Jal Jeevan Mission: गांव-गांव पानी की गुणवत्ता पर नजर, सुजलाम शक्ति समूह से जुड़ी पांच लाख महिलाएं

Jal Jeevan Mission: गांव-गांव पानी की गुणवत्ता पर नजर, सुजलाम शक्ति समूह से जुड़ी पांच लाख महिलाएं

Sujalam Shakti Group: जल जीवन मिशन के तहत प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक पहुंचाए जा रहे पेयजल की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए गांव स्तर पर निगरानी का मजबूत नेटवर्क तैयार किया गया है। इस व्यवस्था में ग्रामीण महिलाओं की अहम भूमिका तय की गई है। प्रदेश में करीब पांच लाख महिलाओं को फील्ड टेस्ट किट (एफटीके) के माध्यम से पेयजल की गुणवत्ता जांच का प्रशिक्षण दिया गया है। ये महिलाएं अब गांवों में पानी की नियमित जांच के साथ ग्रामीणों को सुरक्षित पेयजल, जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन के प्रति भी जागरूक कर रही हैं।

जल जीवन मिशन 1.0 के दौरान प्रत्येक राजस्व गांव से पांच महिलाओं को जल गुणवत्ता परीक्षण के लिए प्रशिक्षित करने की व्यवस्था शुरू की गई थी। प्रशिक्षण हासिल करने वाली इन्हीं महिलाओं को अब जल जीवन मिशन 2.0 के तहत सुजलाम शक्ति समूह से जोड़ा गया है। गांव स्तर पर तैयार यह महिला नेटवर्क पेयजल गुणवत्ता की निगरानी में विभाग और ग्रामीण समुदाय के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के तौर पर काम कर रहा है।

एफटीके से गांव-गांव पानी की जांच

जल गुणवत्ता की निगरानी के लिए फील्ड टेस्ट किट आधारित जांच व्यवस्था ने प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में व्यापक नेटवर्क का रूप ले लिया है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2026-27 तक, खबर लिखे जाने तक, प्रदेश में कुल 1,39,68,795 जल नमूनों का एफटीके के माध्यम से परीक्षण किया गया है। इनमें वित्तीय वर्ष 2022-23 में 39,47,102, वर्ष 2023-24 में 36,68,743 और वर्ष 2024-25 में 38,19,440 जल नमूनों की जांच हुई। इसी क्रम में वित्तीय वर्ष 2025-26 में 5,51,221 जल नमूनों का परीक्षण किया गया, जबकि वित्तीय वर्ष 2026-27 में खबर लिखे जाने तक 19,82,289 जल नमूनों की जांच हो चुकी है। आंकड़ों से स्पष्ट है कि गांवों में पेयजल स्रोतों की प्राथमिक स्तर पर जांच के लिए लगातार एक बड़ा तंत्र सक्रिय है।

पांच महिलाओं से शुरू हुआ निगरानी तंत्र

जल जीवन मिशन के शुरुआती चरण में प्रत्येक राजस्व गांव से पांच महिलाओं को एफटीके से पानी की जांच का प्रशिक्षण देने पर जोर दिया गया। इसके पीछे उद्देश्य यह था कि पानी की गुणवत्ता जांच के लिए हर छोटी जरूरत में जिला या ब्लॉक स्तर की व्यवस्था पर निर्भरता कम हो और गांव में ही प्राथमिक स्तर पर पानी की स्थिति का पता लगाया जा सके। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली महिलाओं को फील्ड टेस्ट किट उपलब्ध कराई जाती है। इसकी मदद से पानी में आयरन, नाइट्रेट, क्लोराइड समेत विभिन्न अशुद्धियों की प्राथमिक स्तर पर जांच की जाती है। इस प्रक्रिया से ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की गुणवत्ता को लेकर तत्काल जानकारी उपलब्ध होती है और जरूरत पड़ने पर आगे की जांच के लिए नमूना प्रयोगशाला भेजने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।

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यूपी में 1.39 करोड़ जल नमूनों की जांच  (फोटो सोर्स : Ritesh Singh )    

स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं

सुजलाम शक्ति समूह में शामिल होने के लिए स्वयं सहायता समूहों की प्रशिक्षित महिलाओं के साथ आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और आशा कार्यकत्रियों को भी पात्रता के आधार पर प्रशिक्षण दिया गया है। इससे जल गुणवत्ता निगरानी व्यवस्था को गांवों में पहले से सक्रिय महिला नेटवर्क का लाभ मिला है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद महिलाओं को एफटीके उपलब्ध कराई जाती है। इसके जरिए उन्हें पानी के नमूने लेने, प्राथमिक स्तर पर निर्धारित मानकों के अनुसार जांच करने और आवश्यकता पड़ने पर संदिग्ध नमूनों को आगे की जांच के लिए भेजने की प्रक्रिया से परिचित कराया जाता है। इस पूरी व्यवस्था का मकसद ग्रामीण परिवारों तक पहुंचने वाले पानी की गुणवत्ता पर स्थानीय स्तर से नजर रखना है।

