kota : ‘आज बेटी ने मुझे नया जन्म दिया’, मां शिमला भावुक होकर बोली, चिकित्सक और स्टाफ हुए भावुक

kota : ‘आज बेटी ने मुझे नया जन्म दिया’, मां शिमला भावुक होकर बोली, चिकित्सक और स्टाफ हुए भावुक

kota : कोटा. मां ने बेटी को जन्म देकर जिंदगी दी थी, लेकिन जब मां की जिंदगी बचाने की जरूरत पड़ी तो बेटी ने अपनी किडनी दान कर मां को नया जीवन दे दिया। कोटा मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल में 28वां किडनी ट्रांसप्लांट सफल रहा। इसके बाद मरीज को शुक्रवार को स्वस्थ अवस्था में डिस्चार्ज किया गया। नवीन चिकित्सालय में बेटी के मां को किडनी दान करने का यह पहला मामला है। डिस्चार्ज के समय मां की आंखों में खुशी के आंसू थे। उन्होंने भावुक होकर कहा कि ‘मैंने अपनी बेटी को जन्म दिया था, लेकिन आज मेरी बेटी ने मुझे नया जन्म दिया और जिंदगी दी है’। मां के इन शब्दों ने वहां मौजूद चिकित्सकों और स्टाफ को भी भावुक कर दिया।

कोटा के बोरखेड़ा निवासी शिमला पिछले करीब दो साल से किडनी रोग से पीड़ित थी। वह पुलिस लाइन स्थित सरकारी स्कूल में शिक्षिका हैं। उनके पति का पहले ही निधन हो चुका है। ऐसे में परिवार के लिए मां-बेटी का रिश्ता ही सबसे बड़ा सहारा रहा। जब शिमला की हालत में किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत सामने आई तो बेटी नेहा ने बिना हिचक अपनी मां को किडनी दान करने की इच्छा जाहिर की।

ग्रेजुएशन कर चुकी नेहा ने चिकित्सकीय परीक्षण और निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद अपनी एक किडनी मां को दान की। सफल ट्रांसप्लांट के बाद शिमला स्वस्थ हैं और उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। मां को नई जिंदगी देने वाली बेटी नेहा की यह पहल परिवार के लिए भावुक और यादगार पल बन गई।

अस्पताल को सिलाई मशीन भेंट

इस अवसर पर मरीज के परिवार ने किडनी ट्रांसप्लांट यूनिट को सिलाई मशीन भेंट की। इसका उपयोग ऑपरेशन में काम आने वाले गॉज, पट्टियों, ड्रेप और ओटी क्लॉथ की सिलाई में किया जाएगा।

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Kota : किडनी ट्रांसप्लांट विंग के बाहर मरीज को डिस्चार्ज टिकट सौंपते प्रिंसिपल। फोटो पत्रिका

भावुक और प्रेरणादायी उदाहरण

मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. नीलेश कुमार जैन ने कहा कि बेटी का मां को किडनी दान करना भावुक और प्रेरणादायी उदाहरण है। चिकित्सकीय टीम के समर्पित प्रयासों से मरीज को नया जीवन मिलना पूरे संस्थान के लिए गौरव का विषय है।

नवीन चिकित्सालय के अधीक्षक डॉ. आशुतोष शर्मा ने बताया कि स्वस्थ व्यक्ति चिकित्सकीय परीक्षण के बाद निर्धारित नियमों के अनुसार अपना एक गुर्दा जरूरतमंद मरीज को दान कर सकता है। जीवित अंगदान पूरी तरह स्वैच्छिक होना चाहिए और इसमें दाता तथा प्राप्तकर्ता दोनों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है।

किडनी ट्रांसप्लांट के नोडल अधिकारी डॉ. विकास खंडेलिया ने बताया कि टीम में एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. एससी दुलारा, डॉ. शैलेंद्र गोयल, डॉ. अंकुर झंवर, डॉ. चिरंजीलाल खेड़िया, डॉ. हंसराज, किडनी ट्रांसप्लांट यूनिट प्रभारी राकेश कुमार जैन सहित यूनिट के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

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