कोलकाता, तीन अक्टूबर साल्ट लेक स्टेडियम में शनिवार को विनिसियस जूनियर और ब्राजील का स्वागत उम्मीद के अनुरूप जोश भरा नहीं रहा जहां पांच बार की विश्व चैंपियन टीम के खिलाफ भारत के ऐतिहासिक मैत्री मैच के लिए दर्शक दीर्घा के बड़े हिस्से खाली नजर आए। भारत में आयोजित होने वाला सबसे बड़ा फुटबॉल मैच इस मैदान पर आमतौर पर ‘हाई-प्रोफाइल’ मुकाबलों से जुड़ी प्रशंसकों की दीवानगी पैदा करने में विफल रहा। मैच शुरू होने के समय दर्शकों की संख्या 30,000 से काफी कम दिखाई दी जो उस स्टेडियम के लिए एक चौंकाने वाला दृश्य था।यह स्टेडियम कोलकाता डर्बी के दौरान खचाखच भरी दर्शक दीर्घाओं और जोशीली भीड़ का आदी है। हालांकि मैच आगे बढ़ने के साथ दर्शक दीर्घाएं धीरे-धीरे भरती गईं। साल्ट लेक स्टेडियम में मोहन बागान-ईस्ट बंगाल डर्बी (मुकाबलों) के दौरान नियमित रूप से भारी भीड़ जुटती है जब करीब 50,000 दर्शक आम दृश्य होते हैं।पिछले दिसंबर में लियोनेल मेस्सी के कोलकाता दौरे के दौरान भी स्टेडियम पूरी तरह भर गया था। डर्बी के दिनों में टिकटों के लिए स्टेडियम के बाहर हजारों प्रशंसक इंतजार करते दिखाई देते हैं जबकि अंदर समर्थक क्लब के गीत गाते हैं, ढोल की थाप पर नाचते हैं और मोहन बागान तथा ईस्ट बंगाल खेमों के बीच नारेबाजी करते हैं। शनिवार को उस दीवानगी का बहुत कम असर दिखाई दिया।दोनों मैच यहां सबसे बड़े त्योहारों के मौसम (दुर्गा पूजा) की तैयारियों के दौरान आयोजित किए जा रहे हैं, ऐसे में ज्यादातर प्रशंसकों ने इतने कम अंतराल में दो अंतरराष्ट्रीय मैचों पर भारी खर्च करने से परहेज किया। मैच शुरू होने से ढाई घंटे पहले भी आधिकारिक ‘डिस्ट्रिक्ट ऐप’ पर कई टिकट उपलब्ध थे। स्टेडियम के बाहर भीड़ सीमित थी और दर्शक दीर्घाओं की ओर बढ़ते समर्थकों का आमतौर पर दिखने वाला सैलाब भी नहीं था।ब्राजील के झंडे भी आश्चर्यजनक रूप से कम दिखाई दिए लेकिन देश के मीडिया दल ने मैच शुरू होने से पहले जोर-जोर से अपना राष्ट्रगान ‘हिनो नासियोनाल ब्रासीलेरो’ गाकर ध्यान आकर्षित किया। भीड़ दोनों टीमों के बीच बंटी हुई दिखाई दी, कुछ प्रशंसक ब्राजील की जर्सी पहनकर और भारतीय झंडे लेकर स्टेडियम में आए। वहीं टिकटों की ऊंची कीमतें और दुर्गा पूजा के उत्सव फीकी प्रतिक्रिया के मुख्य कारणों में से एक दिखाई दिए।मैच शुरू होने से दो घंटे पहले, कई ब्लॉकों में टिकट अब भी उपलब्ध थे जिनकी कीमत 3,500 रुपये से 6,000 रुपये तक थी। डी1 और बी1 में 3,500 रुपये, बी3, डी3 और सी1 में 5,000 रुपये तथा सी3 और डी2 में 6,000 रुपये के टिकट उपलब्ध थे। अब छह अक्टूबर को दो बार के पूर्व विश्व कप चैंपियन उरुग्वे के खिलाफ एक और मैत्री मैच है लेकिन अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) के भारत के कुछ सबसे बड़े फुटबॉल क्लबों के जरिए बिक्री बढ़ाने के प्रयासों के बावजूद उसकी बिक्री पर भी असर पड़ा है।