आजमगढ़ जिले के अहिरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर में अरविंद कुमार सिंह द्वारा अपनी पत्नी बेटे और दो पुजारी की गोली मारकर हत्या की जाने के बाद पुलिस मुठभेड़ में आरोपी की मौत हो गई। आरोपी ने अपने तीन बच्चों को बंधक बना लिया था और जब पुलिस की एसओजी टीम और एटीएस ने आंसू गैस का प्रयोग किया तो आरोपी ने गोली चला दी जिससे बेटा गंभीर रूप से घायल हो गया था और इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया जहां इलाज के दौरान मौत हो गई।
ऐसे में इस परिवार में मात्र एक बूढी मां और दो मासूम बच्चियां बची हुई हैं। जिसमें एक 10 वर्ष की बेटी परी है। जबकि एक नौ महीने की बच्ची शांभवी है। ऐसे में आजमगढ़ के एसएसपी डॉक्टर अनिल कुमार इन दोनों अनाथ बच्चियों के सहारा बने हैं। जिले के एसपी डॉक्टर अनिल कुमार ने अपना एक महीने का वेतन दोनों बच्चियों को देने का निर्णय किया है। इसके साथ ही आजमगढ़ जिले के सभी पुलिसकर्मी इन दोनों मासूम बच्चियों को अपना एक-एक दिन का वेतन देंगे। इस बात की पुष्टि जिले के एसपी डॉक्टर अनिल कुमार ने की है। इसके साथ ही इस घटना में मृतक पुजारी अखिलेश कुमार मिश्रा और महेंद्र पाठक के परिजनों के संबंध में भी जिले के डीएम और शासन से बात कर ली गई है इन दोनों परिवार के लोगों को भी आर्थिक मदद दिलाई जाएगी। पुलिस और परिजन करीब सात घंटे तक उसे समझाते रहे तथा बच्चों को सुरक्षित बाहर भेजने की अपील करते रहे, लेकिन उसने बच्चों को बाहर नहीं आने दिया। इसी दौरान वह लगातार बच्चों को गोली मारने की धमकी भी दे रहा था। देर रात कमरे के भीतर से गोली चलने की आवाज आने पर बच्चों की जान पर तत्काल खतरा देखते हुए एसएसपी आजमगढ़ डॉ. अनिल कुमार ने जान जोखिम में डालकर दरवाजा तोड़कर कमरे में प्रवेश किया। कमरे में नौ वर्षीय शौर्य गोली लगने से गंभीर रूप से घायल मिला। पुलिस टीम उसे तत्काल अस्पताल ले गई, जहां उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। इस अवसर पर जिले के एसएसपी डॉक्टर अनिल कुमार और एसपी ग्रामीण चिराग जैन मासूम बच्चियों को प्यार करते और दुलारते नजर आए। गोली लगने की दूरी से संबंधित तथ्य
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार बच्चे के एंट्री वुंड पर ब्लैकनिंग, टैटूइंग एवं स्कॉर्चिंग के चिह्न पाए गए हैं। ये चिह्न सामान्यतः बहुत नजदीकी दूरी से गोली चलने की स्थिति में पाए जाते हैं। घटनास्थल पर पुलिस टीम और बच्चे के बीच की दूरी लगभग 8-10 फीट थी। इस दूरी से गोली लगने पर एंट्री वुंड पर इस प्रकार के चिह्नों की संभावना नहीं होती। साथ ही, आरोपी को न्यूट्रलाइज करने से पहले पुलिस टीम का बच्चों के इतने नजदीक पहुंचना संभव नहीं था, क्योंकि पुलिस टीम कमरे के एक छोर पर तथा आरोपी बच्चों के साथ दूसरे छोर पर था। पुलिस टीम बच्चों तक आरोपी को न्यूट्रलाइज किए जाने के बाद ही पहुंच सकी। गोली की ट्रैजेक्टरी से संबंधित तथ्य
पोस्टमार्टम में बच्चे के शरीर में गोली की ट्रैजेक्टरी तिरछी एवं ऊपर की दिशा में पाई गई है। बच्चे की कम ऊंचाई को देखते हुए इस प्रकार की ट्रैजेक्टरी तभी संभव है जब गोली अपेक्षाकृत नीचे से ऊपर की ओर बैरल करके बहुत नजदीक से चलाई गई हो। उपलब्ध परिस्थितियां इस तथ्य की ओर संकेत करती हैं कि गोली बच्चे को आरोपी द्वारा अत्यंत नजदीक से मारे जाने की स्थिति में लगी। एंट्री वुंड के आकार से संबंधित तथ्य
मृतक शौर्य के शरीर में गोली का प्रवेश बच्चे के गाल से तथा निकासी उसके सिर से हुआ है। पोस्टमार्टम में दर्ज एंट्री वुंड का आकार आरोपी के कब्जे में रहे .32 बोर रिवाल्वर से संबंधित गोली के अनुरूप पाया गया है। इसके विपरीत 9 एमएम पिस्टल से लगी गोली के एंट्री वुंड का आकार अपेक्षाकृत बड़ा होने की संभावना रहती है। घटनास्थल से बरामद आरोपी के .32 बोर रिवाल्वर एवं अन्य फॉरेंसिक साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है। आरोपी द्वारा बच्चों को गोली मारने की धमकी
पुलिस एवं परिजनों द्वारा आरोपी को समझाने के दौरान भी वह अपनी मां, चाचा, भतीजियों एवं बहनों को बच्चों को गोली मारने की धमकी दे रहा था। इससे स्पष्ट था कि कमरे के अंदर मौजूद बच्चों पर तत्काल खतरा बना हुआ था। रेस्क्यू की गई बच्ची का प्रत्यक्ष कथन
पुलिस टीम द्वारा सकुशल रेस्क्यू की गई 11 वर्षीय परी ने पुलिस को बताया कि उसके पिता अरविंद ने ही उसके भाई शौर्य को गोली मारी थी। परी घटनाक्रम के दौरान आरोपी के साथ कमरे में मौजूद थी और उसने स्वयं पूरी घटना देखी। उसने यह भी बताया कि अरविंद बच्चों को जान से मारने की धमकी दे रहा था। उसका यह कथन घटनास्थल की परिस्थितियों एवं उपलब्ध अन्य साक्ष्यों से भी महत्वपूर्ण रूप से संबंधित है।

