WHO Raises Alarm Over Ebola Outbreak Congo: अफ्रीकी देश कांगो में इबोला वायरस का प्रकोप तेजी से फैलता जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने हालात की गंभीरता को देखते हुए वैश्विक स्तर पर चिंता जताई है। कांगो सरकार के मुताबिक अब तक कम से कम 134 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 500 से ज्यादा संदिग्ध मामले सामने आए हैं।
WHO प्रमुख टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने कहा कि संक्रमण जिस तेजी और पैमाने पर फैल रहा है, वह बेहद चिंताजनक है। खास बात यह है कि इस बार इबोला के दुर्लभ बुंडीबुग्यो वैरिएंट का संक्रमण फैल रहा है, जिसके लिए अभी तक कोई मंजूरशुदा वैक्सीन या दवा उपलब्ध नहीं है।
कई हफ्तों तक पता ही नहीं चला संक्रमण
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, वायरस कई हफ्तों तक बिना पहचान में आए फैलता रहा। शुरुआती मामलों की जांच सामान्य जायरे इबोला वैरिएंट के लिए की गई थी, जिसकी रिपोर्ट निगेटिव आई। इसी वजह से संक्रमण को समय रहते रोका नहीं जा सका।
कांगो के स्वास्थ्य मंत्री सैमुअल रोजर कंबा ने बताया कि पहला मरीज 24 अप्रैल को बुनीया इलाके में मिला था। बाद में शव को दूसरे क्षेत्र में ले जाया गया, जिससे संक्रमण तेजी से फैल गया।
WHO ने जताई गहरी चिंता
WHO प्रमुख टेड्रोस ने कहा कि संक्रमण अब शहरी इलाकों तक पहुंच चुका है और स्वास्थ्यकर्मी भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि बड़ी आबादी की आवाजाही के कारण हालात और बिगड़ सकते हैं।
WHO ने इस प्रकोप को अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल (Public Health Emergency of International Concern) घोषित किया है।
युगांडा तक पहुंचा संक्रमण
WHO के अनुसार, पड़ोसी देश युगांडा में भी इबोला के दो पुष्ट मामले सामने आए हैं, जिनमें राजधानी कंपाला में एक मौत भी शामिल है। बताया गया है कि संक्रमित लोग हाल ही में कांगो से लौटे थे।
वैक्सीन और राहत सामग्री भेजने की तैयारी
कांगो सरकार को अमेरिका और ब्रिटेन से प्रयोगात्मक वैक्सीन की खेप मिलने की उम्मीद है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित इन वैक्सीन का परीक्षण किया जाएगा।
इस बीच यूनिसेफ और रेड क्रॉस जैसी संस्थाएं प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री भेज रही हैं। शुरुआती चरण में साबुन, डिसइन्फेक्टेंट, पानी शुद्ध करने की गोलियां और सुरक्षा उपकरण पहुंचाए गए हैं।
स्वास्थ्यकर्मियों में भी संक्रमण
रिपोर्ट के मुताबिक कई स्वास्थ्यकर्मी भी इबोला से संक्रमित हुए हैं। बुनीया में इलाज कर रहे अमेरिकी डॉक्टर पीटर स्टैफर्ड भी वायरस की चपेट में आ गए, जिन्हें बाद में जर्मनी भेजा गया।
क्या है इबोला वायरस?
इबोला एक बेहद संक्रामक और जानलेवा वायरस है, जो संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों जैसे खून, उल्टी या अन्य शारीरिक संपर्क से फैलता है।
इसके प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी, उल्टी, दस्त और शरीर से असामान्य रक्तस्राव शामिल हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते संक्रमण की चेन नहीं तोड़ी गई, तो यह प्रकोप मध्य अफ्रीका के कई देशों के लिए बड़ा स्वास्थ्य संकट बन सकता है।


