Superpower : वैश्विक राजनीति में इन दिनों भारी उथल-पुथल मची हुई है। इसी बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक ऐसा बयान दिया है जिसने दुनिया भर के कूटनीतिक हलकों में खलबली मचा दी है। उनका कहना है कि दशकों तक पूरी दुनिया पर राज करने वाला सुपर पॉवर अमेरिका अब तेजी से अपने पतन की ओर बढ़ रहा है। यह बयान सिर्फ एक राजनीतिक टिप्पणी नहीं है, बल्कि बदलते वैश्विक समीकरणों की ओर एक सीधा इशारा है।
अमेरिका अब वह ताकत नहीं रहा जिसके एक इशारे पर दुनिया चलती थी
ईरान का यह हमलावर रुख ऐसे समय में सामने आया है, जब मध्य पूर्व में तनाव अपनी चरम सीमा पर है। गाजा संकट और इजराइल के साथ बढ़ते संघर्ष के बीच अमेरिका की भूमिका पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। ईरानी विदेश मंत्री के मुताबिक, अमेरिका अब वह ताकत नहीं रहा जिसके एक इशारे पर दुनिया की नीतियां बदल जाती थीं। उनकी आर्थिक और सैन्य नीतियां अब उलटी पड़ने लगी हैं, जिससे उसकी वैश्विक पकड़ बहुत ढीली हो गई है।
अब पश्चिमी देशों पर आंख मूंदकर निर्भर रहने का समय खत्म हो चुका
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बयान के पीछे एक गहरा रणनीतिक संदेश छिपा हुआ है। चीन और रूस जैसे देशों के साथ मिलकर ईरान एक नए ‘मल्टीपोलर’ (बहुध्रुवीय) विश्व की वकालत कर रहा है, जहां किसी एक देश का एकाधिकार न हो। अमेरिका के अंदरूनी राजनीतिक और आर्थिक हालात का हवाला देते हुए ईरान दुनिया के बाकी देशों को यह संदेश देना चाहता है कि अब पश्चिमी देशों पर आंख मूंदकर निर्भर रहने का समय खत्म हो चुका है।
वाशिंगटन के हलकों में इसे ईरान का ‘प्रोपेगेंडा’ बताया जा रहा
वाशिंगटन के राजनीतिक हलकों में इसे ईरान का ‘प्रोपेगेंडा’ बताया जा रहा है। जानकारों का कहना है कि ईरान घरेलू दबाव को कम करने और अपने क्षेत्रीय सहयोगियों का मनोबल बढ़ाने के लिए ऐसी बयानबाजी कर रहा है। कई अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान ब्रिक्स और शंघाई सहयोग संगठन जैसे नए गठबंधनों की बढ़ती ताकत दर्शाता है, जो अमेरिकी डॉलर और उसकी नीतियों को चुनौती दे रहे हैं।
इस तरह की ‘पतन’ की भविष्यवाणी करना अमेरिकी वोटरों के लिए घातक
क्या यह बयान अमेरिका के राजनीतिक हालात को ध्यान में रखकर दिया गया है? जब अमेरिका खुद घरेलू राजनीति में बंटा हुआ है, तब एक बाहरी देश द्वारा इस तरह की ‘पतन’ की भविष्यवाणी करना अमेरिकी वोटरों और वहां की अर्थव्यवस्था को मनोवैज्ञानिक रूप से प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा, दुनिया भर में डॉलर के वर्चस्व को खत्म करने की जो मुहिम चल रही है, उसे भी इस बयान से हवा मिलेगी।


