Goa में 30 हजार करोड़ की साइबर ठगी मामले में ED ने मुकेश जैन को पकड़ा

Goa में 30 हजार करोड़ की साइबर ठगी मामले में ED ने मुकेश जैन को पकड़ा

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने करीब 30,000 करोड़ रुपये के लेनदेन से जुड़े कथित साइबर धोखाधड़ी और ‘डिजिटल अरेस्ट’ के मामले में धन शोधन की जांच के सिलसिले में छठे आरोपी को गिरफ्तार किया। आधिकारिक सूत्रों ने शनिवार को यह जानकारी दी। सूत्रों के अनुसार, मुकेश कुमार पुखराज जैन उर्फ मुकेश भाई को शुक्रवार को हिरासत में लिया गया।सूत्रों ने बताया कि इसके बाद मुकेश को पणजी की एक विशेष धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे 19 अक्टूबर तक ईडी की हिरासत में भेज दिया गया।

इस कार्रवाई के साथ ही ईडी के पणजी कार्यालय द्वारा इस मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपियों की कुल संख्या छह हो गई है। जैन पर आरटीजीएस एजेंट के रूप में काम करने का आरोप है और वह कमीशन के बदले बिचौलियों के माध्यम से साइबर अपराधियों के नेटवर्क के बैंक खातों में रकम जमा कराने की व्यवस्था करता था। ईडी ने एक बयान में बताया कि इस मामले में जांच गोवा पुलिस द्वारा नौ जून 2025 को प्राथमिकी दर्ज किए जाने के बाद शुरू हुई।

गोवा की एक महिला को साइबर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट कर 21 मई 2025 से दो जून 2025 के बीच 2.60 करोड़ रुपये अंतरित करने के लिए कथित तौर पर मजबूर किया था। ईडी ने पाया कि गोवा की पीड़ित महिला से ठगी गई रकम 400 बैंक खातों में जमा की गई, जिसे बाद में नकदी के रूप में निकाला गया और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से लाइसेंस प्राप्त मुद्रा विनिमय केंद्रों के माध्यम से विदेशी मुद्रा में बदला गया। एजेंसी के अधिकारियों ने बताया कि धन के लेनदेन की जांच में जिंस कारोबार, ट्रेडिंग, यात्रा और विदेशी मुद्रा विनिमय से जुड़ी कंपनियों का एक ‘आपस में जुड़ा’ नेटवर्क सामने आया।

उन्होंने बताया कि इस नेटवर्क ने 27,850 करोड़ रुपये से अधिक के बैंकिंग लेनदेन किए। इसके अलावा, नेटवर्क के खातों में 2,904 करोड़ रुपये नकद जमा किए गए। एजेंसी ने बताया कि इसमें देश के विभिन्न स्थानों पर कई जगहों पर लगी मशीनों के जरिए बड़ी संख्या में नोट जमा करने के 61,448 लेनदेन का पता लगा, जिसके माध्यम से 584.70 करोड़ रुपये जमा भी किए गए।

ईडी ने बताया कि इन कंपनियों के बैंक खातों की पहचान 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पुलिस तथा अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा दर्ज साइबर धोखाधड़ी की करीब 300 शिकायतों और 163 प्राथमिकी (एफआईआर) में की गई है। इन मामलों में कुल 417.49 करोड़ रुपये की ठगी की सूचना मिली है। इस मामले में एजेंसी ने जुलाई में गोवा और मुंबई में दो चरणों में तलाशी ली थी।

इसके बाद 21 अगस्त को फिर तलाशी ली गई, जिसमें करीब 3.25 करोड़ रुपये नकद जब्त किए गए। ईडी के अनुसार, जांच में पता चला कि मुखौटा या फर्जी कंपनियों ने एक कमरे के आवास में रहने वाले ड्राइवरों और कर्मचारियों को अपना निदेशक बनाया था। ऐसे मामलों में यह धोखाधड़ी का एक आम तरीका है।

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