कैमूर जिले में नौकरी का झांसा देकर युवाओं को साइबर फ्रॉड का शिकार बनाने वाले एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। साइबर थाना भभुआ की पुलिस ने इस मामले में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। गिरोह के सदस्य युवाओं के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे और फिर उनका उपयोग अवैध लेनदेन के लिए करते थे। भभुआ साइबर डीएसपी ने बताया कि यह गिरोह युवाओं को एयरपोर्ट या बड़ी कंपनियों में नौकरी दिलाने का लालच देता था। इसके लिए उनसे आधार कार्ड, पैन कार्ड और मैट्रिक-इंटर के शैक्षणिक प्रमाण पत्र मांगे जाते थे। 13,12,463 रुपये की धोखाधड़ी का पता चला
दस्तावेज मिलने के बाद, उनके नाम पर तीन-तीन बैंकों में खाते खुलवाए जाते थे। इसके बाद, युवाओं से चेकबुक, एटीएम और सिम कार्ड ले लिए जाते थे। उन्हें बताया जाता था कि इन खातों में भविष्य में सैलरी, पीएफ और इंश्योरेंस की राशि आएगी। पुलिस ने अब तक इस मामले में लगभग 10 ऐसे खातों की जांच की है, जिनमें आठ बड़ी शिकायतें दर्ज हैं। प्रारंभिक जांच में इन खातों से 13,12,463 रुपये की धोखाधड़ी का पता चला है। जड़ तक पहुंचने के लिए गहन पूछताछ जारी
पुलिस ने मुख्य आरोपी सत्येंद्र तिवारी को गिरफ्तार किया है। सत्येंद्र युवाओं से दस्तावेज लेकर पटना के किसी अज्ञात व्यक्ति को भेजता था। पुलिस का मानना है कि यह एक अंतरराज्यीय गिरोह का हिस्सा हो सकता है। फिलहाल, पुलिस अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है और इस पूरे रैकेट की जड़ तक पहुंचने के लिए गहन पूछताछ जारी है। साइबर डीएसपी नीतू सिंह ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी प्रलोभन में आकर अपना निजी डेटा, सिम या बैंक खाते का ब्योरा किसी से साझा न करें। कैमूर जिले में नौकरी का झांसा देकर युवाओं को साइबर फ्रॉड का शिकार बनाने वाले एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। साइबर थाना भभुआ की पुलिस ने इस मामले में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। गिरोह के सदस्य युवाओं के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे और फिर उनका उपयोग अवैध लेनदेन के लिए करते थे। भभुआ साइबर डीएसपी ने बताया कि यह गिरोह युवाओं को एयरपोर्ट या बड़ी कंपनियों में नौकरी दिलाने का लालच देता था। इसके लिए उनसे आधार कार्ड, पैन कार्ड और मैट्रिक-इंटर के शैक्षणिक प्रमाण पत्र मांगे जाते थे। 13,12,463 रुपये की धोखाधड़ी का पता चला
दस्तावेज मिलने के बाद, उनके नाम पर तीन-तीन बैंकों में खाते खुलवाए जाते थे। इसके बाद, युवाओं से चेकबुक, एटीएम और सिम कार्ड ले लिए जाते थे। उन्हें बताया जाता था कि इन खातों में भविष्य में सैलरी, पीएफ और इंश्योरेंस की राशि आएगी। पुलिस ने अब तक इस मामले में लगभग 10 ऐसे खातों की जांच की है, जिनमें आठ बड़ी शिकायतें दर्ज हैं। प्रारंभिक जांच में इन खातों से 13,12,463 रुपये की धोखाधड़ी का पता चला है। जड़ तक पहुंचने के लिए गहन पूछताछ जारी
पुलिस ने मुख्य आरोपी सत्येंद्र तिवारी को गिरफ्तार किया है। सत्येंद्र युवाओं से दस्तावेज लेकर पटना के किसी अज्ञात व्यक्ति को भेजता था। पुलिस का मानना है कि यह एक अंतरराज्यीय गिरोह का हिस्सा हो सकता है। फिलहाल, पुलिस अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है और इस पूरे रैकेट की जड़ तक पहुंचने के लिए गहन पूछताछ जारी है। साइबर डीएसपी नीतू सिंह ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी प्रलोभन में आकर अपना निजी डेटा, सिम या बैंक खाते का ब्योरा किसी से साझा न करें।


