कोटा में बाल श्रम के खिलाफ कार्रवाई करते हुए संयुक्त टीम ने 16 वर्षीय नाबालिग को मुक्त करवाया। मामला किशोरपुरा थाना क्षेत्र के वल्लभनगर का है, जहां बालिका पिछले करीब डेढ़ साल से एक मकान में रहकर घरेलू काम और छोटे बच्चों की देखभाल कर रही थी। कार्रवाई जिला बाल संरक्षण इकाई, बाल अधिकारिता विभाग, चाइल्ड हेल्पलाइन, सृष्टि सेवा समिति और किशोरपुरा पुलिस ने संयुक्त रूप से की। बाल अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक रामराज मीणा ने बताया कि सूचना मिलने पर टीम मौके पर पहुंची। बालिका घर पर ही मिली, जिससे महिला काउंसलर ने बातचीत की। बालिका ने बताया कि वह झाड़ू-पोछा, बर्तन साफ करने सहित घर के अन्य काम करती थी। साथ ही परिवार के छोटे बच्चों की देखभाल भी उसी से करवाई जाती थी। इसके बदले हर महीने 9 हजार रुपए दिए जाते थे, जो सीधे उसके माता-पिता को मिलते थे। बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष राजेंद्र राठौड़ ने बताया कि बालिका के परिजनों ने 40 हजार रुपए उधार लिए थे। रकम नहीं चुका पाने के कारण बच्ची को काम पर लगा दिया गया। टीम ने बालिका को संरक्षण में लेकर बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया, जहां से उसे अस्थाई आश्रय दिलवाया गया। संरक्षण अधिकारी दिनेश शर्मा ने बताया कि मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। वहीं बालिका ने समिति के सामने आगे पढ़ाई करने और अपना भविष्य बनाने की इच्छा जताई है। समिति अब उसकी शिक्षा और पुनर्वास को लेकर आवश्यक कदम उठाएगी। कार्रवाई के दौरान बाल अधिकारिता विभाग के संरक्षण अधिकारी दिनेश शर्मा, विक्रम कच्छावा, चाइल्ड हेल्पलाइन कोऑर्डिनेटर नरेश मीणा, काउंसलर महिमा पांचाल केस वर्कर आकाश कुमार, सृष्टि सेवा समिति के डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर भूपेंद्र सिंह, पुलिस थाना किशोरपुरा पहुंचे। उपस्थित बाल कल्याण अधिकारी पुलिस उप निरीक्षक दुर्गा लाल को जानकारी दी।


