बलरामपुर जिले में बढ़ती चोरी की घटनाओं पर सख्त रुख अपनाते हुए पुलिस अधीक्षक विकास कुमार ने बड़ी कार्रवाई की है। मामलों के खुलासे में लापरवाही बरतने वाले 14 उप-निरीक्षकों को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया गया। इस कदम से पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है। एसपी ने साफ कहा है कि ड्यूटी में ढिलाई और अपराध नियंत्रण में कमजोरी अब बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बलरामपुर जिले में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पुलिस अधीक्षक विकास कुमार ने सख्त कदम उठाया है। जिले में लगातार बढ़ रही चोरी की घटनाओं और उनके खुलासे में देरी को लेकर उन्होंने नाराजगी जताई। इसी के चलते 14 उप-निरीक्षकों को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया गया। इस कार्रवाई से पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है। सभी पुलिस कर्मियों में संदेश साफ पहुंच गया है कि लापरवाही की कोई जगह नहीं है।जनता की सुरक्षा पुलिस की पहली जिम्मेदारी एसपी का कहना है। कि जनता की सुरक्षा और उनकी संपत्ति की रक्षा करना पुलिस की पहली जिम्मेदारी है। अगर कोई अधिकारी अपने काम में ढिलाई करता है। या अपराधों पर नियंत्रण पाने में गंभीरता नहीं दिखाता है। तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने “काम नहीं तो जगह नहीं” की नीति को स्पष्ट करते हुए चेतावनी दी है कि आगे भी ऐसे कदम उठाए जाते रहेंगे।
अब लापरवाह पुलिस कर्मियों की खैर नहीं, इनको किया गया लाइन हाजिर
जिन उप-निरीक्षकों पर कार्रवाई की गई है। उनमें ज्ञानचंद, रामकुमार वर्मा, राजेश गुप्त, कैलाश प्रसाद, नवनीत सिंह, कौशल किशोर, प्रदीप यादव, अविनाश कुमार सिंह, राहुल सिंह, अर्जुन प्रसाद, अरुण कुमार पाटिल, मूल चंद, शिवेंद्र प्रताप सिंह और वीरेंद्र कुमार पाल शामिल हैं। इन सभी पर चोरी के मामलों को गंभीरता से न लेने और समय पर उनका खुलासा न करने का आरोप है। इस कार्रवाई के बाद जिले के सभी थाना प्रभारियों और चौकी इंचार्जों को कड़ी हिदायत दी गई है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में लंबित मामलों का जल्द से जल्द निपटारा करें। साथ ही अपराधियों पर सख्त नजर रखते हुए कानून-व्यवस्था को बेहतर बनाएं।
एसपी विकास कुमार की इस कार्रवाई को जिले में अपराध पर नियंत्रण और पुलिस की छवि सुधारने की दिशा में एक बड़ा और जरूरी कदम माना जा रहा है। इससे साफ है कि अब बलरामपुर में लापरवाही करने वाले पुलिसकर्मियों के लिए कोई राहत नहीं है।


