार है। नए महासचिव की उम्मीदवारी से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि इस विषय में वह बाद में स्थिति स्पष्ट करेंगे।
अमेरिकी राजदूत के जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दौरे के मद्देनजर भारत ने अपना रुख एक बार फिर स्पष्ट और दृढ़ शब्दों में दोहराया। जायसवाल ने कहा कि जम्मू, कश्मीर और लद्दाख, जो भारत के केंद्रशासित प्रदेश हैं, भारत का अभिन्न अंग थे, हैं और हमेशा रहेंगे।
इस बीच, अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग यानी USCIRF की उस रिपोर्ट पर भी विदेश मंत्रालय ने कड़ी प्रतिक्रिया दी, जिसमें आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की गई थी। जायसवाल ने प्रभासाक्षी के प्रश्न का उत्तर देते हुए इस अमेरिकी संस्था को पक्षपाती बताते हुए कहा कि यह लंबे समय से भारत के खिलाफ अपमानजनक और भड़काऊ टिप्पणियां करती रही है। उन्होंने कहा कि ऐसी संस्थाएं अपने एजेंडे के तहत काम करती हैं और उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठते रहे हैं। साथ ही पाकिस्तान से चीनी खरीदे जाने के मुद्दे पर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान को लेकर हम अपने पुराने रुख पर कायम हैं।
कुल मिलाकर, विदेश मंत्रालय की इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत ने एक साथ कई संवेदनशील मोर्चों पर अपना रुख स्पष्ट किया। पाकिस्तान के साथ कूटनीतिक जवाबी कार्रवाई हो, समुद्री लुटेरों के कब्जे वाले जहाजों में फंसे भारतीयों की सुरक्षा, चीन के साथ सीमा वार्ता और व्यापार, नेपाल के साथ रक्षा सहयोग, बांग्लादेश के साथ जल संबंधी मुद्दे या फिर फिलिस्तीन और गाजा की मानवीय स्थिति—नई दिल्ली ने हर विषय पर अपने राष्ट्रीय हितों, नागरिकों की सुरक्षा और स्थापित कूटनीतिक नीति को केंद्र में रखकर अपनी स्थिति सामने रखी। बहरहाल, आइये देखते हैं विस्तृत प्रेस वार्ता में प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने और क्या बड़ी बातें कहीं।

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