बालाघाट कलेक्टर मृणाल मीणा ने जिले के सभी एसडीएम को अनुसूचित जनजाति वर्ग के व्यक्तियों के बीच हुए भूमि हस्तांतरण और नामांतरण की विस्तृत सूची तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इस जांच के दायरे में कोविड काल से लेकर वर्तमान समय तक के जमीन क्रय-विक्रय के सभी दस्तावेज शामिल रहेंगे। कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि सात दिनों के भीतर यह सूची प्रशासन को प्रस्तुत करनी होगी। प्रॉपर्टी ब्रोकरों द्वारा आदिवासियों के शोषण की आशंका यह आदेश उन शिकायतों के बाद जारी किए गए हैं जिनमें प्रॉपर्टी निवेशक आदिवासी वर्ग के लोगों को प्रलोभन देकर उनकी जमीनें कम कीमत पर खरीद रहे थे। बाद में इन जमीनों को ऊंचे दामों पर बेचकर अवैध लाभ कमाया जा रहा था। प्रशासन अब इन सभी संदिग्ध बेनामी और आदिवासी संपत्ति से जुड़े लेनदेन की बारीकी से पड़ताल करेगा। आयकर छापे के बाद जांच के दायरे में गणेश कुंभरे वारासिवनी क्षेत्र के तुमाड़ी निवासी गणेश कुंभरे के यहां आयकर विभाग की हालिया छापामार कार्रवाई के बाद यह मुद्दा गरमाया है। जांच में संकेत मिले थे कि गणेश कुंभरे को मोहरा बनाकर कई बड़े प्रॉपर्टी ब्रोकरों ने आदिवासियों की जमीनें खरीदी थीं। कलेक्टर के नए निर्देशों के बाद इस अवधि में कुंभरे द्वारा किए गए सभी भूमि सौदे भी जांच के दायरे में आएंगे। ई-टोकन और राजस्व प्रकरणों के निराकरण पर जोर राजस्व अधिकारियों की बैठक में कलेक्टर ने अन्य प्रशासनिक कार्यों की भी समीक्षा की। उन्होंने उर्वरक वितरण ई-टोकन के माध्यम से करने, फार्मर रजिस्ट्री का काम शीघ्र पूरा करने और आरसीएमएस पोर्टल पर लंबित प्रकरणों के तत्काल निराकरण के आदेश दिए। साथ ही नक्शा तरमीम, रिकॉर्ड दुरुस्ती और साइबर तहसील की प्रगति की भी जानकारी ली। लापरवाह पटवारियों पर होगी कड़ी कार्रवाई सीएम हेल्पलाइन में दर्ज शिकायतों के निराकरण में देरी करने वाले कर्मचारियों के प्रति कलेक्टर ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने लापरवाही बरतने वाले पटवारियों को चिह्नित कर उनके विरुद्ध सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। बैठक में स्वामित्व योजना और अन्य जनहितकारी राजस्व सेवाओं को समय सीमा में पूरा करने पर बल दिया गया।