हर महीने अलग-अलग स्रोतों से नमूने

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फील्ड टेस्ट किट के माध्यम से गांव में पेयजल के नमूने की जांच करतीं सुजलाम शक्ति समूह की महिला सदस्य। (फोटो सोर्स : Ritesh Singh )  

एफटीके से प्रशिक्षित महिलाएं प्रत्येक माह गांवों में विभिन्न पेयजल स्रोतों से नमूने लेकर उनकी प्राथमिक जांच करती हैं। इनमें फंक्शनल हाउसहोल्ड टैप कनेक्शन (एफएचटीसी), स्वास्थ्य केंद्र और हैंडपंप सहित अन्य स्रोत शामिल हैं। इससे केवल पाइपलाइन या किसी एक स्रोत की गुणवत्ता ही नहीं, बल्कि गांव में इस्तेमाल होने वाले विभिन्न पेयजल स्रोतों की स्थिति पर भी नजर रखी जाती है। जांच के लिए निर्धारित मानदेय के आधार पर महिलाओं को भुगतान भी किया जाता है। इस तरह सुजलाम शक्ति समूह की गतिविधियां केवल पेयजल की गुणवत्ता निगरानी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए अतिरिक्त आय का माध्यम भी बन रही हैं। जल गुणवत्ता जैसे महत्वपूर्ण विषय से महिलाओं को जोड़ने के साथ उन्हें स्थानीय स्तर पर जिम्मेदारी और आर्थिक भागीदारी का अवसर भी मिल रहा है।

मानकों के अनुरूप होती है पानी की जांच

जल जीवन मिशन के तहत घरों तक पहुंचने वाले पेयजल की गुणवत्ता की जांच भारतीय मानक आईएस-10500:2012 के आधार पर की जाती है। गांव स्तर पर एफटीके से प्राथमिक जांच के दौरान यदि किसी नमूने में बैक्टीरियोलॉजिकल खामी या गुणवत्ता से जुड़ी अन्य गंभीर समस्या सामने आती है तो नमूने को जिला और राज्य स्तर की प्रयोगशालाओं में विस्तृत जांच के लिए भेजा जाता है। इस व्यवस्था से प्राथमिक जांच और प्रयोगशाला परीक्षण के बीच एक कड़ी तैयार होती है। गांव में किसी पेयजल स्रोत को लेकर संभावित समस्या सामने आने पर उसे नजरअंदाज करने के बजाय आगे की जांच की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। इससे ग्रामीण पेयजल आपूर्ति व्यवस्था में गुणवत्ता निगरानी का दायरा बढ़ा है।

पानी की जांच के साथ जागरूकता की जिम्मेदारी

सुजलाम शक्ति समूहों से जुड़ी महिलाओं की भूमिका केवल पानी के नमूने लेने और उनकी जांच करने तक सीमित नहीं रखी गई है। जल निगम उत्तर प्रदेश ग्रामीण के अधिकारियों के अनुसार इन महिलाओं को ग्रामीणों के बीच सुरक्षित पेयजल के इस्तेमाल, जल संरक्षण और वर्षा जल संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने की जिम्मेदारी भी दी जाती है। गांव में पानी की उपलब्धता और उसकी गुणवत्ता दोनों को लेकर स्थानीय लोगों को जागरूक करना इस व्यवस्था का अहम हिस्सा है। महिलाओं के माध्यम से ग्रामीण परिवारों तक यह संदेश पहुंचाने का प्रयास किया जाता है कि पेयजल स्रोतों की स्वच्छता बनाए रखना और पानी का सुरक्षित इस्तेमाल करना भी गुणवत्ता संरक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
जल समितियों में भी भागीदारी

सुजलाम शक्ति समूह की दक्ष महिलाओं को ग्राम स्तर पर गठित होने वाली जल समितियों में सदस्य के रूप में भी शामिल किया जाता है। इससे पानी की गुणवत्ता की जांच करने वाली महिलाओं को गांव की पेयजल व्यवस्था से जुड़े निर्णयों और निगरानी प्रक्रिया में भागीदारी का अवसर मिलता है। जल जीवन मिशन के तहत पिछले सात वर्षों में प्रदेश के गांव, ब्लॉक और जिला स्तर पर सुजलाम शक्ति समूहों का नेटवर्क तैयार किया गया है। यह नेटवर्क ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल गुणवत्ता की नियमित निगरानी के साथ जल संरक्षण से जुड़े जागरूकता कार्यक्रमों में भी भूमिका निभा रहा है।

