नीतीश के फैसले से उनकी बहनें दुखी, बिगड़ी तबीयत:बहनोई बोले-भाजपा ठीक नहीं कर रही, जनता के साथ धोखा है; निशांत की राजनीति में एंट्री जरूरी

नीतीश के फैसले से उनकी बहनें दुखी, बिगड़ी तबीयत:बहनोई बोले-भाजपा ठीक नहीं कर रही, जनता के साथ धोखा है; निशांत की राजनीति में एंट्री जरूरी

CM नीतीश कुमार ने राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल कर दिया है। लेकिन नीतीश के फैसले से उनका परिवार सहमत नहीं है। नीतीश के निर्णय के बाद उनकी दोनों बहनें उषा और इंदू काफी दुखी हैं। उनकी तबीयत भी थोड़ी बिगड़ गई है। बहनोई अनिल कहते हैं, ‘ये बिहार के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। भाजपा वाले लगातार कहते थे कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में चुनाव लड़ रहे हैं, फिर इस तरह से नीतीश को हटाने का कौन सा तरीका है? बिहार से राज्यसभा भेजने का कोई औचित्य नहीं है। नीतीश पर दबाव बनाया गया है। जनता ने नीतीश को वोट दिया था। ये जनता के साथ धोखा होगा।’ भास्कर टीम सीएम की बहनों के घर गई, परिजन के साथ पड़ोसियों ने भी नीतीश के फैसले पर अफसोस जताया, पढ़िए रिपोर्ट… पहले तस्वीरों में देखें सीएम की बहनों को भाजपा की जिद के आगे नीतीश को झूकना पड़ा सीएम के बहनोई अनील कहते हैं, ‘बीजेपी की जिद के आगे नीतीश को झुकना पड़ा। हमलोगों ने उनसे बात की थी। उन्हें फिर से सोचने के लिए कहा था, लेकिन वे अपने फैसले पर अडिग रहे। अगर राज्यसभा जाना ही था तो कुछ समय के बाद ये फैसला लिया जा सकता था। बिहार को अभी नीतीश के नेतृत्व की जरूरत है। अभी एक-दो साल बिहार को देखते, कोई दिक्कत नहीं थी। बिहार को बहुत भारी कमी महसूस होगी। 20 साल में बिहार को नीचे से ऊपर तक ले गए हैं, सरकार में रहकर उनका जो योगदान है, उसे जनता भुला नहीं सकती।’ महिलाओं को हर सुविधाएं मुहैया कराई अनील कहते हैं कि बिहार में किस क्षेत्र में काम नहीं हुआ। शिक्षा, हेल्थ, सड़क और लॉ एंड ऑर्डर। महिलाओं को हर सुविधाएं दी गई। पुलिस सेवा भर्ती में 35 % महिलाओं को मौका दिया। निकाय चुनाव में महिलाओं को 50% रिजर्वेशन दिया। नीतीश ने बिहार को शिखर तक पहुंचाया अनिल ने कहा कि नीतीश पूरी तरह से स्वस्थ हैं। स्वस्थ्य थे, तभी पिछले दिनों बिहार दौरान किया था। बिहार को बनाने में उनका बहुत बड़ा योगदान है। नीतीश बिहार के विश्वकर्मा हैं। बिहार गड्‌ढे में था, उसे शिखर तक पहुंचा दिया। बिहार के लिए दुर्भाग्य है कि वे बिहार को छोड़ देंगे। निशांत क्या डिसीजन लेगा अब ये देखना है अनिल ने आगे कहा कि निशांत क्या डिसीजन लेता है, वो देखना होगा। नीतीश कुमार परिवारवाद का विरोधी है, लेकिन निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री नहीं होती है तो पार्टी छिन्न-भिन्न हो जाएगी। इसलिए बिहार में उसका रहना बहुत जरूरी है। आज भाजपा से सीएम के बनने की बात कही जा रही है। हमें तो सही नहीं लगता। पड़ोसियों ने भी रखी अपनी बातें, पढ़िए क्या कहा… नीतीश के फैसले के पक्ष में हम नहीं नीतीश कुमार की बहन उषा देवी के पड़ोसी उमेश कुमार ने कहा कि नीतीश कुमार ने जो फैसला लिया है, हमलोग उसके पक्ष में नहीं है। बिहार के लिए उन्होंने बहुत सराहनीय काम किया है। उन्हें अभी भी बिहार में ही रहना चाहिए। नीतीश के बेटे निशांत राजनीति में आना नहीं चाह रहे हैं। हम बस यही कहेंगे कि अभी नीतीश को बिहार में रहना चाहिए