जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रसंघ चुनाव की बहाली की समयसीमा घोषित होने के बाद शुक्रवार को विद्यार्थियों ने विजय जुलूस निकाला और परिसर में जश्न मनाया। विश्वविद्यालय में 2006 से छात्रसंघ चुनाव भंग है। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से जामिया मिल्लिया इस्लामिया छात्रसंघ के संविधान को मंजूरी दिए जाने को निर्वाचित छात्र प्रतिनिधि संगठन की बहाली के लिए लंबे समय से जारी उनके संघर्ष की जीत बताया।
छात्रों ने इस दौरान ‘छात्र-युवा एकता जिंदाबाद’ लिखे पोस्टर भी लहराए। यह घटनाक्रम विश्वविद्यालय की ओर से 29 अक्टूबर को जारी आदेश के बाद सामने आया। इस आदेश में छात्रसंघ के संविधान को लागू करने की मंजूरी दी गई और इसकी प्रक्रिया पूरी करने के लिए 15 मई 2027 की समयसीमा तय की गई है।
विश्वविद्यालय ने कहा कि छात्रसंघ का संविधान मंजूर होने के बाद छात्रसंघ चुनाव के लिए लिंगदोह समिति की सिफारिशों और दिशा-निर्देशों के अनुसार कार्यक्रम घोषित किया जाएगा। चुनाव शैक्षणिक सत्र शुरू होने के छह सप्ताह के भीतर कराए जाने हैं। इसके लिए 16 जुलाई 2027 से लगभग छह सप्ताह की समयसीमा निर्धारित की गई है।
आदेश में यह भी निर्देश दिया गया कि विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के कारण छात्रों को जारी किए गए सभी कारण बताओ नोटिस, अनुशासनात्मक जांच, निष्कासन और निलंबन के आदेश तथा परिसर में प्रवेश पर लगाए गए प्रतिबंध वापस लिए जाएं। इस फैसले के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों से बृहस्पतिवार को अपना आंदोलन और भूख हड़ताल तुरंत समाप्त करने को कहा। आदेश में कहा गया, “उपरोक्त परिस्थितियों को देखते हुए प्रदर्शन कर रहे छात्रों को तत्काल प्रभाव से अपना विरोध प्रदर्शन और भूख हड़ताल समाप्त कर देनी चाहिए।”
छात्रों का यह विरोध प्रदर्शन 12 अक्टूबर को शुरू हुआ था।
वे छात्रसंघ चुनाव को बहाल करने और चुनाव कराने के लिए निश्चित समयसीमा घोषित करने की मांग कर रहे थे। इस दौरान छात्रों ने भूख हड़ताल भी की। विश्वविद्यालय प्रशासन और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच लंबे समय तक गतिरोध बना रहा, जिसके बीच आंदोलन जारी रहा।

