पानीपत के डाक विभाग के डाकियों ने एकजुट होकर IDC प्रभारी रजनी वर्मा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। प्रवर अधीक्षक, करनाल मंडल को भेजी गई एक लिखित शिकायत में कर्मचारियों ने प्रभारी पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का गंभीर आरोप लगाया है। शिकायत में यहां तक कहा गया है कि यदि कार्यप्रणाली में सुधार नहीं हुआ, तो कोई भी कर्मचारी आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर हो सकता है। छुट्टियों पर पाबंदी और संवेदनहीनता का आरोप कर्मचारियों का आरोप है कि परिवार में किसी की मृत्यु होने, बीमारी या दुर्घटना जैसी आपातकालीन स्थितियों में भी उन्हें छुट्टियां नहीं दी जातीं। यदि कोई कर्मचारी मजबूरी में आवेदन करता है, तो उसे तुरंत रद्द कर दिया जाता है। स्टाफ का कहना है कि इस संवेदनहीन व्यवहार के कारण वे भारी मानसिक दबाव में हैं और काम करने की स्थिति में नहीं रह पा रहे हैं। डाक वितरण की अव्यवहारिक समय-सारणी शिकायत में कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं। कर्मचारियों के अनुसार बीट की डाक वितरण लिस्ट दोपहर 12 बजे के बाद दी जाती है। पोस्टमैन करीब 1 बजे वितरण के लिए बाहर निकलता है। वापसी का समय शाम 4 बजे तय है। मात्र 3 घंटों में 300 से अधिक स्पीड पोस्ट बांटना असंभव है। कर्मचारियों का कहना है कि जब डाक समय पर वितरित नहीं हो पाती, तो अगले दिन कारण बताओ नोटिस थमा दिया जाता है और बीट बदलने की धमकी दी जाती है। प्रभारी का पक्ष- नियमों के तहत हो रहा काम इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए आईडीसी प्रभारी रजनी वर्मा ने सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उन्होंने कहा, मैं पोस्टमैन से अपना कोई निजी काम नहीं करवा रही हूं। सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन के अनुसार ही उनसे काम लिया जा रहा है। जहां तक छुट्टी की बात है, मुझे खुद भी चार दिन की छुट्टी मांगने पर मात्र दो दिन की मिलती है।


