अमेरिका, इजरायल और ईरान की लड़ाई तेज हो गई है। इसका असर बिहार पर पड़ रहा है। गैस संकट गहरा गया है। बैकलॉग बढ़ता जा रहा है। सरकार की कोशिश के बाद भी गैस सिलेंडर की वेटिंग घट नहीं रही। लोगों को खाना बनाने के लिए रसोई गैस नहीं मिल रहा है। पटना, पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण और दरभंगा में स्थिति सबसे खराब है। राजधानी पटना में 6 अप्रैल को वेटिंग 1,62,856 तक पहुंच गई। बिहार में पिछले सप्ताह 15 लाख ग्राहकों को भरे हुए गैस सिलेंडर का इंतजार था। यह बढ़कर 16.56 लाख पहुंच गया है। शहर में गैस सिलेंडर का वेटिंग पीरियड 48 दिन और गांव में 55 दिन हो चुका है। ज्यादा खपत वाले परिवार के सामने गंभीर संकट है। दैनिक भास्कर की स्पेशल रिपोर्ट में जानिए लोगों की परेशानी कितनी बढ़ी है। बिहार में LPG सिलेंडर की स्थिति क्या है? पीएनजी का क्या हाल है? गैस संकट घटने की जगह बढ़ा, पटना में वेटिंग 1.62 लाख बिहार में गैस संकट घटने की जगह बढ़ गया है। सरकार का दावा है कि पर्याप्त मात्रा में गैस भंडार है, लेकिन एक हकीकत यह भी है कि वेटिंग पीरियड बढ़ रहा है। एलपीजी पेंडेंसी एक सप्ताह में दो लाख से अधिक बढ़ी है। भारत सरकार का कहना है कि देश में लगभग 8 लाख टन एलपीजी का सुरक्षित भंडार है। यह देश की जरूरतों के लिए पर्याप्त है। वहीं, बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत के अनुसार, बिहार में पेट्रोलियम उत्पादों और रसोई गैस का पर्याप्त स्टॉक है। उन्होंने जनता से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की है। गैस कंपनी के मुताबिक 29 मार्च तक बिहार में 15 लाख 22 हजार 340 रसोई गैस रिफील बुकिंग पेंडिग थी। 6 अप्रैल तक यह बढ़कर 16 लाख 56 हजार 776 हो गई। पटना जिला में वेटिंग 1 लाख 56 हजार 564 से बढ़कर 1 लाख 62 हजार 856 हो गई है। सप्ताह भर में एलपीजी वेटिंग पीरियड में भारी इजाफा हुआ है। बिहार के सभी जिलों का औसत वेटिंग पीरियड 7 दिन तक पहुंच गया है। यह 29 मार्च तक करीब 4 दिन था। पश्चिम चंपराण जिला में गैस संकट सबसे गंभीर दिख रही है। सबसे कम वेटिंग पीरियड शेखपुरा की है। पीएनजी कनेक्शन का हाल खराब, 25 हजार एप्लिकेशन पेंडिंग LPG गैस संकट के बीच जिन घरों में PNG (Piped Natural Gas) कनेक्शन हैं, उन्हें परेशानी नहीं है। उन्हें गैस मिल रहा है। हालांकि नए कनेक्शन लगाने के मामले में स्थिति खराब है। मार्च 2026 तक 3 लाख 75 हजार 751 पीएनजी कनेक्शन लगाने थे। गैस संकट शुरू होने पर सरकार ने गैस कंपनियों को तेजी से पीएनजी कनेक्शन देने के लिए कहा और टारगेट सेट किए। इसके बाद भी मार्च से लेकर अप्रैल के पहले सप्ताह में टारगेट के 26.44% (99,346) नए कनेक्शन लगे हैं। 25 हजार 328 एप्लिकेशन पेंडिंग हैं। इसकी वजह हैं.. गैस संकट से निपटने के लिए सरकार क्या कर रही? 1- CMG की बैठक: LPG और पेट्रोल-डीजल संकट के बीच सरकार CMG (Crisis Management Group) की बैठकें कर रही है। तैयारी सप्लाई सुचारू रखने, काला बाजारी रोकने और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। बिहार सरकार PNG की सप्लाई बढ़ाने पर फोकस कर रही है। इसमें गैस की सप्लाई पाइप के माध्यम से घरों तक होती है। CMG की पहली बैठक में 14 जिलों के अफसरों को कड़ी फटकार लगी है। इन जिलों में PNG का एक भी उपभोक्ता नहीं है। मुख्यमंत्री के गृह जिला नालंदा, पश्चिम चंपारण, भोजपुरी, गया, दरभंगा, रोहतास, मुजफ्फरपुर, सारण, वैशाली, बेगूसराय, भागलपुर, पूर्वी चंपारण, जहानाबाद और जमुई में एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई का बैकलॉग काफी खराब है। इन जिलों में बैकलॉग ठीक करने का निर्देश दिया गया है। 