था। जयचंद पार्टी बर्बाद कर देंगे दूसरे पड़ोसी विनय ने कहा कि बहुत जयचंद लोग हैं। इनमें संजय झा, ललन सिंह शामिल हैं। इनलोगों का मकसद पार्टी को बर्बाद करना है। निशांत परसों ही आए थे। उन्होंने यही रहकर इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। अक्सर मिलने के लिए आते हैं। अब पढ़िए नीतीश के पैतृक गांव से लोगों ने क्या कहा, वे क्या चाहते हैं… नीतीश के पैतृक गांव में निशांत को सीएम बनाने की मांग मुख्यमंत्री के पैतृक गांव नालंदा के कल्याण विगहा में बेटे निशांत कुमार को बिहार का अगला मुख्यमंत्री बनाने की मांग उठ रही है। गांव के लोगों का कहना है कि नीतीश कुमार के बाद पार्टी और प्रदेश को संभालने के लिए निशांत कुमार ही सबसे बेहतर विकल्प हैं। स्थानीय निवासी रणजीत सिंह का कहना है कि नीतीश कुमार राज्यसभा जाते हैं तो निशांत कुमार को पार्टी की कमान सौंपी जानी चाहिए। किसी अन्य को सत्ता सौंपी गई तो बिहार की व्यवस्था बर्बाद हो सकती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह लालू प्रसाद यादव ने राबड़ी देवी को कमान सौंपी थी, वैसी स्थिति से बचने के लिए एक सक्षम उत्तराधिकारी की आवश्यकता है। निशांत अपने पिता के पद चिह्नों पर हैं कल्याण विगहा के रहने वाले कक्कू सिंह ने बताया कि निशांत कुमार न केवल शिक्षित हैं, बल्कि बेहद सौम्य और शांत स्वभाव के हैं। निशांत कुमार अपने पिता नीतीश कुमार के पद चिह्नों पर चलते हुए बिहार को आगे ले जा सकते हैं। दूसरा कोई सीएम बना तो काम ठीक से नहीं होगा ग्रामीण गुड्‌डू कुमार चंद्रवंशी ने कहा कि बिहार के साथ-साथ नालंदा में भी बहुत बदलाव हुआ है। गांव में हर तरह की सुविधा है। हमारे गांव में क्या नहीं है। नीतीश कुमार की तरह कोई भी सीएम नहीं रहा है। गांव में स्कूल, हॉस्पिटल, बैंक और आईटीआई सब है। CM नीतीश कुमार ने राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल कर दिया है। लेकिन नीतीश के फैसले से उनका परिवार सहमत नहीं है। नीतीश के निर्णय के बाद उनकी दोनों बहनें उषा और इंदू काफी दुखी हैं। उनकी तबीयत भी थोड़ी बिगड़ गई है। बहनोई अनिल कहते हैं, ‘ये बिहार के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। भाजपा वाले लगातार कहते थे कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में चुनाव लड़ रहे हैं, फिर इस तरह से नीतीश को हटाने का कौन सा तरीका है? बिहार से राज्यसभा भेजने का कोई औचित्य नहीं है। नीतीश पर दबाव बनाया गया है। जनता ने नीतीश को वोट दिया था। ये जनता के साथ धोखा होगा।’ भास्कर टीम सीएम की बहनों के घर गई, परिजन के साथ पड़ोसियों ने भी नीतीश के फैसले पर अफसोस जताया, पढ़िए रिपोर्ट… पहले तस्वीरों में देखें सीएम की बहनों को भाजपा की जिद के आगे नीतीश को झूकना पड़ा सीएम के बहनोई अनील कहते हैं, ‘बीजेपी की जिद के आगे नीतीश को झुकना पड़ा। हमलोगों ने उनसे बात की थी। उन्हें फिर से सोचने के लिए कहा था, लेकिन वे अपने फैसले पर अडिग रहे। अगर राज्यसभा जाना ही था तो कुछ समय के बाद ये फैसला लिया जा सकता था। बिहार को अभी नीतीश के नेतृत्व की जरूरत है। अभी एक-दो साल बिहार को देखते, कोई दिक्कत नहीं थी। बिहार को बहुत भारी कमी महसूस होगी। 20 साल में बिहार को नीचे से ऊपर तक ले गए हैं, सरकार में रहकर उनका जो योगदान है, उसे जनता भुला नहीं सकती।’ महिलाओं को हर सुविधाएं मुहैया कराई अनील कहते हैं कि बिहार में किस क्षेत्र में काम नहीं हुआ। शिक्षा, हेल्थ, सड़क और लॉ एंड ऑर्डर। महिलाओं को हर सुविधाएं दी गई। पुलिस सेवा भर्ती में 35 % महिलाओं को मौका दिया। निकाय चुनाव में महिलाओं को 50% रिजर्वेशन दिया। नीतीश ने बिहार को शिखर तक पहुंचाया अनिल ने कहा कि नीतीश पूरी तरह से स्वस्थ हैं। स्वस्थ्य थे, तभी पिछले दिनों बिहार दौरान किया था। बिहार को बनाने में उनका बहुत बड़ा योगदान है। नीतीश बिहार के विश्वकर्मा हैं। बिहार गड्‌ढे में था, उसे शिखर तक पहुंचा दिया। बिहार के लिए दुर्भाग्य है कि वे बिहार को छोड़ देंगे। निशांत क्या डिसीजन लेगा अब ये देखना है अनिल ने आगे कहा कि निशांत क्या डिसीजन लेता है, वो देखना होगा। नीतीश कुमार परिवारवाद का विरोधी है, लेकिन निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री नहीं होती है तो पार्टी छिन्न-भिन्न हो जाएगी। इसलिए बिहार में उसका रहना बहुत जरूरी है। आज भाजपा से सीएम के बनने की बात कही जा रही है। हमें तो सही नहीं लगता। पड़ोसियों ने भी रखी अपनी बातें, पढ़िए क्या कहा… नीतीश के फैसले के पक्ष में हम नहीं नीतीश कुमार की बहन उषा देवी के पड़ोसी उमेश कुमार ने कहा कि नीतीश कुमार ने जो फैसला लिया है, हमलोग उसके पक्ष में नहीं है। बिहार के लिए उन्होंने बहुत सराहनीय काम किया है। उन्हें अभी भी बिहार में ही रहना चाहिए। नीतीश के बेटे निशांत राजनीति में आना नहीं चाह रहे हैं। हम बस यही कहेंगे कि अभी नीतीश को बिहार में रहना चाहिए था। जयचंद पार्टी बर्बाद कर देंगे दूसरे पड़ोसी विनय ने कहा कि बहुत जयचंद लोग हैं। इनमें संजय झा, ललन सिंह शामिल हैं। इनलोगों का मकसद पार्टी को बर्बाद करना है। निशांत परसों ही आए थे। उन्होंने यही रहकर इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। अक्सर मिलने के लिए आते हैं। अब पढ़िए नीतीश के पैतृक गांव से लोगों ने क्या कहा, वे क्या चाहते हैं… नीतीश के पैतृक गांव में निशांत को सीएम बनाने की मांग मुख्यमंत्री के पैतृक गांव नालंदा के कल्याण विगहा में बेटे निशांत कुमार को बिहार का अगला मुख्यमंत्री बनाने की मांग उठ रही है। गांव के लोगों का कहना है कि नीतीश कुमार के बाद पार्टी और प्रदेश को संभालने के लिए निशांत कुमार ही सबसे बेहतर विकल्प हैं। स्थानीय निवासी रणजीत सिंह का कहना है कि नीतीश कुमार राज्यसभा जाते हैं तो निशांत कुमार को पार्टी की कमान सौंपी जानी चाहिए। किसी अन्य को सत्ता सौंपी गई तो बिहार की व्यवस्था बर्बाद हो सकती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह लालू प्रसाद यादव ने राबड़ी देवी को कमान सौंपी थी, वैसी स्थिति से बचने के लिए एक सक्षम उत्तराधिकारी की आवश्यकता है। निशांत अपने पिता के पद चिह्नों पर हैं कल्याण विगहा के रहने वाले कक्कू सिंह ने बताया कि निशांत कुमार न केवल शिक्षित हैं, बल्कि बेहद सौम्य और शांत स्वभाव के हैं। निशांत कुमार अपने पिता नीतीश कुमार के पद चिह्नों पर चलते हुए बिहार को आगे ले जा सकते हैं। दूसरा कोई सीएम बना तो काम ठीक से नहीं होगा ग्रामीण गुड्‌डू कुमार चंद्रवंशी ने कहा कि बिहार के साथ-साथ नालंदा में भी बहुत बदलाव हुआ है। गांव में हर तरह की सुविधा है। हमारे गांव में क्या नहीं है। नीतीश कुमार की तरह कोई भी सीएम नहीं रहा है। गांव में स्कूल, हॉस्पिटल, बैंक और आईटीआई सब है।  

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