मोहन बागान को 6,000 टिकट मिले लेकिन उसने केवल 90 बेचे जबकि ईस्ट बंगाल को 4,000 टिकट आवंटित किए गए और उसे 400 के अनुरोध मिले। आईएफए को 2,000 टिकट दिए गए लेकिन उसकी संबद्ध इकाइयों से केवल 24 अनुरोध मिले। मोहम्मडन स्पोर्टिंग को 3,000 टिकट मिले लेकिन उसने अपनी बिक्री के आंकड़े नहीं बताए।एक रिपोर्ट में कहा गया कि प्रतिक्रिया खराब रही, एक वरिष्ठ क्लब अधिकारी ने खुद 12 टिकट खरीदे। ऊंची कीमतें एक प्रमुख कारण दिखाई देती हैं। क्लबों और आईएफए को आवंटित टिकटों की कीमत 6,000 रुपये थी या 10 प्रतिशत छूट के बाद 5,400 रुपये।अधिकारियों ने कहा कि ऑनलाइन सस्ते टिकट उपलब्ध थे जिससे रियायती टिकट कम आकर्षक हो गए। आईएफए के एक अधिकारी ने कहा कि मेजबान होने के बावजूद उन्हें मैच के आयोजन में ‘पूरी तरह दरकिनार’ कर दिया गया। अधिकारी ने कहा, ‘‘आईएफए मेजबान संगठन हो सकता है लेकिन हमें पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है।एआईएफएफ ने हमें जानकारी में नहीं रखा है और कोई मानार्थ टिकट नहीं हैं। हमें 5,400 रुपये की छूट के बाद कुछ 6,000 टिकट मिले हैं, लेकिन कोई लेने वाला नहीं है। यहां लोग 500 रुपये से कम में मैच देखने के आदी हैं।’’
अब बड़ी चिंता मंगलवार को होने वाला भारत-उरुग्वे मैत्री मैच है और यह देखना बाकी है कि क्या ये मैत्री मैच उम्मीदों पर खरे उतरते हैं।
कोलकाता, तीन अक्टूबर साल्ट लेक स्टेडियम में शनिवार को विनिसियस जूनियर और ब्राजील का स्वागत उम्मीद के अनुरूप जोश भरा नहीं रहा जहां पांच बार की विश्व चैंपियन टीम के खिलाफ भारत के ऐतिहासिक मैत्री मैच के लिए दर्शक दीर्घा के बड़े हिस्से खाली नजर आए। भारत में आयोजित होने वाला सबसे बड़ा फुटबॉल मैच इस मैदान पर आमतौर पर ‘हाई-प्रोफाइल’ मुकाबलों से जुड़ी प्रशंसकों की दीवानगी पैदा करने में विफल रहा। मैच शुरू होने के समय दर्शकों की संख्या 30,000 से काफी कम दिखाई दी जो उस स्टेडियम के लिए एक चौंकाने वाला दृश्य था।
यह स्टेडियम कोलकाता डर्बी के दौरान खचाखच भरी दर्शक दीर्घाओं और जोशीली भीड़ का आदी है। हालांकि मैच आगे बढ़ने के साथ दर्शक दीर्घाएं धीरे-धीरे भरती गईं। साल्ट लेक स्टेडियम में मोहन बागान-ईस्ट बंगाल डर्बी (मुकाबलों) के दौरान नियमित रूप से भारी भीड़ जुटती है जब करीब 50,000 दर्शक आम दृश्य होते हैं।
पिछले दिसंबर में लियोनेल मेस्सी के कोलकाता दौरे के दौरान भी स्टेडियम पूरी तरह भर गया था। डर्बी के दिनों में टिकटों के लिए स्टेडियम के बाहर हजारों प्रशंसक इंतजार करते दिखाई देते हैं जबकि अंदर समर्थक क्लब के गीत गाते हैं, ढोल की थाप पर नाचते हैं और मोहन बागान तथा ईस्ट बंगाल खेमों के बीच नारेबाजी करते हैं। शनिवार को उस दीवानगी का बहुत कम असर दिखाई दिया।
