औरैया। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम व कोतवाली पुलिस ने जीएसटी चोरी के बड़े गिरोह का खुलासा करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों में मेरठ निवासी एक चार्टर्ड अकाउंटेंट भी शामिल है। गिरोह पर बोगस फर्मों के जरिए 8.62 करोड़ रुपये की टैक्सेबल वैल्यू के फर्जी बिल काटकर इनपुट टैक्स क्रेडिट हड़पने का आरोप है। पूछताछ के बाद सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें इटावा जेल भेज दिया गया।
पुलिस अधीक्षक अभिषेक भारती ने बताया कि मामले की शुरुआत 23 फरवरी 2026 को हुई थी। राज्य कर अधिकारी औरैया विजय शंकर दीक्षित ने मून इंटरप्राइजेज, खानपुर के खिलाफ जीएसटी चोरी की प्राथमिकी दर्ज कराई थी। जांच में सामने आया कि यह फर्म केवल कागजों पर संचालित थी और घोषित पते पर इसका कोई अस्तित्व नहीं मिला। कड़ियां जोड़ते हुए पुलिस मेरठ पहुंची और गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपियों में मोहम्मद अतहर निवासी शास्त्री नगर थाना नौचंदी, सीए शाह आलम निवासी तारापुरी रोड थाना लिसाड़ी गेट, विशाल निवासी मोहनपुरी थाना सिविल लाइंस और मोहम्मद इमरान निवासी महलवाला थाना किठौर शामिल हैं। एसपी के अनुसार मोहम्मद अतहर गिरोह का मुख्य संचालक था, जिसने मून इंटरप्राइजेज का एक्सेस खरीदकर फर्जीवाड़ा शुरू किया। सीए शाह आलम व उसका सहायक विशाल अकाउंटेंसी का काम देखते थे और फर्जी बिल तैयार करते थे। वहीं इमरान फर्जी दस्तावेज जुटाकर नई बोगस फर्में बनवाता था।
जांच में खुलासा हुआ कि गिरोह ने मून इंटरप्राइजेज और चमन ट्रेडर्स हापुड़ के नाम से दो बोगस कंपनियां बना रखी थीं। मून इंटरप्राइजेज के माध्यम से 2.87 करोड़ रुपये और चमन ट्रेडर्स के जरिए 5.75 करोड़ रुपये की टैक्सेबल वैल्यू के फर्जी बिलों का लेनदेन किया गया। कुल 8.62 करोड़ के फर्जी बिलों से सरकार को राजस्व की हानि पहुंचाई गई। आरोपियों ने पूछताछ में कबूल किया कि वे बिना किसी वास्तविक माल की खरीद-बिक्री के केवल कागजों पर लेनदेन दिखाकर अवैध रूप से आईटीसी क्लेम करते थे। असल में कोई माल सप्लाई नहीं होता था।
कोतवाल राजकुमार सिंह ने बताया कि आरोपियों के पास से तीन लैपटॉप, नौ मोबाइल फोन, तीन डोंगल, एक हार्ड डिस्क, दो पेनड्राइव, 16 डीएससी डिवाइस, दो स्मार्ट एआई राउटर, 60,330 रुपये नकद, छह टैक्स इनवॉइस बिल की प्रतियां और अन्य फर्जी दस्तावेज बरामद हुए हैं। वही एसपी ने कहा कि एसआईटी अब गिरोह के अन्य नेटवर्क और इन फर्जी फर्मों से लाभ उठाने वाले व्यापारियों की तलाश कर रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि गिरोह के तार किन-किन शहरों से जुड़े हैं। मामले में और गिरफ्तारियां संभव हैं।


