खौफ में पाकिस्तान! अमेरिका-ईरान जंग टालने के लिए गिड़गिड़ाया इस्लामाबाद, जानिए उसे किस बात का है बड़ा डर?

खौफ में पाकिस्तान! अमेरिका-ईरान जंग टालने के लिए गिड़गिड़ाया इस्लामाबाद, जानिए उसे किस बात का है बड़ा डर?

Global Conflict: दुनिया भर में जंग का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। एक तरफ अमेरिका है, जहां डोनाल्ड ट्रंप के कड़े तेवर और उनकी लगातार मिल रही धमकियों ने कूटनीतिक माहौल को बेहद गर्म कर रखा है। वहीं दूसरी तरफ, ईरान अपनी जिद पर अड़ा हुआ है और पीछे हटने को तैयार नहीं है। इन दोनों देशों के बीच की इस भयंकर तनातनी के कारण सीधी बातचीत का रास्ता लगभग बंद हो चुका है। इसी गतिरोध को तोड़ने और एक बड़े युद्ध को टालने के लिए अब पाकिस्तान ने मध्यस्थता करने की कोशिश की है। पाकिस्तान ने आधिकारिक तौर पर अमेरिका और ईरान दोनों से आग्रह किया है कि वे चल रहा सीजफायर कम से कम दो सप्ताह के लिए और बढ़ा दें। पाकिस्तान के सूचना और प्रसारण मंत्री अताउल्लाह तरार ने बयान दिया है कि हम लगातार ईरान के संपर्क में हैं, ईरान की ओर से जवाब का इंतजार है।

पाकिस्तान और अमेरिका के बीच अहम बैठक

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने हाल ही में एक आधिकारिक बयान जारी कर इस बात की पुष्टि की है कि उन्होंने शांति प्रयासों को तेज कर दिया है। बयान के अनुसार, पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने पाकिस्तान में मौजूद अमेरिकी चार्ज डी’अफेयर्स (प्रभारी राजदूत) नताली ए. बेकर के साथ एक बेहद अहम बैठक की है।

सैन्य टकराव से पूरे रीजन में मच सकती है तबाही

इस उच्च स्तरीय मुलाकात के दौरान, विदेश मंत्री इस्हाक डार ने साफ तौर पर कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी तरह के सैन्य टकराव से पूरे रीजन में तबाही मच सकती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दोनों महाशक्तियों के बीच तुरंत बातचीत शुरू होनी चाहिए। डार ने नताली ए. बेकर के सामने प्रस्ताव रखा कि दोनों देश अपनी शत्रुता को कुछ समय के लिए रोकें और मौजूदा सीजफायर को आगे बढ़ाने पर गंभीरता से विचार करें, ताकि कूटनीतिक बातचीत के लिए समय मिल सके।

ट्रंप प्रशासन इस समय बेहद आक्रामक विदेश नीति अपना रहा

पाकिस्तान की इस कूटनीतिक पहल पर अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की मिली-जुली प्रतिक्रिया आ रही है। रक्षा जानकारों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन इस समय बेहद आक्रामक विदेश नीति अपना रहा है, इसलिए पाकिस्तान की इस अपील का वाशिंगटन में कितना असर होगा, यह कहना मुश्किल है। वहीं, मिडिल ईस्ट के कई देश पाकिस्तान के इस कदम का स्वागत कर सकते हैं, क्योंकि कोई भी देश इस समय एक और विनाशकारी युद्ध का खर्च नहीं उठा सकता। ईरान की तरफ से भी अभी तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन उनकी जिद को देखते हुए सीजफायर बढ़ाना एक चुनौती होगी।

क्या अमेरिका और ईरान में गुप्त बातचीत शुरू होगी ?

अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अमेरिकी विदेश विभाग और ट्रंप प्रशासन पाकिस्तान की इस अपील पर क्या आधिकारिक जवाब देते हैं। क्या नताली ए. बेकर के माध्यम से दिया गया यह संदेश अमेरिका और ईरान के बीच किसी गुप्त बातचीत की शुरुआत कर पाएगा? आने वाले 48 से 72 घंटे बेहद अहम होंगे। यदि सीजफायर नहीं बढ़ता है, तो खाड़ी क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां एक बार फिर से तेज हो सकती हैं, जिसका सीधा असर वैश्विक तेल की कीमतों और शेयर बाजारों पर पड़ेगा।

इस जंग का पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर बुरा असर पड़ेगा

इस पूरे मामले में एक दिलचस्प पहलू पाकिस्तान के खुद के हित हैं। पाकिस्तान इस समय गंभीर आर्थिक संकट और अपनी पश्चिमी सीमाओं पर आतंकी हमलों से जूझ रहा है। पाकिस्तान की सीमा ईरान से लगती है। यदि अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध होता है, तो उसका सबसे पहला और सबसे बुरा असर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर पड़ेगा। शरणार्थियों का संकट और तेल की कीमतों में उछाल पाकिस्तान को दिवालिया कर सकता है। इसलिए, पाकिस्तान का यह शांति प्रयास केवल दुनिया की भलाई के लिए नहीं, बल्कि खुद को एक बड़े क्षेत्रीय संकट से बचाने की एक कूटनीतिक मजबूरी भी है।

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