दोनों मैच यहां सबसे बड़े त्योहारों के मौसम (दुर्गा पूजा) की तैयारियों के दौरान आयोजित किए जा रहे हैं, ऐसे में ज्यादातर प्रशंसकों ने इतने कम अंतराल में दो अंतरराष्ट्रीय मैचों पर भारी खर्च करने से परहेज किया। मैच शुरू होने से ढाई घंटे पहले भी आधिकारिक ‘डिस्ट्रिक्ट ऐप’ पर कई टिकट उपलब्ध थे। स्टेडियम के बाहर भीड़ सीमित थी और दर्शक दीर्घाओं की ओर बढ़ते समर्थकों का आमतौर पर दिखने वाला सैलाब भी नहीं था।
ब्राजील के झंडे भी आश्चर्यजनक रूप से कम दिखाई दिए लेकिन देश के मीडिया दल ने मैच शुरू होने से पहले जोर-जोर से अपना राष्ट्रगान ‘हिनो नासियोनाल ब्रासीलेरो’ गाकर ध्यान आकर्षित किया। भीड़ दोनों टीमों के बीच बंटी हुई दिखाई दी, कुछ प्रशंसक ब्राजील की जर्सी पहनकर और भारतीय झंडे लेकर स्टेडियम में आए। वहीं टिकटों की ऊंची कीमतें और दुर्गा पूजा के उत्सव फीकी प्रतिक्रिया के मुख्य कारणों में से एक दिखाई दिए।
मैच शुरू होने से दो घंटे पहले, कई ब्लॉकों में टिकट अब भी उपलब्ध थे जिनकी कीमत 3,500 रुपये से 6,000 रुपये तक थी। डी1 और बी1 में 3,500 रुपये, बी3, डी3 और सी1 में 5,000 रुपये तथा सी3 और डी2 में 6,000 रुपये के टिकट उपलब्ध थे। अब छह अक्टूबर को दो बार के पूर्व विश्व कप चैंपियन उरुग्वे के खिलाफ एक और मैत्री मैच है लेकिन अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) के भारत के कुछ सबसे बड़े फुटबॉल क्लबों के जरिए बिक्री बढ़ाने के प्रयासों के बावजूद उसकी बिक्री पर भी असर पड़ा है।
मोहन बागान को 6,000 टिकट मिले लेकिन उसने केवल 90 बेचे जबकि ईस्ट बंगाल को 4,000 टिकट आवंटित किए गए और उसे 400 के अनुरोध मिले। आईएफए को 2,000 टिकट दिए गए लेकिन उसकी संबद्ध इकाइयों से केवल 24 अनुरोध मिले। मोहम्मडन स्पोर्टिंग को 3,000 टिकट मिले लेकिन उसने अपनी बिक्री के आंकड़े नहीं बताए।
एक रिपोर्ट में कहा गया कि प्रतिक्रिया खराब रही, एक वरिष्ठ क्लब अधिकारी ने खुद 12 टिकट खरीदे। ऊंची कीमतें एक प्रमुख कारण दिखाई देती हैं। क्लबों और आईएफए को आवंटित टिकटों की कीमत 6,000 रुपये थी या 10 प्रतिशत छूट के बाद 5,400 रुपये।
अधिकारियों ने कहा कि ऑनलाइन सस्ते टिकट उपलब्ध थे जिससे रियायती टिकट कम आकर्षक हो गए। आईएफए के एक अधिकारी ने कहा कि मेजबान होने के बावजूद उन्हें मैच के आयोजन में ‘पूरी तरह दरकिनार’ कर दिया गया। अधिकारी ने कहा, ‘‘आईएफए मेजबान संगठन हो सकता है लेकिन हमें पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है।
एआईएफएफ ने हमें जानकारी में नहीं रखा है और कोई मानार्थ टिकट नहीं हैं। हमें 5,400 रुपये की छूट के बाद कुछ 6,000 टिकट मिले हैं, लेकिन कोई लेने वाला नहीं है। यहां लोग 500 रुपये से कम में मैच देखने के आदी हैं।
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अब बड़ी चिंता मंगलवार को होने वाला भारत-उरुग्वे मैत्री मैच है और यह देखना बाकी है कि क्या ये मैत्री मैच उम्मीदों पर खरे उतरते हैं।
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