Hindustan Zinc में Stake Sale की तैयारी, ₹80,000 करोड़ का Disinvestment Target पूरा करेगी सरकार

Hindustan Zinc में Stake Sale की तैयारी, ₹80,000 करोड़ का Disinvestment Target पूरा करेगी सरकार
सरकार ने चालू वित्त वर्ष में विनिवेश के जरिए अब तक 52,716 करोड़ रुपये जुटाए हैं। यह रकम पूरे साल के लिए तय 80,000 करोड़ रुपये के लक्ष्य का करीब 66 प्रतिशत है। ऐसे में लक्ष्य को पूरा करने के लिए सरकार को वित्त वर्ष के बाकी महीनों में करीब 27,284 करोड़ रुपये और जुटाने होंगे। इसी बीच हिंदुस्तान जिंक में हिस्सेदारी बिक्री सरकार के लिए अहम साबित हो सकती है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, सरकार हिंदुस्तान जिंक में अपनी हिस्सेदारी बेचकर विनिवेश से होने वाली आय को बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ सकती है। यदि यह हिस्सेदारी बिक्री होती है तो सरकारी खजाने में बड़ी रकम आ सकती है और इससे वार्षिक विनिवेश लक्ष्य के बीच बना अंतर कम करने में मदद मिलेगी।
गौरतलब है कि विनिवेश सरकार की उन नीतियों में शामिल है, जिसके तहत सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेचकर संसाधन जुटाए जाते हैं। सरकार इन पैसों का इस्तेमाल अपनी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने और विकास से जुड़े खर्चों के लिए करती है। इस साल 80,000 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से अब तक करीब दो-तिहाई रकम जुटाई जा चुकी है।
हिंदुस्तान जिंक की हिस्सेदारी बिक्री को लेकर बाजार की भी नजर बनी हुई है। सोमवार को कंपनी के शेयर में तेजी देखी गई और कारोबार के दौरान शेयर करीब 2.2 प्रतिशत बढ़कर 608 रुपये पर पहुंच गया। पिछले एक सप्ताह में कंपनी के शेयर में 7.14 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है, जबकि एक महीने में यह करीब 14.3 प्रतिशत चढ़ चुका है।
हालांकि साल की शुरुआत से अब तक हिंदुस्तान जिंक का शेयर करीब 0.65 प्रतिशत नीचे है, लेकिन पिछले एक साल में इसमें 43.09 प्रतिशत की मजबूत तेजी देखने को मिली है। शेयर में यह प्रदर्शन ऐसे समय में आया है जब धातु क्षेत्र की कंपनियों पर वैश्विक मांग, कीमतों और औद्योगिक गतिविधियों का असर लगातार बना हुआ है।
बता दें कि हिंदुस्तान जिंक देश की प्रमुख जस्ता और चांदी उत्पादक कंपनियों में शामिल है। कंपनी में सरकार की हिस्सेदारी लंबे समय से विनिवेश के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाती रही है। इसलिए इसमें हिस्सेदारी बिक्री से मिलने वाली रकम सरकार के लिए काफी मायने रख सकती है।
फिलहाल सरकार के सामने 80,000 करोड़ रुपये के लक्ष्य को पूरा करने की चुनौती है। अब तक 52,716 करोड़ रुपये मिलने के बाद भी करीब 27,284 करोड़ रुपये की कमी बनी हुई है। ऐसे में हिंदुस्तान जिंक जैसी बड़ी हिस्सेदारी बिक्री सरकार को लक्ष्य के करीब पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। हालांकि अंतिम रकम हिस्सेदारी के आकार और बिक्री के समय तय बाजार मूल्य पर निर्भर करेगी।

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