परिवार बोला-वह पूरी रात तड़पती रही,स्टाफ कहता रहा ‘सब-नॉर्मल है’:गले में सेंट्रल लाइन डाली तो खून रिसने लगा, कोई देखने-सुनने वाला ही नहीं था

परिवार बोला-वह पूरी रात तड़पती रही,स्टाफ कहता रहा ‘सब-नॉर्मल है’:गले में सेंट्रल लाइन डाली तो खून रिसने लगा, कोई देखने-सुनने वाला ही नहीं था

ज्योति के गले में स्टाफ ने सेंट्रल लाइन डाली थी। गले में चीरा लगाकर लाइन को डाला गया था। इसमें भी लापरवाही बरती गई। जहां से लाइन डाली गई, वहां से खून रिस रहा था। इसके बाद हमने कई बार स्टाफ को बोला तो वे रुई लगाकर चले जाते और कहते थे कि इसे दबाकर रखो। बुधवार रात को भी गले से खून निकलने लगा था। वह तड़प रही थी लेकिन कोई देखने-सुनने वाला ही नहीं था। मेरे खुद के हाथ खून में सन गए थे, रुई से दबाकर रखते लेकिन तब भी खून रिसता रहता। मशीन लगाई तो भी स्टाफ कहता रहता कि डरो मत कुछ नहीं होगा, सब नॉर्मल हो रहा है, लेकिन सुबह ज्योति की मौत हो गई। यह कहना है ज्योति (25) की मौसी शीला का। कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल के गायनिक विभाग में 6 महिलाओं की किडनियां फेल हो गई। 5 मई को पायल की मौत के 48 घंटे बाद ज्योति की भी मौत हो गई। अब चार महिलाएं सुपर स्पेशलिटी विंग के नेफ्रोलॉजी वार्ड में भर्ती हैं, जिनमें से तीन की हालत अभी भी खतरे से बाहर नहीं है। इधर, जिस बैच की दवाइयां इन मरीजों को दी गई थीं, उनकी सप्लाई रोक दी गई है और सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। रात के 2 बजे सांस लेने में दिक्कत आने लगी
ज्योति के पति रवि ने कहा- बुधवार रात को करीब 2 बजे ज्योति की हालत और बिगड़ना शुरू हो गई। ज्योति को सांस लेने में दिक्कत आने लगी। हमने वहां स्टाफ को बताया लेकिन किसी ने भी कोई ध्यान नहीं दिया। वे आकर मशीन चेक करके चले जाते। इसके बाद जब उसकी हालत बिगड़ने लगी तो उसे वेंटिलेटर पर लिया गया, लेकिन डॉक्टरों ने यह कहा- यह सब घरवालों की रिस्क पर होगा। अब उसे बचाने के लिए यही ऑप्शन है। पूरी रात वह तड़पती रही, स्टाफ कहता- वह नॉर्मल है रवि ने कहा- ज्योति को वेंटिलेटर पर लिया गया, लेकिन उसकी हालत में कोई सुधार नहीं आया। पूरी रात वह तड़पती रही, लेकिन स्टाफ कहता रहा कि अब वह नॉर्मल है। ज्योति के शरीर में झटके लगते रहे और वह दर्द से छटपटाती रही। इसके बाद सुबह डॉक्टर आए और चेकअप किया। बाद में डॉक्टरों ने कहा कि दो-तीन घंटे ऑब्जर्वेशन में रखना पडे़गा, इसका बचना मुश्किल है। हम सबको बाहर कर दिया गया और अंदर नहीं जाने दिया। बाद में जानकारी मिली कि ज्योति की मौत हो गई है। ऑपरेशन के बाद से ही लगातार लापरवाही बरती गई ज्योति की मौसी शीला ने कहा- यह सब स्टाफ और डॉक्टरों की लापरवाही है। चार तारीख को ऑपरेशन के बाद से ही लगातार लापरवाही बरती गई। पहले जब बीपी लो होने लगा तब भी कोई ध्यान नहीं दिया गया और उसके बाद भी अनदेखी जारी रही। इसी वजह से इतनी जल्दी सभी महिलाओं की तबीयत बिगड़ी और उनकी किडनी व लीवर फेल हो गए। डॉक्टर बोले- लिखकर दे दो इलाज नहीं करवाना दूसरी मौत होने के बाद अस्पताल प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। जयपुर से भी विशेषज्ञों की टीम आई। परिजनों से कहा- मरीजों को जयपुर रेफर कर वहां इलाज करवाया जाएगा। अस्पताल में भर्ती रागिनी के पति लोकेश मीणा ने बताया- हमने कहा कि जयपुर क्यों लेकर जाना