भिवानी में जिला परिषद हाउस की बैठक में पंचायत भवन में हुई। इसमें विकास कार्य विभागीय स्तर पर करवाने और ईं-टेंडर छोड़ने को लेकर हंगामा हुआ। पार्षदों ने अतिरिक्त उपायुक्त कम सीईओ पर अपनी मनमानी करने जैसे गंभीर आरोप लगाए। वहीं सीईओ ने कहा कि ई-टेंडर प्रक्रिया पारदर्शी है और इसमें गुणवत्ता रहती है। लंबी बहस के बाद फैसला हुआ कि 21 लाख तक के कार्य विभागीय करवाए जाएंगे, बशर्ते पार्षद ही काम की पारदर्शीता और गुणवत्ता की जिम्मेवारी लेंगे। जिसके बाद मामला शांत हुआ। बैठक में अतिरिक्त उपायुक्त एवं सीईओ जिला परिषद दीपक बाबू लाल करवा मौजूद रहे। बैठक में पहला मुद्दा 21 लाख तक के विकास कार्य टेंडर से करवाने की बजाए विभागीय करवाने का रहा। पिछले दिनों सीईओ ने करीब 70 लाख के 28 कार्य टेंडर से कराने की प्रक्रिया शुरू की थी। जिसका बैठक में विरोध हुआ। पार्षदों ने बैठक का बायकाट करने की चेतावनी दी। साथ ही अब तक हुई टेंडर प्रक्रिया रद्द करने की मांग की। बैठक में सीईओ ने पार्षदों को कहा कि टेंडर प्रक्रिया से परेशानी क्या है। इसमें कार्य में पारदर्शीता रहेगी और गुणवत्ता भी रहेगी। जिसके बाद पार्षदों ने टेंडर प्रक्रिया की खामियां गिनाई। किसी ने बताया कि दो साल से काम अटका है तो किसी ने बताया कि खानापूर्ति कर ठेकेदार पेमेंट लेकर फरार हो गए। आखिकार सहमति बनी कि अब तक जिन कार्यों के टेंडर खुल चुके है, वे टेंडर प्रक्रिया से होंगे और आगे के 21 लाख तक के कार्य विभागीय स्तर पर होंगे। इसके लिए पार्षद पादर्शीता और गुणवत्ता के लिए जिम्मेवार होंगे। इस बैठक में अवैध कालोनिया पर रोक लगाने व स्ट्रीट डॉग की वेक्सीनेशन पर भी चर्चा की गई


