गहलोत बोले-मोदी-शाह नहीं चाहते थे महिला आरक्षण बिल पास हो:विपक्ष को जानबूझकर विश्वास में नहीं लिया, ताकि बिल गिरने का ठीकरा फोड़ सकें

गहलोत बोले-मोदी-शाह नहीं चाहते थे महिला आरक्षण बिल पास हो:विपक्ष को जानबूझकर विश्वास में नहीं लिया, ताकि बिल गिरने का ठीकरा फोड़ सकें

लोकसभा में महिला आरक्षण बिल गिरने के बाद बीजेपी की तरफ से विपक्ष को जिम्मेदार ठहराने पर पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने पलटवार किया है। गहलोत ने कहा- पीएम मोदी और अमित शाह जो चाहते थे, वही हुआ है। मोदी और शाह नहीं चाहते थे कि महिला आरक्षण बिल पास हो। अगर वो बिल पास करवाना चाहते तो विपक्ष के नेताओं से चर्चा करते। गहलोत जयपुर में मीडिया से बातचीत कर रहे थे। गहलोत ने कहा- पहले पारित हो चुके महिला आरक्षण कानून को रोकने के लिए एनडीए सरकार की तरफ से लाया गया विधेयक एक षड्यंत्र साबित हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह सहित पूरी सरकार को यह पहले दिन से मालूम था कि यह बिल विपक्ष के सहयोग के बिना पास नहीं हो सकता। इसके बावजूद विपक्षी पार्टियों से बात कर उन्हें विश्वास में नहीं लिया गया। सर्वदलीय बैठक बुलाने की जगह विपक्ष में फूट डालने का प्रयास किया गहलोत ने कहा- लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्ल्किार्जुन खड़गे लगातार इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग कर रहे थे। लेकिन इतने महत्वपूर्ण विषय पर प्रधानमंत्री ने सभी विपक्षी पार्टियों को एक साथ बुलाकर बात करने की बजाय अलग-अलग बात कर उनमें फूट डालने का प्रयास किया। दक्षिण के राज्यों और पश्चिम बंगाल की आशंकाओं को दूर करने के लिए केंद्र सरकार को वहां के मुख्यमंत्रियों को बुलाकर बात करनी चाहिए थी, जिससे एक भरोसा पैदा होता। विपक्ष पर ठीकरा फोड़ने की साजिश गहलोत ने कहा- एनडीए सरकार का बदनीयती से लाया गया बिल परिसीमन के लिए भी खतरनाक था। जिस तरह असम, जम्मू-कश्मीर में विपक्षी पार्टियों को निशाना बनाकर विधानसभा के लिए परिसीमन किया गया। उसके बाद एनडीए सरकार के किए जाने वाले परिसीमन पर कोई भरोसा नहीं कर सकता। भाजपा ने विधानसभा चुनावों के बीच सत्र बुलाकर और विपक्ष से संवादहीनता रखकर जानबूझकर ऐसी परिस्थितियां बनाईं जिससे यह बिल पास न हो सके और इसका ठीकरा विपक्ष पर फोड़ा जा सके। पूरे देश में अपने हिसाब से परिसीमन करना चाहते थे लेकिन एक्सपोज हुए गहलोत ने कहा- ये मनमाने तरीके से पूरे देश में परिसीमन करना चाहते थे। जिस तरह असम सहित कई राज्यों में किया है, उस परिसीमन पर सब विपक्षी सवाल उठा रहे हैं। उसी तर्ज पर ये पूरे देश में परिसीमन करना चाहते थे लेकिन एक्सपोज हो गए। देश की जनता सब समझती है, ये अपनी चाल में कामयाब नहीं हो पाएंगे। चलते चुनाव के बीच संसद सत्र बुलाने की क्यर आवश्यकता थी, इसका मतलब क्या था। जब विपक्ष मांग कर रहा था कि 29 अप्रैल को विधानसभा चुनाव की वोटिंग खत्म होने के बाद संसद सत्र बुला लीजिए लेकिन नहीं माने। इसका मतलब ये खुद नहीं चाहते थे कि बिल पारित हो।

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