VACL India Real Estate Fraud: पांच साल में रकम दोगुनी… साथ में प्लॉट का सपना और निवेश पर मोटे मुनाफे का भरोसा। इसी लालच में फंसाकर कानपुर की वीएसीएल इंडिया रियल एस्टेट कंपनी ने 52 लाख रुपये निवेश करा लिए। जब रकम लौटाने का समय आया तो कंपनी के जिम्मेदार गायब हो गए और शाखा पर ताला लटक गया। करीब नौ महीने से दर्ज इस मामले में अब पुलिस ने 25 हजार रुपये के इनामी कंपनी निदेशक बृजेन्द्र सिंह चौहान उर्फ विजेन्द्र सिंह चौहान को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को मंगलवार को बर्रा के दामोदर नगर स्थित क्राउन होटल के पास से दबोचा गया। उसके खिलाफ अलग-अलग स्थानों पर 19 मुकदमे दर्ज होने की बात सामने आई है।
रकम दोगुनी होने की उम्मीद में जमा किए 52 लाख
आजमगढ़ निवासी अतुल तिवारी ने एसीजेएम द्वितीय न्यायालय में परिवाद दाखिल किया था। आरोप है कि वीएसीएल इंडिया रियल एस्टेट कंपनी के एजेंट और शाखा प्रबंधक ने उनके माता-पिता से संपर्क किया। उन्हें बताया गया कि कंपनी में रकम निवेश करने पर पांच साल में पैसा दोगुना हो जाएगा। इसके साथ ही प्लॉट दिलाने का भी भरोसा दिया गया। कंपनी की बातों पर विश्वास कर परिवार ने 52 लाख रुपये जमा कर दिए। पांच साल की अवधि पूरी हुई तो परिवार ने अपनी रकम वापस मांगी। आरोप है कि कंपनी के जिम्मेदार पहले टालमटोल करते रहे। इसके बाद बिंद्रा बाजार स्थित कंपनी की शाखा ही बंद हो गई। रकम वापस न मिलने पर पीड़ित ने न्यायालय की शरण ली।
कोर्ट के आदेश के बाद खुला ठगी का मामला
न्यायालय के आदेश पर कल्याणपुर पुलिस ने तीन दिसंबर 2025 को कंपनी निदेशक बृजेन्द्र सिंह चौहान, इंद्रेश सिंह चौहान और किशन वीर समेत अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। जांच शुरू हुई तो मामले में आजमगढ़ के गंभीरपुर निवासी राजन मिश्रा, अजय कुमार गुप्ता और विनोद कुमार जायसवाल की भूमिका भी सामने आई। पुलिस ने सोमवार को तीनों को लोधेश्वर मंदिर के पास से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इसके बाद मंगलवार को मुख्य आरोपियों में शामिल बृजेन्द्र सिंह चौहान भी पुलिस के हत्थे चढ़ गया। उसकी गिरफ्तारी के साथ ही इस मामले में जेल भेजे गए आरोपियों की संख्या चार हो गई है।
19 मुकदमों ने बढ़ाई पुलिस की दिलचस्पी
डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी के मुताबिक, गिरफ्तार बृजेन्द्र सिंह चौहान के खिलाफ अलग-अलग स्थानों पर 19 मुकदमे दर्ज हैं। उसकी गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था। पुलिस लंबे समय से उसकी तलाश कर रही थी।अब पुलिस की नजर मामले में नामजद कंपनी निदेशक इंद्रेश सिंह चौहान और किशन वीर पर है। दोनों अभी फरार हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।
चार जेल पहुंचे, दो की तलाश जारी
52 लाख रुपये की ठगी के इस मामले में अब तक चार आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं। इनमें राजन मिश्रा, अजय कुमार गुप्ता, विनोद कुमार जायसवाल और कंपनी निदेशक बृजेन्द्र सिंह चौहान शामिल हैं। वहीं इंद्रेश सिंह चौहान और किशन वीर की गिरफ्तारी बाकी है। पुलिस अब कंपनी के जरिए निवेशकों से जुटाई गई रकम, एजेंटों की भूमिका और अन्य जुड़े लोगों के बारे में भी जानकारी जुटा रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।

