India-US Trade Deal से निर्यातकों को मिलेगी बढ़त, पहले चरण की कानूनी ड्राफ्टिंग शुरू

India-US Trade Deal से निर्यातकों को मिलेगी बढ़त, पहले चरण की कानूनी ड्राफ्टिंग शुरू

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) का पहला चरण तय हो गया है और फिलहाल इसकी कानूनी ड्राफ्टिंग और अंतिम समीक्षा चल रही है। श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के शताब्दी सम्मेलन (सेंटेनरी कॉन्क्लेव) के उद्घाटन समारोह में बोलते हुए, गोयल ने उम्मीद जताई कि जब भारत को अपने समकक्ष देशों के मुकाबले प्रतिस्पर्धी बढ़त मिल जाएगी, तो यह समझौता जल्द ही लागू हो जाएगा। उन्होंने कहा अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते का पहला चरण तय हो गया है। अभी इसकी कानूनी ड्राफ्टिंग और अन्य अंतिम प्रक्रियाएं चल रही हैं। हमें उम्मीद है कि हम जल्द ही इसे पूरी तरह से अंतिम रूप दे सकेंगे और जैसे ही हमें अपने समकक्ष देशों के मुकाबले प्रतिस्पर्धी बढ़त मिलेगी, हम इसे लागू कर देंगे। 

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वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा गुरुवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितताओं के बावजूद, अप्रैल-सितंबर 2026 के दौरान अमेरिका को भारत का माल निर्यात 11.1 प्रतिशत बढ़कर 50.81 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 45.73 अरब अमेरिकी डॉलर था। इस बीच, अमेरिका से आयात 26 प्रतिशत बढ़कर 32.33 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया, जो एक साल पहले 25.66 अरब अमेरिकी डॉलर था। इससे अमेरिका के साथ भारत का माल व्यापार अधिशेष (ट्रेड सरप्लस) 20.07 अरब अमेरिकी डॉलर से घटकर 18.48 अरब अमेरिकी डॉलर रह गया। टैरिफ से जुड़ी चुनौतियों के बावजूद, दोनों देशों के बीच माल व्यापार का विस्तार जारी रहा। 

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वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है और दोनों पक्ष इसे जल्द से जल्द पूरा करने की दिशा में काम कर रहे हैं। अग्रवाल ने कहा, “बातचीत सही दिशा में चल रही है। हम एक बहुत अच्छी स्थिति में हैं। हमें उम्मीद है कि हम जल्द से जल्द इस समझौते को अंतिम रूप देकर इस पर हस्ताक्षर कर लेंगे।” इसके अलावा, उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत अमेरिकी बाजार में ‘प्राथमिक पहुंच’ (प्रिफरेंशियल एक्सेस) चाहता है, ताकि भारतीय निर्यातक अन्य देशों के साथ प्रभावी ढंग से प्रतिस्पर्धा कर सकें। उन्होंने कहा, “जब आप कोई व्यापार समझौता करते हैं, तो यह न केवल एक-दूसरे के बाजारों तक पहुंच प्रदान करता है, बल्कि आपको किसी विशेष बाजार में ‘प्राथमिक पहुंच’ भी देता है।

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