शहर में अंडरग्राउंड मेट्रो प्रोजेक्ट को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता किशोर कोडवानी ने मंगलवार को कलेक्टर शिवम वर्मा के समक्ष गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं। हाई कोर्ट के निर्देश के बाद कोडवानी को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया, जिसके तहत मेट्रो अधिकारियों के साथ कलेक्टर के समक्ष सुनवाई हुई। कोडवानी ने कहा कि मेट्रो प्रोजेक्ट के तहत किए जा रहे कामों से भूजल स्तर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और इससे संपूर्ण जल प्रणाली प्रभावित होने की आशंका है। उन्होंने आरोप लगाया कि पर्यावरण प्रभाव आकलन की आवश्यक रिपोर्ट लिए बिना ही काम को आगे बढ़ाया जा रहा है। अनुमतियों को लेकर उठाए सवाल उन्होंने मेट्रो अधिकारियों पर आवश्यक अनुमतियां नहीं लेने का आरोप लगाते हुए कहा कि केवल ओपिनियन लेना पर्याप्त नहीं है। विशेष रूप से हेरिटेज क्षेत्र से संबंधित नियमों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि 300 मीटर की परिधि में निर्माण कार्य पर प्रतिबंध है, जिसका पालन स्पष्ट रूप से नहीं किया जा रहा। अलाइनमेंट में बदलाव पर भी आपत्ति कोडवानी ने मेट्रो रूट के बार-बार बदलने को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि प्रारंभिक योजना और वर्तमान प्रस्ताव में कई बदलाव किए गए हैं, जिससे स्पष्टता का अभाव है। उन्होंने कहा कि पहले जिन स्थानों से मेट्रो प्रस्तावित थी, अब वहां से हटाकर अन्य क्षेत्रों की ओर ले जाया जा रहा है। व्यापार पर असर की आशंका एमजी रोड पर लंबे समय तक निर्माण कार्य चलने की स्थिति में व्यापार पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका भी व्यक्त की गई। कोडवानी ने कहा कि यदि 3 से 5 वर्षों तक निर्माण काम चलता है तो शहर की आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं और राजस्व में भी गिरावट आ सकती है। नियमों के पालन की मांग उन्होंने प्रशासन से मांग की कि परियोजना से जुड़े सभी नियमों और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही कहा कि यदि सभी आवश्यक अनुमतियां विधिवत प्राप्त कर ली जाती हैं तो उन्हें प्रोजेक्ट से कोई आपत्ति नहीं है। बैठक में शहर से जुड़े अन्य पांच प्रशासनिक मुद्दों पर भी प्रारंभिक चर्चा हुई। अधिकारियों ने इन बिंदुओं पर संबंधित विभागों के साथ अलग से बैठक कर विस्तृत निर्णय लेने का आश्वासन दिया। प्रशासन करेगा बिंदुवार समीक्षा कलेक्टर स्तर पर हुई इस बैठक के बाद अब संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर सभी मुद्दों पर बिंदुवार समीक्षा किए जाने की बात कही गई है। प्रोजेक्ट को लेकर आगे की कार्रवाई नियमों के अनुरूप किए जाने पर जोर दिया गया है।