है? यहां हमारे पेशेंट की तबीयत बिगड़ी है, यहां के डॉक्टरों और स्टाफ की लापरवाही के चलते यह सब हुआ है। अगर यहां इलाज नहीं हो सकता तो दिल्ली एम्स में मरीजों को रेफर करो ताकि सही इलाज मिल सके। लोकेश ने बताया- जब उन्होंने जयपुर जाने के लिए मना किया, तो वहां मौजूद डॉक्टरों ने कहा- लिखकर दे दो कि हम इलाज नहीं करवाना चाहते हैं। इसका मतलब तो यह है कि अस्पताल प्रशासन अब मामले और अपनी लापरवाही को छिपाने के लिए दबाव बना रहा है। हम क्यों लिखकर दें कि इलाज नहीं करवाना चाहते? यहां के डॉक्टर मामले को संभाल ही नहीं पा रहे हैं। इधर, रागिनी की बहन निशा ने बताया कि हम तो बस यही चाहते हैं कि हमारे पेशेंट का इलाज ठीक से हो और वह रिकवर हो जाए। रागिनी के पति और परिवार का भी बुरा हाल है, बार-बार उनकी आंखों में आंसू आ जाते हैं। जयपुर ले जाओ, वहां अच्छा इलाज होगा अस्पताल में भर्ती धन्नी बाई के परिजन मोहनलाल सुमन ने कहा- हमें कहा गया कि अगर आप कहें तो जयपुर रेफर कर देते हैं। हमने पूछा कि क्या यहां इलाज नहीं हो रहा? तो उनका जवाब था कि यहां तो हो रहा है, लेकिन वहां इससे भी अच्छा इलाज होगा, वहां स्पेशलिस्ट हैं। मोहनलाल ने कहा कि जब जयपुर से डॉक्टरों की टीम भेजी गई है और चार स्पेशलिस्ट आए हैं, तो यहीं उनसे इलाज करवाओ न। डॉक्टरों को कुछ दिन यहीं रोककर मरीजों की रिकवरी शुरू होने तक यहीं इलाज जारी रखना चाहिए। मेडिकल कॉलेज प्रशासन सिर्फ अपनी लापरवाही को छिपाने और मामले को मैनेज करने की कोशिश कर रहा है ताकि पेशेंट जयपुर शिफ्ट कर दिए जाएं और यहां कोई दबाव न रहे। हालांकि, मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. नीलेश जैन ने कहा- हमारी तरफ से जबरन रेफर करने जैसा कुछ नहीं है। हमने मरीजों के परिजनों को सिर्फ एक विकल्प (Option) दिया है कि यदि वे चाहें तो जयपुर में बेहतर इलाज करवाया जा सकता है। अब जानिए, सोनोग्राफी में क्या सामने आया… भास्कर ने अपने सूत्रों के माध्यम से ऑपरेशन के बाद की जांच रिपोर्टों का विश्लेषण करने की कोशिश की। इसमें ऑपरेशन के दूसरे दिन की गई रागिनी की सोनोग्राफी रिपोर्ट मिली। हमने एक्सपर्ट्स को यह रिपोर्ट दिखाई ताकि यह जान सकें कि आखिर दिक्कत कहां हुई। एक्सपर्ट्स के विश्लेषण में सामने आई ये बातें- रागिनी का ऑपरेशन 4 मई को सुबह 11:00 से 11:30 बजे के बीच हुआ था। इसके महज 4-5 घंटे बाद ही उसका बीपी (BP) लो हो गया, यूरिन आना बंद हो गया। विशेषज्ञों का मानना है कि संक्रमण (Infection) का असर इतनी जल्दी नहीं होता। संक्रमण फैलने में कम से कम एक सप्ताह का समय लगता है। आशंका है कि ऑपरेशन के बाद दिए गए इंजेक्शन, एंटीबायोटिक्स या फ्लूड की वजह से ही यह स्थिति पैदा हुई। मरीज रागिनी की ऑपरेशन के दूसरेदिन की सोनोग्राफी रिपोर्ट…
अस्पताल प्रशासन इन तीन कारणों को लेकर कर रहा जांच दवाओं के सैंपल जांच के लिए भेज रहे, सप्लाई रोकी सीएमएचओ डॉ. नरेन्द्र नागर ने बताया- इन मरीजों को दी गई दवा की सप्लाई फिलहाल प्रदेश में रोक दी गई है। इस बैच की दवाओं को अभी सीज कर रहे हैं। कोटा में इस बैच की दवाएं दी गई जिनमें फ्लूड, एंटीबायोटिक्स शामिल हैं, उनके सैंपल लिए गए हैं। पुणे जांच के लिए भेजा जा रहा है। ऐसे में अब यह संभावना पूरी लग रही है कि दवाओं के रिएक्शन की वजह से ऐसा हुआ हो।
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