MP Highcourt- मध्यप्रदेश हाईकोर्ट जबलपुर ने न्यायिक व्यवस्था में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। राज्य में सभी अदालतों का रिकॉर्ड एक क्लिक पर मुहैया कराया गया है। इसी के साथ कोर्ट में तकनीक के उपयोग को नई ऊंचाई दी गई है। इसके अंतर्गत प्रदेश की सभी अदालतों का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल कर दिया गया है। कोर्ट में सभी अभिलेख सुरक्षा व सुगमता से एक क्लिक पर लाने डिजिटाइज कर दिए गए हैं। हाईकोर्ट के निर्देशन में प्रदेशभर में करीब 97.08 करोड़ पेज स्कैन कर डिजिटल किए गए। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की तीनों खंडपीठ जबलपुर, इंदौर, ग्वालियर समेत राज्य की सभी जिला व तहसील अदालतों में यह काम किया गया है। इसका सबसे ज्यादा फायदा यह है कि लोगों को आवेदन के फौरन बाद ही हाईकोर्ट व अन्य कोर्ट के रिकॉर्ड उपलब्ध हो जाएंगे।
विधि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक प्रदेश ने तकनीक के उपयोग में श्रेष्ठता साबित की है। राज्य में न केवल सभी अदालतों का रिकॉर्ड एक क्लिक पर मुहैया कराया जा रहा है बल्कि विधि संबंधी किताबों के करीब 59 लाख पेजों को भी डिजिटाइज किया गया है।
प्रदेशभर के वरिष्ठ वकीलों का कहना है कि इतने व्यापक पैमाने पर न्यायिक अभिलेखों का डिजिटाइजेशन करने वाला मप्र देश का पहला हाईकोर्ट
जबलपुर हाईकोर्ट सहित प्रदेशभर के वरिष्ठ वकीलों का कहना है कि इतने व्यापक पैमाने पर न्यायिक अभिलेखों का डिजिटाइजेशन करने वाला मप्र देश का पहला हाईकोर्ट है। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय वर्मा बताते हैं कि कोर्ट के सभी रिकॉर्ड डिजिटल करने का काम सराहनीय है। इससे दूरदराज के पक्षकारों, वकीलों और जजों को भी खासी सहूलियत होगी।
आवेदन के फौरन बाद मिल जाएगा हाईकोर्ट व निचली कोर्ट के रिकॉर्ड
कोर्ट के रिकॉर्ड डिजिटल होने से अनेक लाभ मिलेंगे। पक्षकार केस का रिकॉर्ड कोर्ट में आवेदन देकर ले सकेंगे। रिकॉर्ड रूम की सुरक्षा, रखरखाव में स्टाफ की बचत होगी।
देश में सबसे पहले, 2019 में भोपाल, इंदौर जिला कोर्ट व उज्जैन जिले की खाचरौद तहसील कोर्ट में यह काम पायलट स्टेप के रूप में शुरू हुआ
पूर्व सीजे एके पटनायक, पूर्व सीजे शरद अरविंद बोबड़े ने सुप्रीम कोर्ट की डिटिजल कोर्ट की संकल्पना पर काम शुरू किया था। तत्कालीन कार्यकारी सीजे केके लाहोटी ने 7 करोड़ पेज स्कैन कराने का काम शुरू कराया। इसे पूर्व सीजे एएम खानविलकर व हेमंत गुप्ता ने गति दी। 2019 में भोपाल, इंदौर जिला कोर्ट व उज्जैन जिले की खाचरौद तहसील कोर्ट में यह काम पायलट स्टेप के रूप में शुरू हुआ।


