बरेली। शहर की किला नदी पर वर्षों से हो रहे कब्जों और अवैध निर्माणों का मामला अब मानवाधिकार आयोग तक पहुंच गया है। आरोप है कि कॉलोनाइजरों, भूमाफियाओं और दबंगों ने नदी की जमीन पर कब्जा कर उसका स्वरूप ही बदल दिया। कई जगह नदी सिकुड़कर नाले जैसी दिखाई देने लगी है, जबकि कुछ स्थानों पर स्थायी निर्माण और बाउंड्रीवाल खड़ी कर दी गई हैं। मामले में अब नगर निगम से विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई है, जिसके बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
जांच के दौरान सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि राजस्व अभिलेखों में सैदपुर हाकिंस और सुर्खा छावनी क्षेत्र में नदी का स्पष्ट उल्लेख नहीं मिला, लेकिन मौके पर नदी बहती हुई पाई गई। अधिकारियों ने कई बार मौके का निरीक्षण किया, जिसके बाद अब लोगों को उम्मीद है कि लंबे समय से चले आ रहे कब्जों पर कार्रवाई हो सकती है। तहसील सदर की टीम द्वारा कराए गए सीमांकन में ग्राम वाकरनगर, सुंदरासी, महलऊ, मैदापुर, सनौआ, विधौलिया, महेशपुर अटरिया, रहपुरा चौधरी, मठ लक्ष्मीपुर, मठ कमलनैनपुर और सुर्खा छावनी क्षेत्रों में नदी की स्थिति की जांच की गई। रिपोर्ट में सामने आया कि नदी कई स्थानों पर अपने मूल रास्ते पर तो बह रही है, लेकिन उसका स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है और वह नाले जैसी दिखाई दे रही है।
नदी की जमीन पर मकान और बाउंड्रीवाल
जांच रिपोर्ट में सैदपुर हाकिंस, रहपुरा चौधरी, मठ लक्ष्मीपुर, मठ कमलनैनपुर, महेशपुर अटरिया, स्वालेनगर नवदिया, सुर्खा छावनी, जसौली और मैदापुर क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण की पुष्टि हुई है। कई जगह नदी की जमीन पर मकान, पक्की बाउंड्रीवाल और अन्य स्थायी निर्माण खड़े मिले। रिपोर्ट के अनुसार सैदपुर हाकिंस में गाटा संख्या 391 पर तीन मकान और दो बुनियाद मिलीं, जबकि गाटा संख्या 886 और 887 पर स्थायी बाउंड्रीवाल बनाई गई थी। कई स्थानों पर कब्जाधारकों के नाम तक स्पष्ट नहीं किए गए और रिपोर्ट में अज्ञात लिख दिया गया।
मानवाधिकार आयोग की एंट्री से बढ़ा दबाव
स्थानीय लोगों का आरोप है कि वर्षों से नदी की जमीन पर कब्जे होते रहे, लेकिन जिम्मेदार विभागों ने समय रहते कार्रवाई नहीं की। अब मामला मानवाधिकार आयोग तक पहुंचने के बाद प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है। जिला प्रशासन ने नगर निगम से पूरी डिटेल मांगी है। नगर निगम के एक्सईएन राजीव कुमार राठी ने बताया कि संपत्ति विभाग से पूरी जानकारी जुटाई जा रही है। रिपोर्ट तैयार कर जिला प्रशासन को भेजी जाएगी, जिसके बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।


