Kanpur News:कॉपियों में छिपा ‘राज’: कहीं 500 का नोट, कहीं दिल छू लेने वाली गुहार—परीक्षक भी रह गए सन्न!

Kanpur News:कॉपियों में छिपा ‘राज’: कहीं 500 का नोट, कहीं दिल छू लेने वाली गुहार—परीक्षक भी रह गए सन्न!

कानपुर में यूपी बोर्ड परीक्षा की कॉपियों के मूल्यांकन के दौरान इस बार छात्रों की भावनाएं खुलकर सामने आईं। कई उत्तरपुस्तिकाओं में विद्यार्थियों ने उत्तर लिखने से ज्यादा अपनी मजबूरी, गरीबी और हालात का जिक्र किया। “मैं बहुत गरीब हूं, पढ़ाई नहीं कर पाया, कृपया पास कर दीजिए”, “गुरुजी आप भी कभी छात्र रहे होंगे”—जैसी अपीलें पढ़कर परीक्षक भी भावुक हो गए। कई कॉपियों में छात्रों ने अपनी पारिवारिक समस्याएं और संघर्ष भी साझा किए, जिससे यह मूल्यांकन सिर्फ अकादमिक प्रक्रिया न रहकर सामाजिक हकीकत का आईना बन गया।

नोटों का सहारा लेकर पास होने की कोशिश, परीक्षक भी रह गए हैरान

मामला यहीं तक सीमित नहीं रहा। कुछ छात्रों ने तो पास होने के लिए कॉपियों में 500 और 200 रुपये के नोट तक रख दिए। खासकर केमिस्ट्री और बायोलॉजी विषय की उत्तरपुस्तिकाओं में ऐसे मामले सामने आए। परीक्षकों के मुताबिक, हर साल इस तरह के प्रयास देखने को मिलते हैं, लेकिन इस बार इनकी संख्या और तरीके दोनों ने हैरान किया। हालांकि, मूल्यांकन पूरी पारदर्शिता के साथ किया गया और ऐसे किसी भी प्रयास को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया।

6 लाख से ज्यादा कॉपियों का मूल्यांकन पूरा, पांच केंद्रों पर चला अभियान

शहर में इस बार पांच मूल्यांकन केंद्रों—जीआईसी चुन्नीगंज, डीएवी इंटर कॉलेज, बीएनएसडी इंटर कॉलेज, एबी विद्यालय और सुभाष स्मारक इंटर कॉलेज—पर 18 मार्च से शुरू हुआ मूल्यांकन कार्य बुधवार को सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। इस दौरान कुल 6,09,059 उत्तरपुस्तिकाओं की जांच की गई, जिनमें हाईस्कूल की 3,03,444 और इंटरमीडिएट की 3,05,615 कॉपियां शामिल रहीं। अंतिम दिन इंटरमीडिएट के हिंदी और गणित विषय की 5085 कॉपियों का मूल्यांकन किया गया। कार्य पूरा होने के बाद परीक्षकों के बीच कॉपियों में मिले रोचक संदेशों और नोटों को लेकर दिनभर चर्चा होती रही। कई परीक्षकों ने बताया कि छात्रों ने पास होने की गुहार के साथ भावनात्मक संदेश लिखे, तो कुछ ने उत्तरपुस्तिकाओं में रुपये भी रखे। इस तरह के मामलों ने मूल्यांकन केंद्रों पर उत्सुकता और चर्चा का माहौल बनाए रखा।

वही शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि हर साल परीक्षा मूल्यांकन के दौरान इस तरह के मामले सामने आते रहते हैं, लेकिन इस बार छात्रों द्वारा अपनाए गए तरीके और की गई अपीलों ने खासा ध्यान खींचा है। कई उत्तरपुस्तिकाओं में छात्रों ने भावनात्मक संदेश लिखकर पास करने की गुहार लगाई, तो कुछ ने परीक्षकों को प्रभावित करने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाए। अधिकारियों के अनुसार, यह प्रवृत्ति शिक्षा व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मूल्यांकन पूरी तरह निष्पक्ष और नियमों के अनुसार किया जाता है, और इस तरह के प्रयासों का परिणामों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

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