2. 38 सीनियर IAS अफसर ग्राउंड पर: बिहार सरकार ने 38 सीनियर IAS अफसर को जमीन पर उतारा है। सभी जिला प्रभारी सचिव को जिलों की निगरानी करने और ग्राउंड पर जाकर स्थिति समझने के निर्देश हैं। जिला प्रभारी सचिव डीएम, एसपी और एसएसपी के साथ बैठक कर रहे हैं। गैस कंपनी के साथ मीटिंग कर रहे हैं। गैस एजेंसी और अन्य संस्थानों का इंस्पेक्शन कर कार्रवाई कर रहे हैं। 3. बॉटलिंग प्लांट पर CISF की तैनाती: बिहार सरकार ने किसी अनहोनी को रोकने के लिए गैस बॉटलिंग प्लांट पर हथियारबंद जवानों को तैनात किया है। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक बिहार में 15 एलपीजी बॉटलिंग प्लांट हैं। सभी प्लांट पर पुलिस बल तैनात किए गए हैं। बरौनी रिफाइनरी सुरक्षित जोन में CISF की तैनाती की गई है। 4. गैस एजेंसी पर पुलिस की तैनाती: सरकार ने गैस एजेंसी की सुरक्षा बढ़ा दी है। गैस एजेंसी को दो वर्ग (सेंसेटिव और नन सेंसेटिव) में बांटा है। सेंसेटिव गैस एजेंसी पर पुलिस के जवान तैनात किए गए हैं। ऐसी गैस एजेंसी की संख्या 199 है। बिहार में कुल 1968 गैस एजेंसियां हैं। 5. 24×7 काम कर रहा कंट्रोल रूम: बिहार सरकार 24 x 7 कंट्रोल रूम चला रही है। हेल्प लाइन नंबर जारी किए गए हैं। लोगों की शिकायतें सुनी जा रही हैं। 31 मार्च 2026 तक 4543 शिकायतें दर्ज की गईं। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के मुताबिक 3635 शिकायतों का निपटारा किया जा चुका है। परेशान उपभोक्ता 0612-2233050 पर कॉल कर अपनी शिकायत दर्ज करा रहें हैं। यहां कुल 10 हंटिंग लाइन लगाई गई है। 6. जमाखोरों पर FIR दर्ज की जा रही: जमाखोरों पर नकेल कसने के लिए छापेमारी की जा रही है। गड़बड़ी पाए जाने पर FIR दर्ज की जा रही है। अमेरिका, इजरायल और ईरान की लड़ाई तेज हो गई है। इसका असर बिहार पर पड़ रहा है। गैस संकट गहरा गया है। बैकलॉग बढ़ता जा रहा है। सरकार की कोशिश के बाद भी गैस सिलेंडर की वेटिंग घट नहीं रही। लोगों को खाना बनाने के लिए रसोई गैस नहीं मिल रहा है। पटना, पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण और दरभंगा में स्थिति सबसे खराब है। राजधानी पटना में 6 अप्रैल को वेटिंग 1,62,856 तक पहुंच गई। बिहार में पिछले सप्ताह 15 लाख ग्राहकों को भरे हुए गैस सिलेंडर का इंतजार था। यह बढ़कर 16.56 लाख पहुंच गया है। शहर में गैस सिलेंडर का वेटिंग पीरियड 48 दिन और गांव में 55 दिन हो चुका है। ज्यादा खपत वाले परिवार के सामने गंभीर संकट है। दैनिक भास्कर की स्पेशल रिपोर्ट में जानिए लोगों की परेशानी कितनी बढ़ी है। बिहार में LPG सिलेंडर की स्थिति क्या है? पीएनजी का क्या हाल है? गैस संकट घटने की जगह बढ़ा, पटना में वेटिंग 1.62 लाख बिहार में गैस संकट घटने की जगह बढ़ गया है। सरकार का दावा है कि पर्याप्त मात्रा में गैस भंडार है, लेकिन एक हकीकत यह भी है कि वेटिंग पीरियड बढ़ रहा है। एलपीजी पेंडेंसी एक सप्ताह में दो लाख से अधिक बढ़ी है। भारत सरकार का कहना है कि देश में लगभग 8 लाख टन एलपीजी का सुरक्षित भंडार है। यह देश की जरूरतों के लिए पर्याप्त है। वहीं, बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत के अनुसार, बिहार में पेट्रोलियम उत्पादों और रसोई गैस का पर्याप्त स्टॉक है। उन्होंने जनता से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की है। गैस कंपनी के मुताबिक 29 मार्च तक बिहार में 15 लाख 22 हजार 340 रसोई गैस रिफील बुकिंग पेंडिग थी। 