उत्तर प्रदेश के मंत्रिमंडल ने राजधानी लखनऊ स्थित जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय केंद्र (जेपीएनआईसी) परियोजना के संचालन एवं रखरखाव के लिए फर्म के चयन को मंगलवार को मंजूरी दे दी। समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राज्य सरकार के इस फैसले की कड़ी आलोचना की है। प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में लिए गए इस निर्णय की जानकारी दी।
खन्ना ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘जेपीएनआईसी परियोजना के संचालन और रखरखाव के लिए उच्चतम बोलीदाता मेसर्स वृंदावन बॉटलर्स प्राइवेट लिमिटेड एंड रॉकवुड होटल्स एंड रिजॉर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड को चयनित करने और संबंधित कार्यवाही के लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) को अधिकृत करने का प्रस्ताव मंत्रिमंडल के समक्ष आया था, जिसे मंजूरी दे दी गई।’’
मंत्री ने बताया कि प्रस्ताव के तहत परियोजना के संचालन एवं रखरखाव के लिए संबंधित कंपनियों को 30 वर्ष की लीज पर दिया जाएगा और इस अवधि को आगे 25 वर्ष के लिए बढ़ाया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि प्रस्ताव के तहत लखनऊ विकास प्राधिकरण 30 वर्ष की अवधि में पांच प्रतिशत ब्याज सहित करीब 857 करोड़ 69 लाख रुपये सरकार को चुकाएगा। खन्ना ने बताया कि जेपीएनआईसी में ऑडिटोरियम, कन्वेंशन सेंटर, विश्वस्तरीय खेल परिसर, बहुउद्देश्यीय खेल कोर्ट और बहुमंजिला पार्किंग जैसी सुविधाएं होंगी, जिनका उपयोग आम जनता भी कर सकेगी।
उन्होंने कहा कि प्रस्ताव के तहत एक कैलेंडर वर्ष में 50 दिनों के लिए इन सुविधाओं का सरकारी संस्थाओं को निशुल्क आवंटन किया जाएगा। जेपीएनआईसी जैसी महत्वाकांक्षी परियोजना का निर्माण उत्तर प्रदेश की पिछली सपा सरकार के कार्यकाल में हुआ था। सपा के अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मंत्रिमंडल के फैसले की आलोचना करते हुए ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘भाजपा सरकार है या दुकानदार?
अब उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार ने लखनऊ के जेपीएनआईसी (जय प्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर) को निजी हाथों में सौंपने का निर्णय कैबिनेट में ले लिया है। अब तो बस सरकार को ही ठेके पर देना या बेचना बचा है।’’
उन्होंने अपनी पोस्ट में आगे कहा, ‘‘कमीशन भ्रष्ट भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की गाड़ी का तेल-पानी है और निजीकरण उसका जुगाड़।

