प्रसिद्ध हिंदी कवि कुमार विश्वास इन दिनों श्रीरामचरितमानस का पाठ कर रहे हैं। अपने प्रवचन के दौरान उन्होंने सनातन धर्म की परंपराओं को बेहद सरल भाषा में समझाया। इस दौरान उन्होंने खास तौर पर सांवलिया सेठ मंदिर और वहां विराजित सांवलिया सेठ का जिक्र करते हुए कहा कि लोग उन्हें अपने काम का पार्टनर मानते हैं। उन्होंने बताया कि मारवाड़ और गुजरात के कई व्यापारी अपने व्यापार में भगवान को हिस्सेदार बनाते हैं और अपनी कमाई का एक हिस्सा उन्हें अर्पित करते हैं। कुमार विश्वास ने इसे आज के दौर की शेयर व्यवस्था से जोड़ते हुए कहा कि जब किसी कंपनी में बड़ा निवेशक जुड़ता है तो उसकी कीमत बढ़ जाती है, उसी तरह जब इंसान अपने काम में भगवान को शामिल करता है तो उसके काम की कीमत और सफलता कई गुना बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि यह आस्था ही लोगों को आगे बढ़ने की ताकत देती है। मंगलाचरण की परंपरा और श्लोक के जरिए दिया संदेश कुमार विश्वास ने अपने पाठ की शुरुआत इस श्लोक से की— वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मंगलानां च कर्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ उन्होंने इस श्लोक का अर्थ समझाते हुए बताया कि इसमें माता सरस्वती और भगवान गणेश की वंदना की गई है, जो अक्षरों, अर्थों, रसों और छंदों के माध्यम से हर कार्य को शुभ बनाते हैं। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति में यह परंपरा रही है कि किसी भी कार्य की शुरुआत भगवान के स्मरण से की जाए, ताकि वह कार्य बिना किसी बाधा के पूरा हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि जब हम अपने मन की इच्छा यानी अभीष्ट को पाने के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हैं, तो हमें सकारात्मक ऊर्जा मिलती है और सफलता की राह आसान हो जाती है। व्यापार में ‘सांवलिया सेठ की हिस्सेदारी’ से बढ़ती है सफलता कुमार विश्वास ने इस पूरे श्लोक को समझाने के लिए सांवलिया सेठ का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि राजस्थान में एक बड़ा प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है सांवलिया सेठ मंदिर। वहां भगवान श्री कृष्ण सेठ के रूप में विद्यमान हैं। सेठ के रूप में उन्हें सब मानते हैं, क्योंकि पूरे मारवाड़ और गुजरात के बहुत सारे व्यापारी भगवान को अपने व्यापार में कुछ प्रतिशत का हिस्सेदार बनाते हैं—एक प्रतिशत भगवान की पाई डाल दी। आज यह जो इक्विटी शेयरिंग हो रही है—कि साहब, इनमें निवेश कर दिया इस बड़ी कंपनी ने, तुरंत ही उस कंपनी का शेयर बढ़ जाता है; उनके साथ आ गए यह बड़े व्यक्ति, तुरंत उस कंपनी का शेयर बढ़ जाता है—तो जब सामान्य मनुष्यों के आने से आपके कार्य का सूचकांक इतना बढ़ जाता हो, तो ईश्वर के साथ आ जाने से आपके कार्य का सूचकांक कितना बढ़ सकता है? तो सबसे पहले निर्विघ्न कार्य पूर्ति के लिए, मनचाहा पाने के लिए, मंगलाचरण सनातन धर्म की परंपरा है। यहां भी सबसे पहले बिना रुकावट के काम पूरा करने के लिए, मनचाहा पाने के लिए, मंगलाचरण सनातन धर्म की परंपरा है।


