International Tea Day 2026: राजस्थान की ऑलिव लीफ टी, थार की मिट्टी से ग्लोबल हेल्थ ट्रेंड तक

International Tea Day 2026: राजस्थान की ऑलिव लीफ टी, थार की मिट्टी से ग्लोबल हेल्थ ट्रेंड तक

मोहित शर्मा.

जयपुर. दुनिया आज International Tea Day मना रही है। संयुक्त राष्ट्र के फूड एण्ड एग्रीकल्चर आर्गेनाइजेशन ऑफ द यूनाइटेड नेशंस ( Food and Agriculture Organization of the United Nations) मुख्यालय रोम में विकास को बढ़ावा और समावेशन” ( Fostering Growth and Inclusion) थीम के तहत बड़े आयोजन हो रहे हैं। भारत में भी चाय की कहानी अब सिर्फ असम-दार्जिलिंग तक सीमित नहीं रही। राजस्थान की रेतीली मिट्टी ने चाय की दुनिया में नया अध्याय जोड़ दिया है ऑलिव लीफ टी Olive Leaf Tea. लोग अब इस चाय का भरपूर आनंद ले रहे हैं।

हर्बल और ऑलिव लीफ टी के जरिए नई क्रांति ला रहे हैं

क्लाइमेट चेंज के इस दौर में जहां पारंपरिक चाय उत्पादन पर खतरा मंडरा रहा है, वहीं राजस्थान ने ऑलिव खेती और उसकी पत्तियों से बनी टी के जरिए सस्टेनेबल मॉडल का उदाहरण पेश किया है। यह न सिर्फ किसानों की आय बढ़ा रहा है बल्कि महिलाओं और छोटे किसानों को मुख्यधारा में ला रहा है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चाय उत्पादक देश है, लेकिन राजस्थान की गर्म रेत और ऑलिव फार्म्स अब हर्बल और ऑलिव लीफ टी के जरिए नई क्रांति ला रहे हैं।

स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद

राजस्थान भारत का वो राज्य बना जहां ऑलिव के पत्तों से प्रोसेस्ड टी बनाई जा रही है। यहीं से दुनिया की पहली प्रोसेस्ड ऑलिव टी बनाकर यूरोप तक पहुंचाई। यह ग्रीन टी का स्वस्थ विकल्प मानी जा रही है। कैफीन फ्री, एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर और हृदय स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद।

रेवेन्यू सोर्स बनी खेती

राजस्थान सरकार और इजरायली टेक्नोलॉजी की मदद से शुरू हुई ऑलिव खेती अब जयपुर के पास बस्सी, संचौर और अन्य इलाकों में फैली हुई है। यहां हर्बल टी प्लांट्स लग रहे हैं, जहां महिलाएं और छोटे किसान सीधे जुड़ रहे हैं। पत्तियों की प्रोसेसिंग से किसानों की अतिरिक्त आय हो रही है, जो ऑलिव फल के अलावा दूसरा रेवेन्यू सोर्स बन गया है।

सस्टेनेबल खेती और इनक्लूजन का प्रतीक

FAO के मुताबिक चाय की खेती करोड़ों लोगों की आजीविका चलाती है, लेकिन क्लाइमेट चेंज से उत्पादन प्रभावित हो रहा है। ऐसे में राजस्थान का यह डायवर्सिफिकेशन मॉडल अहम है। रेगिस्तानी इलाकों में ऑलिव पेड़ पानी की कम खपत वाले हैं और पत्तियों से टी बनाकर वैल्यू एडिशन हो रहा है। यह मॉडल “विकास को बढ़ावा और समावेशन” थीम से पूरी तरह मेल खाता है। ग्रामीण महिलाएं प्लांट्स में काम कर रही हैं, छोटे किसान शामिल हो रहे हैं और सस्टेनेबल फार्मिंग का नया उदाहरण बन रहा है।

चाय सिर्फ पहाड़ों की नहीं, बल्कि हर इलाके की हो सकती है

इंटरनेशनल टी डे पर राजस्थान यह साबित कर रहा है कि चाय सिर्फ पहाड़ों की नहीं, बल्कि हर इलाके की हो सकती है – बस नवाचार और मेहनत चाहिए। आज लोग मसाला चाय या ग्रीन टी के साथ राजस्थानी ऑलिव लीफ टी का स्वाद भी आजमा रहे हैं। चाय किसानों, महिलाओं और सस्टेनेबल विकास का प्रतीक है। थार की धरती अब ग्लोबल टी मैप पर अपनी पहचान बना चुकी है।

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