जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने सोमवार को आदेश दिया कि छात्र संघ के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिन के भीतर छात्र संघ चुनाव कराए जाएं। विश्वविद्यालय के एक आधिकारिक आदेश में यह जानकारी दी गयी है। साथ ही, जारी विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों के निलंबन आदेश और उन्हें जारी किए गए कारण बताओ नोटिस वापस ले लिए गए हैं।
कुलसचिव मोहम्मद महताब आलम रिजवी की ओर से जारी आदेश में विरोध प्रदर्शन की अवधि के दौरान सुरक्षा कर्मियों के आचरण की जांच के लिए एक समिति गठित करने का भी प्रावधान है। ये फैसले विश्वविद्यालय की ओर से भूख हड़ताल कर रहे छात्रों और उनके प्रतिनिधियों द्वारा सौंपे गए मांगपत्र पर विचार करने के बाद लिए गए। आदेश के अनुसार, प्रदर्शनकारी छात्र विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ आंदोलन के दौरान दिए गए मानहानिकारक बयानों, की गई कार्रवाइयों या सोशल मीडिया पर किए गए पोस्ट के लिए एक संवाददाता सम्मेलन में सार्वजनिक रूप से माफी मांगने पर सहमत हुए हैं।
ऐसी पोस्ट तत्काल प्रभाव से सोशल मीडिया मंचों से हटाई जानी हैं। आदेश में कहा गया है कि इसे जारी किए जाने के तुरंत बाद विरोध प्रदर्शन समाप्त कर दिया जाएगा। यह घटनाक्रम विश्वविद्यालय में करीब दो सप्ताह से चल रहे आंदोलन के बीच सामने आया है।
प्रदर्शनकारी जामिया मिल्लिया इस्लामिया छात्र संघ (जेएमआईएसयू) को बहाल करने की मांग कर रहे थे। छात्र संघ के चुनाव 2006 से नहीं हुए हैं। इस मांग को लेकर चार छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे थे।
वहीं, अन्य प्रदर्शनकारी चुनाव कराने के लिए समयबद्ध कार्यक्रम घोषित करने, अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने और सुरक्षा कर्मियों द्वारा कथित ज्यादतियों की जांच कराने की मांग कर रहे थे। विश्वविद्यालय ने इससे पहले, प्रदर्शन स्थल पर बढ़ते तनाव के बीच सभी पाठ्यक्रमों की कक्षाएं तत्काल प्रभाव से ऑनलाइन माध्यम से संचालित करने की घोषणा की थी। प्रशासन ने छात्रों को विश्वविद्यालय परिसर में आने से बचने की सलाह भी दी थी और कहा था कि अगले आदेश तक विश्वविद्यालय के द्वार और पुस्तकालय बंद रहेंगे।
प्रशासन ने बताया था कि प्रोफेसरों की सात सदस्यीय समिति ने प्रदर्शनकारियों के साथ कई दौर की बातचीत की थी। साथ ही, जेएमआईएसयू का संविधान तैयार करने के लिए एक समिति को 21 अक्टूबर को अधिसूचित किया गया था। छात्रों का कहना था कि चुनाव के लिए निश्चित समयसीमा तय किए बिना और संविधान तैयार करने की प्रक्रिया में छात्र प्रतिनिधियों को शामिल किए बिना मसौदा समिति का गठन पर्याप्त नहीं है।
नए आदेश में संविधान को मंजूरी मिलने के बाद चुनाव कराने की समयसीमा तय की गई है, विरोध प्रदर्शन से संबंधित निलंबन आदेश और कारण बताओ नोटिस वापस लिए गए हैं तथा आंदोलन के दौरान सुरक्षा कर्मियों के आचरण की जांच कराने का प्रावधान किया गया है।

