हरे रंग के सिंथेटिक कलर से ज्यादा नुकसान:आंखों में जलन, लालिमा, एलर्जी-कॉर्नियल इंफेक्शन हो सकता, हर्बल रंगों का ही करें इस्तेमाल

हरे रंग के सिंथेटिक कलर से ज्यादा नुकसान:आंखों में जलन, लालिमा, एलर्जी-कॉर्नियल इंफेक्शन हो सकता, हर्बल रंगों का ही करें इस्तेमाल

होली में बाजार में मिलने वाले सिंथेटिक रंगों में मौजूद हानिकारक रासायन स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकते हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों ने होली खेलते समय आंखों, त्वचा और सांस संबंधी समस्याओं से बचने के लिए सावधानी बरतने की सलाह दी है। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. सुनील कुमार सिंह के अनुसार, आंखें शरीर का बेहद संवेदनशील अंग हैं। केमिकल वाले रंगों के संपर्क में आने से आंखों में जलन, लालिमा, एलर्जी, कॉर्नियल इंफेक्शन और यहां तक कि दृष्टि पर भी बुरा असर पड़ सकता है। विशेष रूप से हरे रंग के सिंथेटिक कलर में मौजूद रसायन आंखों के लिए अधिक खतरनाक होते हैं। डॉ. सिंह सलाह देते हैं कि होली खेलते समय प्राकृतिक या हर्बल रंगों का ही प्रयोग करें। कॉन्टैक्ट लेंस पहनने वाले लोग होली खेलने से पहले उन्हें हटा दें। यदि रंग आंखों में चला जाए, तो तुरंत ठंडे और साफ पानी से धोएं और आंखों को रगड़ने से बचें। रंग लगाते समय आंखें बंद रखें या हथेलियों से ढक लें।
सरसों तेल या गाढ़ा मॉइस्चराइजर लगाकर होली खेलें आईजीआईएमएस के चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. क्रांति ने बताया कि आजकल बाजार में मिलने वाले रंगों में शीशा, सिलिका और एसिड जैसे हानिकारक तत्व मिलाए जाते हैं। ये तत्व स्किन एलर्जी, खुजली, जलन और कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस का कारण बन सकते हैं। कई बार ये रंग त्वचा की ऊपरी परत को नुकसान पहुंचाकर लंबे समय तक दाग भी छोड़ जाते हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि होली खेलने से 20-30 मिनट पहले पूरे शरीर पर नारियल या सरसों का तेल अथवा गाढ़ा मॉइस्चराइजर लगा लें। इससे रंग त्वचा में गहराई तक नहीं जाएगा और बाद में आसानी से साफ हो सकेगा। साथ ही, पूरे बाजू के कपड़े पहनकर शरीर को अधिक से अधिक ढककर रखें। हर्बल और प्राकृतिक रंगों को प्राथमिकता दें, गहरे और चमकीले सिंथेटिक रंगों से दूरी बनाएं। होली के बाद त्वचा को जोर से रगड़कर साफ करने की गलती न करें। हल्के गुनगुने पानी और माइल्ड साबुन से धीरे-धीरे रंग हटाएं। यदि त्वचा पर लाल चकत्ते, खुजली या जलन बढ़ जाए तो तुरंत त्वचा रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें।
एलर्जी और अस्थमा मरीज बरतें ज्यादा सावधानी

एनएमसीएच के मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. अजय कुमार बताते हैं कि होली के दौरान उड़ते गुलाल और धूल के कण सांस के जरिए शरीर में चले जाते हैं, जिससे एलर्जी और अस्थमा के मरीजों की परेशानी बढ़ सकती है। सांस फूलना, सीने में जकड़न और लगातार खांसी जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं।

