Diplomacy : भारत और वियतनाम के बीच रिश्तों की चाशनी घुल गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को ऐलान किया कि भारत और वियतनाम के बीच राजनयिक संबंधों को ‘उन्नत व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक उन्नत कर दिया गया है। उन्होंने हैदराबाद हाउस में वियतनामी राष्ट्रपति तो लाम के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्र को नई दिल्ली की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति और ‘विजन महासंघ’ का ‘प्रमुख स्तंभ’ बताया। अब देखना यह है कि भारत और वियतनाम में नजदीकी के बाद चीन क्या करेगा और वह इन रिश्तों को किस नजर से और कैसे देखेगा।
हमारे व्यापार, प्रौद्योगिकी और पर्यटन संबंध भी मजबूत हुए हैं
प्रधानमंत्री ने पिछले दस बरसों के दौरान द्विपक्षीय संबंधों के विकास को याद करते हुए कहा, ‘एक दशक पहले, वियतनाम की मेरी पहली यात्रा के दौरान, वियतनाम आसियान में भारत का पहला व्यापक रणनीतिक साझेदार बना। तब से, हमारे संबंधों ने तीव्र और व्यापक प्रगति की है। सभ्यतागत संबंधों के साथ-साथ, हमारे व्यापार, प्रौद्योगिकी और पर्यटन संबंध भी मजबूत हुए हैं। इस मजबूत नींव पर आगे बढ़ते हुए, आज हम अपने संबंधों को उन्नत व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जा रहे हैं।’
राष्ट्रपति की यात्रा की शुरुआत बिहार से हुई
प्रधानमंत्री मोदी ने पदभार ग्रहण करने के कुछ ही समय बाद भारत की उच्चस्तरीय यात्रा पर आए वियतनामी नेता का स्वागत करते हुए कहा, ‘मुझे भारत में राष्ट्रपति तो लाम का हार्दिक स्वागत करते हुए बेहद खुशी हो रही है। वियतनाम के राष्ट्रपति बनने के महज एक महीने के अंदर ही उनका भारत दौरा, जिसमें कई व्यापारिक नेताओं सहित एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी शामिल है, भारत-वियतनाम संबंधों को दी जाने वाली उनकी प्राथमिकता साफ तौर पर दर्शाता है।’ प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्रपति की यात्रा, जिसकी शुरुआत बिहार से हुई, दोनों देशों के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंधों को रेखांकित करती है।
हम अपने बीच की सदभावना को ठोस परिणामों में बदल रहे हैं: मोदी
उन्होंने कहा, ‘वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम ने बोधगया से अपनी भारत यात्रा शुरू की। यह हमारे दोनों देशों की साझा सभ्यतागत और आध्यात्मिक विरासत को दर्शाता है। उनकी यात्रा और हमारी सार्थक चर्चाओं के माध्यम से, हम अपने बीच की सदभावना को ठोस परिणामों में बदल रहे हैं।’ पीएम मोदी ने विदेशों में भारतीय परंपराओं के सांस्कृतिक महत्व को उजागर करते हुए उल्लेख किया कि ‘2025 में वियतनाम में प्रदर्शित बौद्ध अवशेषों के दर्शन 1.5 करोड़ से अधिक लोगों ने किए थे।’ उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि द्विपक्षीय एजेंडा में ‘विरासत और विकास’ दोनों ही केंद्रीय महत्व रखते हैं।
वियतनाम भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी और विजन महासंघ का प्रमुख स्तंभ
प्रधानमंत्री ने क्षेत्रीय भू-राजनीति पर कहा कि दोनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र के संबंध में एक समान दृष्टिकोण रखते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत हनोई के समर्थन के माध्यम से व्यापक आसियान समूह के साथ अपनी भागीदारी बढ़ाने का इरादा रखता है। उन्होंने कहा, ‘वियतनाम भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी और विजन महासंघ का एक प्रमुख स्तंभ है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भी हमारी सोच एक जैसी है। रक्षा व सुरक्षा सहयोग को मजबूत करते हुए हम कानून के शासन, शांति, स्थिरता और समृद्धि में अपना योगदान जारी रखेंगे। वियतनाम के सहयोग से भारत आसियान के साथ भी अपने संबंध व्यापक करेगा।'( इनपुट : ANI)


