जोधपुर। राजस्थान के आसमान में इन दिनों भारत और मित्र देशों के अत्याधुनिक लड़ाकू विमान अपनी युद्धक क्षमताओं का प्रदर्शन कर रहे हैं। जोधपुर एयरबेस पर चल रहे ‘तरंग शक्ति-2026’ में फ्रांस की एयर एंड स्पेस फोर्स भी शामिल हुई है। फ्रांस के मेजर जनरल जूलियन सबेने सात राफेल विमानों के साथ भारत पहुंचे हैं। उन्होंने भारतीय वायुसेना के साथ लंबे समय से चले आ रहे रक्षा संबंधों और युद्धाभ्यास के दौरान अनुभव साझा करने को अहम बताया।
फ्रेंच एयर डिफेंस और एयर ऑपरेशन्स कमांड के डिप्टी कमांडर मेजर जनरल जूलियन सबेने ने बताया कि यह उनकी भारत की पहली यात्रा है। उन्होंने कहा कि भारत विशाल देश है और भारतीय वायुसेना के पास कई तरह के एयरक्राफ्ट का बड़ा बेड़ा है। इससे उन्हें काफी कुछ सीखने का अवसर मिला।
30 हजार किलोमीटर की उड़ान भरकर पहुंचे भारत
उन्होंने बताया कि फ्रांस की टीम ने करीब 30 हजार किलोमीटर की उड़ान भरकर भारत का रुख किया। उनके मुताबिक यह तैनाती ‘पेगास 26’ का प्रमुख हिस्सा है। फ्रांस के नागरिक इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों में रहते हैं, इसलिए इस क्षेत्र में मौजूदगी उनके लिए महत्वपूर्ण है।
1952 से भारत-फ्रांस की एयरफोर्स पार्टनरशिप
मेजर जनरल सबेने ने भारत और फ्रांस के बीच लंबे समय से चले आ रहे रक्षा संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना के पास 1950 के दशक से ही फ्रांसीसी उपकरण रहे हैं। इसकी शुरुआत 1952 में ‘उरागन’ विमान से हुई थी।
उन्होंने कहा कि अब भारतीय वायुसेना के पास कई वर्षों से राफेल विमान हैं। दोनों देशों की वायुसेनाओं के पास राफेल के साथ कॉम्बैट अनुभव है। ऐसे में तरंग शक्ति जैसे बड़े युद्धाभ्यास दोनों देशों को अपने अनुभव और काम करने के तौर-तरीके साझा करने का अवसर देते हैं।
7 राफेल, 3 MRTT और 2 F1 विमान लाए
मेजर जनरल जूलियन सबेने ने बताया कि फ्रांस की ओर से सात राफेल, तीन MRTT और दो F1 विमान भारत लाए गए हैं। उन्होंने बताया कि वे खुद भी अभ्यास के दौरान उड़ान में शामिल हुए। एक F1 विमान में उन्होंने ऑब्जर्वर के तौर पर उड़ान भरी, जबकि एक राफेल के साथ हवा में ईंधन भरने यानी एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग का अभ्यास किया।
वहीं, तरंग शक्ति-2026 में 60 से 80 तक लड़ाकू विमानों ने अलग-अलग जटिल हवाई मिशनों में हिस्सा लिया। भारत और विदेशी वायुसेनाओं के विमानों के बीच वन-ऑन-वन और टू-ऑन-वन डॉगफाइट तथा एयर कॉम्बैट ट्रेनिंग भी हुई। अभ्यास में भारत के राफेल, तेजस और सुखोई-30 MKI के साथ फ्रांस के राफेल और अमेरिका के F-35 जैसे विमान शामिल रहे।
जोधपुर के साथ कई एयरबेस भी अभ्यास का हिस्सा
अभ्यास के दौरान एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग, एयरलिफ्ट और अन्य सपोर्ट मिशनों को भी शामिल किया गया। यह ऑपरेशन केवल जोधपुर तक सीमित नहीं रहा। नाल, उतरलाई, जैसलमेर और फलोदी एयरबेस भी इस बड़े हवाई अभ्यास का हिस्सा रहे।
मेजर जनरल सबेने ने भारतीय वायुसेना की तैयारियों की तारीफ करते हुए कहा कि शुरुआत बहुत अच्छी रही और फ्रांस की टीम का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। उन्होंने आयोजन और समय पर तैयारियों के लिए भारतीय वायुसेना के प्रयासों को भी सराहा।

