Maruti Suzuki Q2 Results: रिकॉर्ड बिक्री के बावजूद 27% घटा मारुति सुजुकी का मुनाफा, जानिए क्या रही वजह

    Maruti Suzuki Q2 Results: रिकॉर्ड बिक्री के बावजूद 27% घटा मारुति सुजुकी का मुनाफा, जानिए क्या रही वजह

    देश की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया के लिए वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही बिक्री के लिहाज से काफी अच्छी रही, लेकिन मुनाफे के मोर्चे पर कंपनी को झटका लगा है। जुलाई से सितंबर 2026 के दौरान कंपनी ने अब तक की सबसे ज्यादा तिमाही बिक्री दर्ज की। इसके बावजूद बढ़ती कमोडिटी लागत और निवेश पर हुए नुकसान के कारण कंपनी का मुनाफा करीब 27% गिर गया।

    कंपनी की घरेलू बिक्री में अच्छी बढ़ोतरी हुई है। छोटी कारों से लेकर एसयूवी तक की मांग मजबूत रही। मारुति की बाजार हिस्सेदारी भी बढ़ी, लेकिन बढ़ी हुई मांग के मुकाबले उत्पादन कम पड़ रहा है। सितंबर के आखिर तक कंपनी के पास करीब 2 लाख गाड़ियों की बुकिंग पेंडिंग थी।

    मारुति सुजुकी का मुनाफा 26.9% घटा

    मारुति सुजुकी इंडिया का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में सालाना आधार पर 26.9% घटकर 2,414.9 करोड़ रुपये रह गया। पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में कंपनी ने 3,302.8 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था। कंपनी का मुनाफा बाजार के अनुमान से भी कम रहा। विश्लेषकों को दूसरी तिमाही में करीब 2,832 करोड़ रुपये के नेट प्रॉफिट की उम्मीद थी।

    रेवेन्यू में आया अच्छा उछाल

    हालांकि, कंपनी के रेवेन्यू में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई। जुलाई से सितंबर के दौरान ऑपरेशंस से स्टैंडअलोन रेवेन्यू 26% बढ़कर 53,340.2 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। पिछले साल की समान तिमाही में यह 42,332.3 करोड़ रुपये था। हालांकि, यह बाजार के 53,465 करोड़ रुपये के अनुमान से थोड़ा कम रहा।

    ऑपरेटिंग प्रॉफिट में भी गिरावट

    कंपनी की कमाई बढ़ने के बावजूद परिचालन मुनाफे पर दबाव देखने को मिला। दूसरी तिमाही में मारुति सुजुकी का ऑपरेटिंग प्रॉफिट यानी ब्याज और टैक्स से पहले की कमाई (EBIT) सालाना आधार पर 17.1% गिरकर 2,803.7 करोड़ रुपये रह गया। एक साल पहले इसी अवधि में यह 3,382 करोड़ रुपये था। हालांकि, पिछली तिमाही यानी अप्रैल से जून 2026 के मुकाबले कंपनी का EBIT 10.8% बढ़ा है।

    क्यों गिरा मुनाफा?

    कंपनी के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण कमोडिटी की कीमतों में बढ़ोतरी हुई। इससे गाड़ियों के उत्पादन की लागत बढ़ी और ऑपरेटिंग प्रॉफिट पर दबाव पड़ा। इसके अलावा, कंपनी के पास मौजूद अतिरिक्त निवेश पर बाजार भाव के हिसाब से हुए नुकसान ने भी मुनाफे को प्रभावित किया। इसे मार्क-टू-मार्केट लॉस कहा जाता है।

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