आंकड़े बता रहे निगरानी तंत्र का विस्तार

एफटीके से किए गए जल नमूनों के परीक्षण के आंकड़े इस व्यवस्था के व्यापक स्तर को दर्शाते हैं। वर्ष 2022-23 में 39,47,102 नमूनों की जांच की गई थी। अगले वित्तीय वर्ष 2023-24 में यह संख्या 36,68,743 रही, जबकि 2024-25 में 38,19,440 नमूनों का परीक्षण किया गया। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 5,51,221 नमूनों की जांच दर्ज की गई। वहीं 2026-27 में खबर लिखे जाने तक 19,82,289 जल नमूनों का परीक्षण किया जा चुका है। पांच वित्तीय वर्षों के इन आंकड़ों को जोड़ने पर एफटीके के माध्यम से जांचे गए नमूनों की संख्या 1.39 करोड़ से अधिक पहुंचती है। यह आंकड़ा गांव स्तर पर पेयजल गुणवत्ता की निगरानी के लिए विकसित किए गए नेटवर्क के बड़े पैमाने को दर्शाता है।

महिलाओं की भागीदारी से मजबूत हुई व्यवस्था

ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की गुणवत्ता से जुड़ी निगरानी को महिलाओं से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध हो रहा है। गांव की महिलाओं को अपने ही क्षेत्र के पेयजल स्रोतों की जांच की जिम्मेदारी मिलने से निगरानी व्यवस्था स्थानीय जरूरतों से जुड़ती है। सुजलाम शक्ति समूह के जरिए महिलाओं को जल गुणवत्ता जांच का प्रशिक्षण, एफटीके और निर्धारित मानदेय के साथ जिम्मेदारी दी जा रही है। इसके साथ ही उन्हें जल संरक्षण और सुरक्षित पेयजल के इस्तेमाल के लिए ग्रामीणों को जागरूक करने की भूमिका भी सौंपी गई है। इससे जल जीवन मिशन की पेयजल आपूर्ति व्यवस्था में सामुदायिक भागीदारी का दायरा बढ़ रहा है।

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जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्र में पेयजल स्रोत से नमूना लेते हुए प्रशिक्षित महिला जल योद्धा।  (फोटो सोर्स : Ritesh Singh )  

शिकायतों के त्वरित निस्तारण पर भी जोर

उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) के प्रबंध निदेशक योगेश कुमार के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण पेयजल पहुंचाना विभाग की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि गांव स्तर पर प्रशिक्षित महिलाओं को जल गुणवत्ता जांच से जोड़कर निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया गया है। पेयजल आपूर्ति से जुड़ी शिकायतों के त्वरित निस्तारण पर भी विभाग लगातार काम कर रहा है। उनके मुताबिक जल जीवन मिशन के तहत प्रदेश में पेयजल आपूर्ति और गुणवत्ता निगरानी के क्षेत्र में प्रगति हुई है। आगे भी निगरानी व्यवस्था और सेवा की गुणवत्ता को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा। गांव स्तर पर महिलाओं की भागीदारी से तैयार हुआ सुजलाम शक्ति समूह का नेटवर्क इस दिशा में स्थानीय स्तर की निगरानी को निरंतर सक्रिय रखने का माध्यम बन रहा है।

पेयजल से लेकर संरक्षण तक बढ़ी जिम्मेदारी

जल जीवन मिशन के तहत गांवों में बिछे पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए घरों तक पानी पहुंचाने के साथ अब उसकी गुणवत्ता पर निगरानी को भी व्यवस्था का अहम हिस्सा बनाया गया है। एफटीके के जरिए करोड़ों नमूनों की जांच और करीब पांच लाख महिलाओं का प्रशिक्षण इस तंत्र के व्यापक विस्तार को दिखाता है। सुजलाम शक्ति समूहों के माध्यम से गांव की महिलाएं पानी की गुणवत्ता की प्राथमिक जांच, ग्रामीणों में जागरूकता, जल संरक्षण और ग्राम स्तरीय जल समितियों में भागीदारी जैसी जिम्मेदारियां निभा रही हैं। इससे हर घर जल अभियान को केवल पानी पहुंचाने की योजना के बजाय सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

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