कोरबा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में आग बुझाने के लिए महत्वपूर्ण हाइड्रेंट वाटर सिस्टम अब तक स्थापित नहीं हो पाया है। इसके लिए चार बार टेंडर जारी किए गए और 1 करोड़ 12 लाख रुपये का बजट भी सीजीएमएससी को हस्तांतरित किया जा चुका है। यह स्थिति चाइल्ड केयर हॉस्पिटल में ऑक्सीजन सिलेंडर लीकेज से लगी आग की घटना के बाद सामने आई है, जिसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने सुरक्षा उपायों को तेज कर दिया है। संयुक्त संचालक सह चिकित्सा अधीक्षक प्रो. (डॉ.) गोपाल एस. कंवर ने बताया कि अस्पताल में आग से निपटने के लिए व्यापक तैयारी की जा रही है। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने नगर सेनानी विभाग को पत्र लिखकर स्टाफ के लिए फायर सेफ्टी ट्रेनिंग दोबारा शुरू करने का अनुरोध किया है। कर्मचारियों को अग्निशमन प्रशिक्षण दिया जा रहा है डॉ. कंवर के अनुसार, अस्पताल में कार्यरत स्टाफ नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ, गार्ड समेत सभी कर्मचारियों को बारी-बारी से अग्निशमन प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य आपात स्थिति में समय रहते आग पर काबू पाना है। फायर सेफ्टी उपकरण पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध अस्पताल में वर्तमान में फायर सेफ्टी उपकरण पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं और अग्निशमन के अलग सिस्टम अस्पताल के विभिन्न क्षेत्रों में लगाए गए हैं। हालांकि, ऑडिट के दौरान कुछ खामियां सामने आई हैं। मुख्य अस्पताल भवन में हाइड्रेंट वाटर सिस्टम नहीं लगा है, जबकि पुराने ट्रामा सेंटर में लगा सिस्टम भी काम नहीं कर रहा है। इन कमियों को दूर करने के लिए सीजीएमएससी को 1 करोड़ 12 लाख रुपये हस्तांतरित किए जा चुके हैं। इस राशि से अस्पताल के पुराने भवन में हाइड्रेंट वाटर सिस्टम लगाया जाना है। पुराने ट्रामा सेंटर के सिस्टम को ठीक कराने के लिए भी पत्राचार किया गया है। चौथी बार पत्र लिखा गया है, अब तक टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं सीजीएमएससी को इस मामले में चौथी बार पत्र लिखा गया है, लेकिन अब तक टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। इससे काम में देरी हो रही है। डॉ. कंवर ने भरोसा दिलाया कि फायर सेफ्टी से जुड़ी जो भी कमियां हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर जल्द पूरा कर लिया जाएगा।


