राज्य की सड़कों पर यातायात प्रबंधन को अत्याधुनिक बनाने और सड़क हादसों की दर में प्रभावी कमी लाने के उद्देश्य से परिवहन विभाग एक बड़ी पहल करने जा रहा है। विभाग की इस नई योजना के तहत अब प्रमुख मार्गों और संवेदनशील चौराहों पर आईटीएमएस यानी इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम को लागू किया जाएगा। इस सिस्टम के धरातल पर उतरने के बाद न केवल यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित होगा, बल्कि सड़क सुरक्षा का ढांचा भी पहले से कहीं अधिक मजबूत और चाक-चौबंद नजर आएगा। नालंदा जिला परिवहन पदाधिकारी रंजीत कुमार ने बताया कि राज्य परिवहन आयुक्त के निर्देश पर वर्तमान में उन स्थलों का बारीकी से चयन किया जा रहा है, जो दुर्घटना के लिहाज से संवेदनशील माने जाते हैं। इन ब्लैक स्पॉट्स के साथ-साथ उन मार्गों की भी सूची तैयार की जा रही है, जहां वाहनों का दबाव अत्यधिक रहता है। जहां प्रवर्तन कार्यों की सबसे ज्यादा आवश्यकता महसूस की जाती है। इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य तकनीक के माध्यम से मानवीय त्रुटियों को कम करना और सुगम यातायात सुनिश्चित करना है। यातायात नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई इस नई व्यवस्था की सबसे बड़ी विशेषता इसमें इस्तेमाल होने वाली एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीक है। चिह्नित स्थानों पर उच्च क्षमता वाले स्मार्ट सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए जाएंगे, जो न केवल वाहनों की गति और यातायात नियमों के उल्लंघन पर नजर रखेंगे, बल्कि चालकों के चेहरों की पहचान करने में भी सक्षम होंगे। इससे दुर्घटना की स्थिति में या नियम तोड़ने पर वाहन चालक की पहचान करना बेहद सरल हो जाएगा। इसके साथ ही, एआई आधारित ई-चालान और निरंतर निगरानी की सुविधा से यातायात पुलिस को बिना सड़क पर मौजूद रहे अपराधियों और लापरवाह चालकों पर अंकुश लगाने में बड़ी सफलता मिलेगी। यह प्रणाली भविष्य में सड़क सुरक्षा और कानून व्यवस्था के समन्वय में एक मील का पत्थर साबित होगी। राज्य की सड़कों पर यातायात प्रबंधन को अत्याधुनिक बनाने और सड़क हादसों की दर में प्रभावी कमी लाने के उद्देश्य से परिवहन विभाग एक बड़ी पहल करने जा रहा है। विभाग की इस नई योजना के तहत अब प्रमुख मार्गों और संवेदनशील चौराहों पर आईटीएमएस यानी इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम को लागू किया जाएगा। इस सिस्टम के धरातल पर उतरने के बाद न केवल यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित होगा, बल्कि सड़क सुरक्षा का ढांचा भी पहले से कहीं अधिक मजबूत और चाक-चौबंद नजर आएगा। नालंदा जिला परिवहन पदाधिकारी रंजीत कुमार ने बताया कि राज्य परिवहन आयुक्त के निर्देश पर वर्तमान में उन स्थलों का बारीकी से चयन किया जा रहा है, जो दुर्घटना के लिहाज से संवेदनशील माने जाते हैं। इन ब्लैक स्पॉट्स के साथ-साथ उन मार्गों की भी सूची तैयार की जा रही है, जहां वाहनों का दबाव अत्यधिक रहता है। जहां प्रवर्तन कार्यों की सबसे ज्यादा आवश्यकता महसूस की जाती है। इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य तकनीक के माध्यम से मानवीय त्रुटियों को कम करना और सुगम यातायात सुनिश्चित करना है। यातायात नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई इस नई व्यवस्था की सबसे बड़ी विशेषता इसमें इस्तेमाल होने वाली एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीक है। चिह्नित स्थानों पर उच्च क्षमता वाले स्मार्ट सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए जाएंगे, जो न केवल वाहनों की गति और यातायात नियमों के उल्लंघन पर नजर रखेंगे, बल्कि चालकों के चेहरों की पहचान करने में भी सक्षम होंगे। इससे दुर्घटना की स्थिति में या नियम तोड़ने पर वाहन चालक की पहचान करना बेहद सरल हो जाएगा। इसके साथ ही, एआई आधारित ई-चालान और निरंतर निगरानी की सुविधा से यातायात पुलिस को बिना सड़क पर मौजूद रहे अपराधियों और लापरवाह चालकों पर अंकुश लगाने में बड़ी सफलता मिलेगी। यह प्रणाली भविष्य में सड़क सुरक्षा और कानून व्यवस्था के समन्वय में एक मील का पत्थर साबित होगी।


