शाजापुर जिले में सहकारिता समितियों के कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरुआत की है। सैकड़ों कर्मचारी जिला सहकारी केंद्रीय बैंक परिसर में धरने पर बैठ गए हैं। इस विरोध प्रदर्शन के कारण जिले की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था और सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन पूरी तरह चरमरा गया है। नियुक्ति आदेशों में भेदभाव का आरोप हड़ताल का मुख्य कारण सहायक समिति प्रबंधकों की पदोन्नति और नियुक्ति प्रक्रिया में हो रही देरी है। संघ के जिलाध्यक्ष लखन कुंभकार ने बताया कि प्रबंधकों की नियुक्ति प्रक्रिया अक्टूबर 2025 तक पूर्ण होनी थी। हैरानी की बात यह है कि इंदौर, भोपाल और उज्जैन जैसे पड़ोसी जिलों में यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन शाजापुर में पात्रता सूची जारी होने के बावजूद नियुक्ति आदेश अटकाए गए हैं। किसानों पर दोहरी मार: न खाद-बीज मिल रहा, न ऋण हड़ताल के कारण जिले के किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सोसायटियों से होने वाला खाद और बीज का वितरण बंद हो गया है, वहीं ऋण वितरण की प्रक्रिया भी पूरी तरह ठप है। आगामी खरीफ सीजन की तैयारियों में जुटे किसानों को अब निजी साहूकारों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। 1 अप्रैल से गेहूं उपार्जन पर संकट इस हड़ताल का सबसे गंभीर असर समर्थन मूल्य पर होने वाली गेहूं खरीदी पर पड़ने वाला है। जिले के सभी 64 उपार्जन केंद्रों का संचालन इन्हीं कर्मचारियों के जिम्मे है। यदि 1 अप्रैल से पहले हड़ताल समाप्त नहीं हुई, तो गेहूं खरीदी प्रक्रिया पूरी तरह बाधित हो सकती है, जिससे हजारों किसानों का भुगतान और अनाज भंडारण प्रभावित होगा। जिला सहकारी बैंक के सीईओ कोमल डहाके ने कहा है कि कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान हेतु प्रयास जारी हैं। हालांकि, कर्मचारियों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि जब तक नियुक्ति आदेश जारी नहीं होते, तब तक वे काम पर नहीं लौटेंगे।