6 अप्रैल तक यह बढ़कर 16 लाख 56 हजार 776 हो गई। पटना जिला में वेटिंग 1 लाख 56 हजार 564 से बढ़कर 1 लाख 62 हजार 856 हो गई है। सप्ताह भर में एलपीजी वेटिंग पीरियड में भारी इजाफा हुआ है। बिहार के सभी जिलों का औसत वेटिंग पीरियड 7 दिन तक पहुंच गया है। यह 29 मार्च तक करीब 4 दिन था। पश्चिम चंपराण जिला में गैस संकट सबसे गंभीर दिख रही है। सबसे कम वेटिंग पीरियड शेखपुरा की है। पीएनजी कनेक्शन का हाल खराब, 25 हजार एप्लिकेशन पेंडिंग LPG गैस संकट के बीच जिन घरों में PNG (Piped Natural Gas) कनेक्शन हैं, उन्हें परेशानी नहीं है। उन्हें गैस मिल रहा है। हालांकि नए कनेक्शन लगाने के मामले में स्थिति खराब है। मार्च 2026 तक 3 लाख 75 हजार 751 पीएनजी कनेक्शन लगाने थे। गैस संकट शुरू होने पर सरकार ने गैस कंपनियों को तेजी से पीएनजी कनेक्शन देने के लिए कहा और टारगेट सेट किए। इसके बाद भी मार्च से लेकर अप्रैल के पहले सप्ताह में टारगेट के 26.44% (99,346) नए कनेक्शन लगे हैं। 25 हजार 328 एप्लिकेशन पेंडिंग हैं। इसकी वजह हैं.. गैस संकट से निपटने के लिए सरकार क्या कर रही? 1- CMG की बैठक: LPG और पेट्रोल-डीजल संकट के बीच सरकार CMG (Crisis Management Group) की बैठकें कर रही है। तैयारी सप्लाई सुचारू रखने, काला बाजारी रोकने और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। बिहार सरकार PNG की सप्लाई बढ़ाने पर फोकस कर रही है। इसमें गैस की सप्लाई पाइप के माध्यम से घरों तक होती है। CMG की पहली बैठक में 14 जिलों के अफसरों को कड़ी फटकार लगी है। इन जिलों में PNG का एक भी उपभोक्ता नहीं है। मुख्यमंत्री के गृह जिला नालंदा, पश्चिम चंपारण, भोजपुरी, गया, दरभंगा, रोहतास, मुजफ्फरपुर, सारण, वैशाली, बेगूसराय, भागलपुर, पूर्वी चंपारण, जहानाबाद और जमुई में एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई का बैकलॉग काफी खराब है। इन जिलों में बैकलॉग ठीक करने का निर्देश दिया गया है। 2. 38 सीनियर IAS अफसर ग्राउंड पर: बिहार सरकार ने 38 सीनियर IAS अफसर को जमीन पर उतारा है। सभी जिला प्रभारी सचिव को जिलों की निगरानी करने और ग्राउंड पर जाकर स्थिति समझने के निर्देश हैं। जिला प्रभारी सचिव डीएम, एसपी और एसएसपी के साथ बैठक कर रहे हैं। गैस कंपनी के साथ मीटिंग कर रहे हैं। गैस एजेंसी और अन्य संस्थानों का इंस्पेक्शन कर कार्रवाई कर रहे हैं। 3. बॉटलिंग प्लांट पर CISF की तैनाती: बिहार सरकार ने किसी अनहोनी को रोकने के लिए गैस बॉटलिंग प्लांट पर हथियारबंद जवानों को तैनात किया है। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक बिहार में 15 एलपीजी बॉटलिंग प्लांट हैं। सभी प्लांट पर पुलिस बल तैनात किए गए हैं। बरौनी रिफाइनरी सुरक्षित जोन में CISF की तैनाती की गई है। 4. गैस एजेंसी पर पुलिस की तैनाती: सरकार ने गैस एजेंसी की सुरक्षा बढ़ा दी है। गैस एजेंसी को दो वर्ग (सेंसेटिव और नन सेंसेटिव) में बांटा है। सेंसेटिव गैस एजेंसी पर पुलिस के जवान तैनात किए गए हैं। ऐसी गैस एजेंसी की संख्या 199 है। बिहार में कुल 1968 गैस एजेंसियां हैं। 5. 24×7 काम कर रहा कंट्रोल रूम: बिहार सरकार 24 x 7 कंट्रोल रूम चला रही है। हेल्प लाइन नंबर जारी किए गए हैं। लोगों की शिकायतें सुनी जा रही हैं। 31 मार्च 2026 तक 4543 शिकायतें दर्ज की गईं। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के मुताबिक 3635 शिकायतों का निपटारा किया जा चुका है। परेशान उपभोक्ता 0612-2233050 पर कॉल कर अपनी शिकायत दर्ज करा रहें हैं। यहां कुल 10 हंटिंग लाइन लगाई गई है। 6. जमाखोरों पर FIR दर्ज की जा रही: जमाखोरों पर नकेल कसने के लिए छापेमारी की जा रही है। गड़बड़ी पाए जाने पर FIR दर्ज की जा रही है।


