इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सार्वजनिक जमीनों और सड़कों पर स्थापित मूर्तियों के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। न्यायालय ने सुल्तानपुर जिले में ऐसी सभी मूर्तियों का सर्वे कर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही, राज्य सरकार द्वारा दाखिल किए गए अधूरे और त्रुटिपूर्ण शपथपत्र पर भी गहरी नाराजगी जताई है। यह आदेश न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने स्वतः संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका “इन री इंस्टॉलेशन ऑफ स्टैच्यू आदि ऑन पब्लिक लैंड एंड देयर रिमूवल” पर सुनवाई के बाद पारित किया। इस याचिका में सुल्तानपुर में सड़क के लिए चिन्हित भूमि पर इंद्रभद्र सिंह की प्रतिमा स्थापित किए जाने का मुद्दा उठाया गया था। 6 महीने बीत जाने के बाद भी पूरा ब्योरा नहीं सुनवाई के दौरान न्यायालय के समक्ष यह तथ्य आया कि विचाराधीन दो मूर्तियां लोक निर्माण विभाग और नगर पालिका की उस जमीन पर लगाई गई थीं, जिसे सड़क निर्माण के लिए आरक्षित किया गया था। इसी आधार पर न्यायालय ने पूरे जिले में सार्वजनिक भूमि पर लगी सभी मूर्तियों का सर्वे कराने के निर्देश दिए। न्यायालय ने सरकार की ओर से दाखिल शपथपत्र में भी कई गंभीर खामियां पाईं। खंडपीठ ने कहा कि पिछले अक्टूबर में दाखिल शपथपत्र में विभिन्न विभागों से रिपोर्ट मिलने के बाद विस्तृत जवाब देने की बात कही गई थी, लेकिन 6 महीने बीत जाने के बाद भी पूरा ब्योरा पेश नहीं किया गया। इतना ही नहीं, शपथपत्र के सत्यापन और पहचान वाले कॉलम तक खाली छोड़ दिए गए थे, जबकि उन पर शपथ आयुक्त की मुहर और हस्ताक्षर मौजूद थे। खंडपीठ ने इसे गंभीर त्रुटि मानते हुए प्रदेश के विधि परामर्शी (एलआर) को मामले की जांच करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई जुलाई के दूसरे सप्ताह में होगी।


