Keytruda in India: कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसका इलाज आर्थिक रूप से भी मरीज को तोड़ देता है। इम्यूनोथेरेपी की दवा कीट्रूडा की कीमत बहुत ज्यादा होने के कारण ये आम आदमी की पहुंच से दूर है। अब भारतीय दवा कंपनियां इस बाधा को तोड़ने के लिए तैयार हैं।
अमेरिकी कंपनी मर्क के पेटेंट की समय-सीमा के करीब आते ही भारतीय बाजार में इसकी सस्ती दवा लाने की तैयारी शुरू हो गई है। आज की बात करें तो 200 मिलीग्राम की कीमत 3 लाख रुपए से अधिक है। आइए जानते हैं की कब तक ये दवा भारत में सस्ती उपलब्ध होगी और इसकी कीमत क्या होगी? इसके साथ ही यह दवा कौनसे कैंसर से बचाती है?
भारत में कब आएगी यह दवा?
डॉक्टरों और शोधकर्ताओं का कहना है कि मूल दवा का मुख्य पेटेंट 2028 के आसपास समाप्त होने वाला है, लेकिन भारतीय कंपनियां 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत तक इसके बायोसिमिलर वर्जन को बाजार में उतारने का लक्ष्य लेकर चल रही हैं। नियामक मंजूरियां (Regulatory Approvals) मिलते ही इसके उत्पादन में तेजी आएगी।
क्या होगी इसकी कीमत?
वर्तमान में कीट्रूडा की एक डोज (Dose) के लिए मरीजों को 3 लाख से अधिक का खर्चा होता है, जब 7 कंपनियां एक साथ बाजार में उतरेंगी, तो प्रतिस्पर्धा के कारण दाम गिरने की व्यापक संभावना है। भारत में बनने के कारण आयात शुल्क खत्म हो जाएगा। इसकी कीमत आज के बाजार मूल्य से 60% से 80% तक कम हो सकती है, जिससे कई परिवारों को नया जीवनदान मिलेगा।
कैंसर के कौनसे प्रकारों में काम आएगी कीट्रूडा?
- फेफड़ों का कैंसर।
- मेलानोमा (त्वचा के कैंसर)।
- सिर और गर्दन का कैंसर।
- किडनी और मूत्राशय का कैंसर।
- ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर।
कैसे काम करती है यह दवा?
कैंसर कोशिकाएं अपनी सतह पर PD-L1 नाम का एक प्रोटीन विकसित कर लेती हैं। यह प्रोटीन हमारे इम्यून सिस्टम के PD-1 चेकपॉइंट से जुड़ जाता है। जैसे ही ये दोनों मिलते हैं, हमारे T-Cells बंद हो जाते हैं और उन्हें लगता है कि कैंसर कोशिका शरीर का ही हिस्सा है। जब शरीर के T-Cells सक्रिय होते हैं, वे कैंसर कोशिकाओं को दुश्मन के रूप में पहचान लेते हैं और उन पर हमला करके उन्हें नष्ट करना शुरू कर देते हैं।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।


