सरकारी दफ्तरों में बिना पैसे काम कराने की उम्मीद रखने वालों के लिए ग्वालियर में हालात चिंता बढ़ाने वाले हैं। लोकायुक्त पुलिस की कार्रवाई में सामने आए मामलों में कहीं सरकारी कामकाज से अलग रिश्वत लेने के लिए निजी ठिकाना बना लिया गया, तो कहीं सरकारी नौकरी के 35-40 साल पूरे करने के बाद रिटायरमेंट से महज एक दिन पहले अधिकारी 6 हजार रुपए की रिश्वत लेते पकड़ा गया। लोकायुक्त पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, 1 जनवरी 2025 से अगस्त 2026 तक 19 महीनों में 9 सरकारी विभागों के 37 अधिकारी-कर्मचारी रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े जा चुके हैं। इनमें सबसे ज्यादा मामले राजस्व विभाग और नगर निगम से जुड़े हैं। केस 1: रिश्वत के लिए खोल रखा था प्राइवेट ऑफिस सिरसौद गांव में पदस्थ हल्का पटवारी रेखा शाक्य ने सरकारी कामकाज से अलग रिश्वत लेने के लिए निजी ठिकाना बना रखा था। लोकायुक्त की कार्रवाई में सामने आया कि वह इसी प्राइवेट ऑफिस से जमीन से जुड़े काम निपटाने के नाम पर लोगों से रकम की मांग करती थी। मंशाराम की शिकायत पर लोकायुक्त ने कार्रवाई की और रेखा शाक्य को 15 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ लिया। मंशाराम ने अपनी बहन की जमीन के सीमांकन और पत्नी सावित्रीबाई के नाम नामांतरण के लिए आवेदन दिया था। आरोप है कि काम करने के बदले पटवारी ने 15 हजार रुपए की रिश्वत मांगी थी। पटवारी पहले ही शिकायतकर्ता से 3500 रुपए ले चुकी थी। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि रिश्वत की रकम लेने में पटवारी के पति कृष्णकांत की भूमिका भी थी। मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। केस 2: जिंदगी की आखिरी रिश्वत… रिटायरमेंट से एक दिन पहले पकड़े गए सरकारी नौकरी के 35-40 साल पूरे हो चुके थे। अगले ही दिन सम्मान के साथ रिटायरमेंट होना था। करीब 60 लाख रुपए का रिटायरमेंट फंड, पेंशन और आगे संविदा पर नौकरी की उम्मीद सामने थी। लेकिन नौकरी के आखिरी पड़ाव पर ली गई 6 हजार रुपए की रिश्वत ने पूरी कहानी बदल दी। 30 जुलाई की दोपहर ग्वालियर नगर निगम के कार्यपालन यंत्री सुशील कटारे ने ठेकेदार से 6 हजार रुपए लिए और उसी समय लोकायुक्त के शिकंजे में आ गए। कटारे को 31 जुलाई को रिटायर होना था। नगर निगम के इतिहास में इसे पहला ऐसा मामला बताया जा रहा है, जब कोई कार्यपालन यंत्री रिटायरमेंट से महज कुछ घंटे पहले रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया। मामला ठेकेदार सचिन पचौरी के करीब 36 लाख रुपए के भुगतान से जुड़ा था। आरोप है कि फाइल आगे बढ़ाने के एवज में कटारे ने एक प्रतिशत कमीशन के हिसाब से 36 हजार रुपए की मांग की थी। ठेकेदार 28 जुलाई को ही 30 हजार रुपए दे चुका था। बातचीत रिकॉर्ड होने के बाद ठेकेदार ने लोकायुक्त में शिकायत की। शिकायत के सत्यापन के बाद 30 जुलाई को लोकायुक्त ने ठेकेदार को केमिकल लगे 6 हजार रुपए देकर निगम कार्यालय भेजा। जैसे ही कटारे ने रकम लेकर जेब में रखी, लोकायुक्त की टीम ने उन्हें पकड़ लिया। जिस नौकरी के आखिरी दिन सम्मान और रिटायरमेंट लाभ मिलने थे, उसके ठीक एक दिन पहले 6 हजार रुपए की रिश्वत ने पूरी कहानी पलट दी। यही रकम अब उनकी ‘जिंदगी की आखिरी रिश्वत’ बन गई। आम काम के लिए भी मांगी जा रही घूस लोकायुक्त में पहुंची शिकायतों से सामने आया कि नामांतरण, सीमांकन और नाम संशोधन जैसे सामान्य सरकारी कामों के लिए भी रिश्वत मांगी गई। कई शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि पैसे नहीं देने पर उनकी फाइल आगे नहीं बढ़ाई जा रही थी। परेशान लोगों ने लोकायुक्त से शिकायत की और सत्यापन के बाद ट्रैप की कार्रवाई की गई। महिला कर्मचारी भी लोकायुक्त के ट्रैप में रिश्वतखोरी के मामलों में महिला कर्मचारी भी लोकायुक्त की कार्रवाई की जद में आईं। राजस्व विभाग से जुड़े एक मामले में महिला पटवारी को 15 हजार रुपए की रिश्वत लेते पकड़ा गया। इससे साफ है कि रिश्वतखोरी किसी एक पद या वर्ग तक सीमित नहीं है। पहले से जांच, फिर भी नहीं थम रहा खेल राजस्व विभाग और नगर निगम के कई अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ पहले से लोकायुक्त और EOW में जांच चल रही है। इसके बावजूद नए मामले सामने आना सरकारी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। लोकायुक्त के लगातार ट्रैप के बाद भी आम लोगों से काम के बदले पैसे मांगने की शिकायतें सामने आ रही हैं। 37 ट्रैप के बाद भी बड़ा सवाल 19 महीनों में 37 अधिकारी-कर्मचारियों का रिश्वत लेते पकड़ा जाना बताता है कि कार्रवाई लगातार हो रही है, लेकिन रिश्वतखोरी की समस्या खत्म नहीं हुई है। अब चुनौती सिर्फ घूसखोरों को पकड़ने की नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था बनाने की है, जहां आम आदमी को नामांतरण, सीमांकन या फाइल आगे बढ़वाने जैसे सामान्य कामों के लिए अपनी जेब ढीली न करनी पड़े। लोकायुक्त पुलिस ने लोगों से अपील की है कि अगर कोई सरकारी कर्मचारी रिश्वत मांगता है तो बिना डर शिकायत करें, ताकि सत्यापन के बाद ट्रैप कार्रवाई कर आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सके। —————- ये खबर भी पढ़ें… 6 हजार की रिश्वत ने 60 लाख का फंड अटकाया सरकारी नौकरी की 35-40 साल की कमाई, एक दिन बाद मिलने वाला सम्मान और करीब 60 लाख रुपए का रिटायरमेंट फंड… सब कुछ सामने था, लेकिन ग्वालियर नगर निगम के कार्यपालन यंत्री (एग्जीक्यूटिव इंजीनियर) सुशील कटारे ने रिटायरमेंट से एक दिन पहले ऐसी गलती कर दी, जिसने पूरी जिंदगी की कमाई पर सवाल खड़े कर दिए।पूरी खबर पढ़ें

