‘एसपी ऑफिस के पीछे कमरे में मेरे सारे कपड़े उतरवाए। एसपी देहात ने पैर खुलवाकर बीच में डंडा मारना शुरू किया। कुछ देर बाद SSP अविनाश पांडेय आए। कहा कि अब इसे थाने लेकर जाओ। वहां रातभर मेरी पिटाई होती रही। पीने के लिए पेशाब दी गई।’ पुलिस ने यह बर्बरता मेरठ के रवि गौतम के साथ की। वह दैनिक भास्कर से कहते हैं- ‘ललिता हत्याकांड के धरने में शामिल होना क्या मेरी गलती थी। 24 घंटे मुझे क्रिमिनल की तरह टॉर्चर किया गया।’ सिर्फ रवि गौतम ही नहीं, IPS अविनाश पांडेय पर 2 और लोग टॉर्चर करने के आरोप लगा रहे हैं। दिग्विजय भाटी और अनिल प्रधान। दिग्विजय भाटी का आरोप है- ‘जब मुझे पुलिस टॉर्चर कर रही थी, तब वीडियो कॉल पर अविनाश पांडेय को यह सब दिखाया जा रहा था। हमारी चीखें निकल रही थीं और वह हंस रहे थे। अनिल प्रधान की कहानी भी कुछ ऐसी ही है।’ इन आरोपों के बाद 20 अगस्त को अविनाश पांडेय को मेरठ से हटाकर लखनऊ मुख्यालय से अटैच कर दिया गया था। सहारनपुर के DIG जांच कर रहे हैं। सामने आया कि SP कार्यालय में पिटाई हुई है। SOG प्रभारी को सस्पेंड भी कर दिया गया। अब सिलसिलेवार पीड़ितों से जानिए कि उनके साथ क्या हुआ? SSP ने धमकाया- तुझे नेता बनाएंगे, फिर 10 पुलिस वाले मुझे पीटते रहे रवि गौतम पेशे से वकील है। युवा शक्ति दल के प्रमुख हैं और नोएडा में रहते हैं। ललिता हत्याकांड में जब मेरठ में धरना हुआ, तब रवि गौतम भी इसमें शामिल हुए थे। 8 जुलाई को धरने में SSP अविनाश पांडेय ने प्रदर्शनकारियों पर ताबड़तोड़ थप्पड़ बरसाने शुरू किए। रवि गौतम को पुलिस वैन में बंद कर दिया। कुछ देर बाद SSP पुलिस वैन पर चढ़े और उसमें 8-10 थप्पड़ मारे। हमने पूछा- गाड़ी में पिटाई के बाद आपके साथ क्या हुआ? रवि कहते हैं- ‘वैन में पीटने के बाद मुझे SP कार्यालय लेकर गए। दो अन्य लोगों को गाड़ी में बैठा दिया। कुछ देर बाद कप्तान अविनाश पांडेय वहां पहुंचे। मुझे एक सिपाही के जरिए बुलवाया। मैं जैसे ही अंदर गया, वहां मुझे गाली देते हुए कहा- तुझे आज नेता बनाता हूं। इसके बाद उन्होंने अंदर मौजूद करीब 10 पुलिसकर्मियों से कहा कि इसकी अकड़ ढीली करो। वो पुलिसकर्मी मुझे मारने लगे। कोई थप्पड़, कोई कोहनी से मार रहा था। इसके बाद मुझे करीब 100 लाठी मारीं। मैं गिर गया और मुझे सीने में तेज दर्द हो रहा था। ‘सारे कपड़े उतारकर पूरी रात पीटते रहे’ रवि आगे कहते हैं- ‘एक घंटे बाद मुझे फिर से बुलाया गया। उस वक्त SP देहात अभिजीत कुमार, CO सौम्या अस्थाना, सिविल लाइंस थाने के SHO सौरभ शुक्ला और अन्य लोग मौजूद थे। SP देहात अभिजीत कुमार ने मुझे 8 से 10 थप्पड़ मारे। गाली देते हुए कहा कि तू नोएडा में जिलाबदर है। ये मेरठ है, यहां धरना करने वालों का अच्छे से इलाज करता हूं। जब वो चिल्ला रहे थे, तब मैं उन्हें बताने की कोशिश कर रहा था कि अगर मैं कहीं धरने में शामिल होता हूं, तो पुलिसवालों को बता देता हूं।’ रवि ने आगे जो बताया, वह भयानक है। वह कहते हैं- ‘ये लोग मुझे SP ऑफिस में ही पीछे साइड एक कमरे में ले गए। वहां मेरे कपड़े उतरवाए गए। मुझे लगा कि अब कच्छा-बनियान में पीटेंगे, लेकिन इन्होंने उसे भी उतरवा दिया। इसके बाद SP देहात अभिजीत कुमार ने पीटना शुरू किया। लगातार जातिसूचक गालियां देते और मारते रहे। इसके बाद पैर खुलवाकर बीच में डंडा मारना शुरू किया। कुछ देर बाद कप्तान अविनाश पांडेय आए और कहा कि अब इसे थाने लेकर जाओ। रात करीब 11 बजे मुझे लेकर ये लोग थाने पहुंचे। वहां SHO सौरभ शुक्ला, उदय प्रताप सिंह समेत कई पुलिसवालों ने पकड़कर मारना शुरू कर दिया। कहा कि तेरा एनकाउंटर कर देंगे। वहां पुलिसवालों ने फिर से पीटा। हर बार गालियां देते, एनकाउंटर की धमकी देते। कहते कि आज तुझे बॉडी बिल्डर बनाऊंगा। सिविल लाइंस थाने के दाहिने साइड साइबर का एक कमरा था, वहां भी ले जाकर मुझे पीटा गया।’ आरोप- मुझे प्यास लगी तो पेशाब दे दी… रवि ने बताया कि मुझे प्यास लगी थी। मैंने इन लोगों से पानी मांगा, तो इन्होंने जो दिया वह पीले रंग का था। मुझे लगा कि यह पेशाब है। मैंने दोबारा पानी मांगा, तब गाली देते हुए कहा गया कि तुम्हारे लिए अभी बिसलेरी का पानी लाएंगे। इन लोगों ने मुझे रातभर मारा। सुबह कोर्ट में पेश किया और फिर जेल भेज दिया। मेरा मेडिकल तक नहीं हुआ। जब मुजफ्फरनगर जेल पहुंचा, तब जाकर मेडिकल हुआ। ‘जब तक कार्रवाई नहीं, तब तक धरने पर रहेंगे’ रवि गौतम 20 अगस्त से मेरठ के कमिश्नरी पार्क में धरने पर बैठे हैं। उनका कहना है कि इतना क्रूर अधिकारी नहीं देखा। अब हमारी 3 मांगें हैं- ‘अपशब्द पर आपत्ति जताई, ये SSP को चुभ गया’ SSP अविनाश पांडेय से पीड़ितों की सूची में एक नाम दिग्विजय भाटी का है। सपा नेता दिग्विजय 21 अगस्त को जब पहली बार मीडिया के सामने आए, तो उनकी एक आंख पर गंभीर चोट थी। वह दैनिक भास्कर को बताते हैं- ‘19 अगस्त को हम 11.30 बजे SSP अविनाश पांडेय से मिलने के लिए पहुंचे थे। हमारे साथी मोहित जाटव की हिस्ट्रीशीट खोल दी थी। चूंकि 17 अगस्त को सपा प्रमुख अखिलेश यादव से मुलाकात की थी, उसे लेकर कप्तान अविनाश पांडेय ने कहा- तुम लोग बहुत बड़े नेता बन गए हो। इसी दौरान उन्होंने मोहित को अपशब्द कहे, तो मैंने उन्हें रोक दिया था। मुझे लगता है कि यही बात SSP को चुभ गई।’ ‘वह हम दोनों को खींचकर केबिन में ले गए। हाथ-पैर, जूते-बेल्ट से पिटाई करने लगे। मैंने उनका पैर पकड़ लिया, तभी उन्होंने पैर से मेरी आंख पर जोर से मारा। मेरी आंख सूज गई। इसके बाद उन्होंने SOG प्रभारी अखिलेश कुमार गौड़ को बुलाया। उसने भी मुझे पीटा। इसके बाद हम दोनों को SOG ऑफिस ले गए। वहां मुझे उल्टा टांग दिया गया। 4 से 5 पुलिस वाले मुझे पीटते रहे। अखिलेश ये सब वीडियो कॉल पर अविनाश पांडेय को दिखा रहा था। हमारी चीखें निकल रही थीं और वह हंस रहे थे।’ दिग्विजय के मुताबिक, जिस ललिता गौतम केस में मेरे खिलाफ FIR की गई और जेल भेजा गया, उस मामले में भी मैं वहां नहीं गया था। मेरी कोई फोटो-वीडियो धरनास्थल का नहीं था। फिर भी मुझे प्रताड़ित किया गया। मैं चाहता हूं कि अविनाश के खिलाफ कार्रवाई हो, वरना मैं आत्मदाह करूंगा। मेरठ में अनिल प्रधान लंबे वक्त से वकालत करते आ रहे हैं। अनिल ने SSP अविनाश पांडेय के खिलाफ DIG से शिकायत की थी। हमारी टीम ने अनिल से बात की। वह कहते हैं- ‘अविनाश जातिवादी व्यक्ति हैं, दलित और मुस्लिमों से इन्हें एलर्जी है। इसलिए जब कभी मन में आया, ऑफिस बुलाकर पीट दिया। हमारा पहले कभी किसी पुलिस अधिकारी से कोई विवाद नहीं रहा, लेकिन इन्होंने आते ही दिक्कत शुरू कर दी।’ अनिल कहते हैं- ‘हमारा एक साइबर ठगी का मामला था। लोकल पुलिस ने जांच के बाद रिपोर्ट इन्हें सब्मिट कर दी। हम उस मामले में इनसे मिलने पहुंचे तो इनके पेशगार ने कहा कि इसमें जांच बंद हो गई है। हमने कहा कि जांच कैसे बंद की, क्योंकि FIR तो आज तक लिखी नहीं गई। ये बात जब SSP को पता चली, तो वह उल्टा-सीधा बोलने लगे। हमने भी कहा कि हम वकील हैं और पीड़ित भी हैं।’ ‘अगर अपराध नहीं किया तो जेल क्यों भेजा’ अनिल प्रधान ललिता गौतम हत्याकांड पर कहते हैं- ‘पुलिस मुख्य आरोपी अंकित कुमार को लगातार बचा रही थी। शायद वह PAC में था इसलिए। हम लोग धरने के लिए बैठे, तो ये वहां पहुंचे और लोगों पर लगातार थप्पड़ बरसाने शुरू कर दिए। गाली देते हुए कहा कि इन लोगों ने सड़क गंदी कर दी। डिटेन किए गए उसी दिन जब इनके ऊपर दबाव पड़ा, तब इन्होंने उसी अंकित कुमार को IPC की धारा 302 के केस में गिरफ्तार करके जेल भेजा। IPS अविनाश पांडेय बोले- कोर्ट में जवाब दूंगा हमने इस पूरे मामले पर IPS अविनाश पांडेय से बात की। उन्होंने कहा कि हमने इस मामले पर जो कहना था कह दिया है, अब कुछ नहीं कहना। अब मैं मेरठ से वापसी भी कर चुका हूं। स्थानीय अधिकारी मामले को देख रहे हैं। जो कुछ होगा, उसका कोर्ट में जवाब दिया जाएगा। दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव की पिटाई के मामले में उनके खिलाफ जांच हो रही है। एसओजी प्रभारी अखिलेश गौड़ को सस्पेंड किया जा चुका है। अविनाश पांडेय के खिलाफ और दिग्विजय भाटी के समर्थन में मेरठ से लेकर संभल तक में बड़े स्तर पर प्रदर्शन हो रहा है। पंचायत का आह्वान हो रहा। अधिकारियों ने कार्रवाई के लिए 15 दिन का समय मांगा है। —————————– यह खबर भी पढ़ें- जज ने लिखा- IAS दुर्गा शक्ति नागपाल ने धमकी दी, फोन पर कहा था- कैसे संस्कार हैं आपके, बात करने की तमीज नहीं गोंडा जिले में सीनियर डिवीजन की सिविल जज शबीना खान ने IAS अफसर दुर्गा शक्ति नागपाल के खिलाफ जिला जज को लेटर लिखा- ‘कमिश्नर अपने पद का दुरुपयोग कर रही हैं। एक लंबित मुकदमे को लेकर मुझ पर अनुचित दबाव बनाया, हाईकोर्ट में शिकायत करने की धमकी दी।’ पढ़िए पूरी खबर…

