NEET Paper Leak विवाद के बीच चर्चा में गाओकाओ एग्जाम, आखिर चीन में क्यों नहीं होता पेपर लीक

NEET Paper Leak विवाद के बीच चर्चा में गाओकाओ एग्जाम, आखिर चीन में क्यों नहीं होता पेपर लीक

NEET UG 2026: भारत में डॉक्टर बनने का सपना देखने वाले करीब 20 से 25 लाख स्टूडेंट्स हर साल नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट यानी NEET की परीक्षा देते हैं। देश में इसी के जरिए एमबीबीएस और बीडीएस में एडमिशन मिलता है। लेकिन देश की सबसे अहम प्रवेश परीक्षा होने के बावजूद नीट का पूरा सिस्टम लगातार सवालों के घेरे में है। पेपर लीक, परीक्षा केंद्रों पर गड़बड़ी और रिजल्ट में धांधली जैसे आरोप बार-बार लगते रहे हैं। हर नए विवाद के साथ देश के परीक्षा सिस्टम की सुरक्षा पर एक नई बहस शुरू हो जाती है।

वहीं दूसरी तरफ, चीन की गाओकाओ परीक्षा है। इस परीक्षा में हर साल लगभग 1 करोड़ 30 लाख स्टूडेंट्स हिस्सा लेते हैं। इतने बड़े पैमाने पर परीक्षा होने के बावजूद चीन में पेपर लीक या गड़बड़ी की खबरें ना के बराबर आती हैं। यही वजह है कि, दुनियाभर में चीन के इस परीक्षा सिस्टम की अक्सर सराहना की जाती है।

क्या है गाओकाओ परीक्षा?

भारत में जहां नीट की परीक्षा सिर्फ मेडिकल और डेंटल कॉलेजों (MBBS और BDS) में दाखिले तक सीमित है वहीं, चीन में गाओकाओ का दायरा बहुत बड़ा है। यह चीन की नेशनल लेवल की कॉलेज प्रवेश परीक्षा है जो साल में एक बार होती है। वहां की ज्यादातर यूनिवर्सिटीज के अलग-अलग ग्रेजुएशन कोर्सेज में एडमिशन सिर्फ इसी एक परीक्षा के स्कोर से मिलता है। साल में एक बार होने वाली यह परीक्षा तय करती है कि, स्टूडेंट्स का भविष्य और करियर कैसा होगा और वह कौन सा कोर्स कर पाएगा।

क्यों लीक नहीं होता गाओकाओ का पेपर

इस परीक्षा को इतना सुरक्षित मानने की सबसे बड़ी वजह इसका बहुत ही सख्त सिस्टम है। इस परीक्षा पर कड़ी नजर रखी जाती है और इसमें तकनीक का भरपूर इस्तेमाल होता है।

  • एग्जाम हॉल में एआई (AI) आधारित कैमरों से लगातार निगरानी की जाती है।
  • कैंडिडेट्स की पहचान करने के लिए बायोमेट्रिक सिस्टम का इस्तेमाल होता है।
  • किसी भी तरह से चीटिंग और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को रोकने के लिए एग्जाम सेंटर्स पर सिग्नल जैमर लगाए जाते हैं।
  • संवेदनशील इलाकों और सेंटर्स के बाहर ड्रोन के जरिए आसमान से नजर रखी जाती है।
  • प्रश्न पत्र लाने और ले जाने की प्रक्रिया पर बहुत सख्त पहरा होता है।

देश रुक जाता है लेकिन परीक्षा नहीं

चीन में गाओकाओ को महज एक एग्जाम नहीं बल्कि बच्चों की जिंदगी की दिशा तय करने वाले एक बड़े मौके के तौर पर देखा जाता है, जिसके लिए वे कई सालों तक तैयारी करते हैं। प्रशासन भी इस परीक्षा को गंभीरता से लेता है, परीक्षा के दिन सख्त इंतजाम किए जाते हैं। कई शहरों में ट्रैफिक रोक दिया जाता है या डायवर्ट कर दिया जाता है ताकि, स्टूडेंट्स को कोई दिक्कत न हो। एग्जाम सेंटर्स के आसपास पूरी तरह शांति बनाए रखने के लिए हॉर्न बजाने तक पर सख्त पाबंदी होती है।

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