ऐसे मरीजों को बाहर निकलते समय मास्क पहनना चाहिए और जहां ज्यादा गुलाल उड़ रहा हो, वहां कम समय बिताना चाहिए। अस्थमा के मरीज अपना इनहेलर और जरूरी दवाएं साथ रखें। सूखे गुलाल की बजाय हल्के गीले कम नुकसानदायक होते हैं।
होली खेलने के बाद साफ पानी से गरारे करें और नाक को अच्छी तरह धो लें, ताकि रंग के कण बाहर निकल जाएं। यदि सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द या खांसी बढ़े तो लापरवाही न करें और तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें। होली में बाजार में मिलने वाले सिंथेटिक रंगों में मौजूद हानिकारक रासायन स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकते हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों ने होली खेलते समय आंखों, त्वचा और सांस संबंधी समस्याओं से बचने के लिए सावधानी बरतने की सलाह दी है। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. सुनील कुमार सिंह के अनुसार, आंखें शरीर का बेहद संवेदनशील अंग हैं। केमिकल वाले रंगों के संपर्क में आने से आंखों में जलन, लालिमा, एलर्जी, कॉर्नियल इंफेक्शन और यहां तक कि दृष्टि पर भी बुरा असर पड़ सकता है। विशेष रूप से हरे रंग के सिंथेटिक कलर में मौजूद रसायन आंखों के लिए अधिक खतरनाक होते हैं। डॉ. सिंह सलाह देते हैं कि होली खेलते समय प्राकृतिक या हर्बल रंगों का ही प्रयोग करें। कॉन्टैक्ट लेंस पहनने वाले लोग होली खेलने से पहले उन्हें हटा दें। यदि रंग आंखों में चला जाए, तो तुरंत ठंडे और साफ पानी से धोएं और आंखों को रगड़ने से बचें। रंग लगाते समय आंखें बंद रखें या हथेलियों से ढक लें।
सरसों तेल या गाढ़ा मॉइस्चराइजर लगाकर होली खेलें आईजीआईएमएस के चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. क्रांति ने बताया कि आजकल बाजार में मिलने वाले रंगों में शीशा, सिलिका और एसिड जैसे हानिकारक तत्व मिलाए जाते हैं। ये तत्व स्किन एलर्जी, खुजली, जलन और कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस का कारण बन सकते हैं। कई बार ये रंग त्वचा की ऊपरी परत को नुकसान पहुंचाकर लंबे समय तक दाग भी छोड़ जाते हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि होली खेलने से 20-30 मिनट पहले पूरे शरीर पर नारियल या सरसों का तेल अथवा गाढ़ा मॉइस्चराइजर लगा लें। इससे रंग त्वचा में गहराई तक नहीं जाएगा और बाद में आसानी से साफ हो सकेगा। साथ ही, पूरे बाजू के कपड़े पहनकर शरीर को अधिक से अधिक ढककर रखें। हर्बल और प्राकृतिक रंगों को प्राथमिकता दें, गहरे और चमकीले सिंथेटिक रंगों से दूरी बनाएं। होली के बाद त्वचा को जोर से रगड़कर साफ करने की गलती न करें। हल्के गुनगुने पानी और माइल्ड साबुन से धीरे-धीरे रंग हटाएं। यदि त्वचा पर लाल चकत्ते, खुजली या जलन बढ़ जाए तो तुरंत त्वचा रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें।
एलर्जी और अस्थमा मरीज बरतें ज्यादा सावधानी

एनएमसीएच के मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. अजय कुमार बताते हैं कि होली के दौरान उड़ते गुलाल और धूल के कण सांस के जरिए शरीर में चले जाते हैं, जिससे एलर्जी और अस्थमा के मरीजों की परेशानी बढ़ सकती है। सांस फूलना, सीने में जकड़न और लगातार खांसी जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं।

ऐसे मरीजों को बाहर निकलते समय मास्क पहनना चाहिए और जहां ज्यादा गुलाल उड़ रहा हो, वहां कम समय बिताना चाहिए। अस्थमा के मरीज अपना इनहेलर और जरूरी दवाएं साथ रखें। सूखे गुलाल की बजाय हल्के गीले कम नुकसानदायक होते हैं।
होली खेलने के बाद साफ पानी से गरारे करें और नाक को अच्छी तरह धो लें, ताकि रंग के कण बाहर निकल जाएं। यदि सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द या खांसी बढ़े तो लापरवाही न करें और तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें।  

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