Indian Navy को बहु-क्षेत्रीय बल बनाने के लिए AI और लेजर तकनीक पर जोर: वाइस एडमिरल Ajay Kochhar

Indian Navy को बहु-क्षेत्रीय बल बनाने के लिए AI और लेजर तकनीक पर जोर: वाइस एडमिरल Ajay Kochhar

(तस्वीर के साथ)
नयी दिल्ली, 19 अक्टूबर नौसेना उपप्रमुख वाइस एडमिरल अजय कोचर ने सोमवार को कहा कि नौसेना एक ‘बहु क्षेत्रीय नेटवर्क बल’ बनने के लिए हवा और पानी के भीतर से लेकर एआई तथा क्वांटम प्रौद्योगिकी तक, सभी क्षेत्रों में विकास पर काम कर रही है। कोचर ने यहां ‘स्वावलंबन 2026’ से पहले आयोजित एक प्रेसवार्ता में हाल के संघर्षों से नौसेना द्वारा प्रौद्योगिकी अपनाने के मामले में सीखे गए सबक का भी जिक्र किया। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि नौसेना ‘निर्देशित-ऊर्जा अस्त्र प्रणाली’ हासिल करने के तरीकों पर विचार कर रही है, जिसका इस्तेमाल सस्ते ड्रोन को गिराने के लिए किया जा सकता है।

अप्रैल में, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने लेजर-निर्देशित ऊर्जा अस्त्र प्रणाली का सफल परीक्षण किया था। इसके साथ ही, भारत उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल हो गया है, जिनके पास दुश्मन के ड्रोन और मानवरहित विमानों को मार गिराने में सक्षम ये आधुनिक हथियार मौजूद हैं। यह पूछे जाने पर कि कौन से नए युद्धपोत या अन्य प्लेटफॉर्म शामिल किए जाने की उम्मीद है, नौसेना उपप्रमुख ने कहा, ‘‘हमारे 42 प्लेटफॉर्म ऑर्डर पर हैं।

इसके अलावा, 78 प्लेटफॉर्म और 120 एफआईसी (फास्ट इंटरसेप्टर क्राफ्ट) हैं, जिनकी कुल अनुमानित कीमत 1.41 लाख करोड़ रुपये है। इनके लिए आवश्यकता स्वीकृति मिल चुकी है, और ये खरीद प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों में हैं।’’
नौसेना 26 अक्टूबर को यहां मानेकशॉ सेंटर में अपने प्रमुख सेमिनार के पांचवें संस्करण की मेजबानी करेगी। वाइस एडमिरल कोचर ने कहा, ‘‘हमारा सामूहिक लक्ष्य एक ही है – भारत की प्रौद्योगिकी प्रतिभा और क्षमताओं को नौसेना की अभियानगत जरूरतों के करीब लाना, और स्वदेशी नवाचार को समुद्र में व्यावहारिक क्षमताओं में बदलना।’’
पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात और उभरते संघर्ष के बीच समुद्री हितों की रक्षा में नौसेना की भूमिका के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘‘जारी संकटों ने हमें सोचने और तैनाती, दोनों ही स्तरों पर व्यस्त रखा है।’’
उन्होंने नौसेना के ‘ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा’ का भी उल्लेख किया, जिसने महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर हो रहे हमलों के बीच कई जहाजों को सुरक्षित रूप से भारतीय तटों तक पहुंचाने में मदद की है।

हाल के संघर्षों से प्रौद्योगिकी अपनाने के संदर्भ में मिले सबक के बारे में पूछे गए एक सवाल पर कोचर ने कहा कि इन संघर्षों ने उन बदलावों को सामने ला दिया है जिन्हें सेना को अपनाना और आत्मसात करना चाहिए; जैसे कि युद्ध में स्वायत्त प्रणाली और कृत्रिम मेधा (एआई) का इस्तेमाल। उन्होंने कहा, ‘‘अगर हम भविष्य की ओर देखें, तो इसमें यूएएस (मानवरहित विमान प्रणाली) रोधी और क्वांटम प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल भी शामिल है-एक ऐसा क्षेत्र जो आने वाले समय में बहुत जल्द सामने आएगा। हम इन सभी बातों से पूरी तरह अवगत हैं।’’
पश्चिम एशिया की स्थिति के बीच भारतीय नौसेना की सीधी भूमिका पर उन्होंने कहा, ‘‘हमारे समुद्री हित हमारी सीमाओं से कहीं आगे तक फैले हुए हैं।

इसलिए, इन समुद्री हितों को सुरक्षित रखना और इनकी रक्षा करना भारतीय नौसेना का काम है।’’
कोचर ने यह भी कहा कि केवल संघर्ष ही नौसेना के भविष्य को तय नहीं करते। उन्होंने नौसेना के लिए प्रौद्योगिकी के महत्व पर जोर दिया। वर्ष 2022 में स्वावलंबन के पहले संस्करण में लगभग 800 प्रतिभागी शामिल हुए थे, और पिछले चार वर्षों में इसका विस्तार हुआ है, जिससे पिछले साल इसमें लगभग 3,000 प्रतिभागी जुड़े।

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