गयाजी के भुसुंडा मेलास्थल के पास रविवार देर रात आग लग गई। देखते ही देखत विकराल रूप धारण कर लिया। जब लोग कुछ समझपाते उससे पहले ही लपटों ने पूरी लाइन को अपनी चपेट में ले लिया। 9 दुकानें जलकर राख हो गई। करीब 50 लाख का नुकसान हुआ है। सबसे बड़ी बात यह है कि 6 घंटे बीत जाने के बाद भी स्थानीय स्तर के कोई अधिकारी मौके पर पीड़ितों का हाल जानने नहीं पहुंचे। जिससे लोगों में नाराजगी साफ दिखी। घटना मुफस्सिल थाना क्षेत्र की है। फायर ब्रिगेड समय पर नहीं पहुंची स्थानीय निवासी वरुण कुमार ने बताया कि रात 1 बजकर 43 मिनट पर फायर ब्रिगेड को फोन किया गया था, लेकिन दमकल की टीम करीब एक घंटे बाद पहुंची। तब तक आग पूरी तरह विकराल हो चुकी थी। सभी दुकानें जलकर खत्म हो चुकी थी। अगर समय पर दमकल पहुंचती, तो नुकसान इतना बड़ा नहीं होता। रोजी-रोटी का संकट प्रभावित दुकानों में फल आढ़त, फर्नीचर, मीट दुकान, पान गुमटी और अन्य छोटे व्यवसाय शामिल है। इस दौरान स्थानीय कुदुस के घर में भी आग लग गई। परिवार के सदस्य जान बचाकर भागे। घर का सारा सामान जल गया। घटना के बाद का मंजर काफी मार्मिक था। रीना देवी अपनी जली दुकान की राख में काम आने वाला सामान खोजती नजर आईं। उनकी आंखों में आंसू थे और चेहरे पर बेबसी साफ दिख रही थी। कई दुकानदारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। प्रशासन से मुआवजे की मांग स्थानीय लोगों का कहना है कि भुसुंडा इलाके में ज्यादातर दुकानें लकड़ी और टीन से बनी है। जिससे आग ने विकराल रूप ले लिया। आग लगने के कारणों को लेकर अब तक स्थिति साफ नहीं है। कुछ लोग शॉर्ट सर्किट की आशंका जता रहे हैं, जबकि कुछ इसे साजिश भी मान रहे हैं। पुलिस मौके पर पहुंची जरूर, लेकिन मदद नाकाफी रही। अब पीड़ित प्रशासन से मुआवजा और राहत की मांग कर रहे हैं। गयाजी के भुसुंडा मेलास्थल के पास रविवार देर रात आग लग गई। देखते ही देखत विकराल रूप धारण कर लिया। जब लोग कुछ समझपाते उससे पहले ही लपटों ने पूरी लाइन को अपनी चपेट में ले लिया। 9 दुकानें जलकर राख हो गई। करीब 50 लाख का नुकसान हुआ है। सबसे बड़ी बात यह है कि 6 घंटे बीत जाने के बाद भी स्थानीय स्तर के कोई अधिकारी मौके पर पीड़ितों का हाल जानने नहीं पहुंचे। जिससे लोगों में नाराजगी साफ दिखी। घटना मुफस्सिल थाना क्षेत्र की है। फायर ब्रिगेड समय पर नहीं पहुंची स्थानीय निवासी वरुण कुमार ने बताया कि रात 1 बजकर 43 मिनट पर फायर ब्रिगेड को फोन किया गया था, लेकिन दमकल की टीम करीब एक घंटे बाद पहुंची। तब तक आग पूरी तरह विकराल हो चुकी थी। सभी दुकानें जलकर खत्म हो चुकी थी। अगर समय पर दमकल पहुंचती, तो नुकसान इतना बड़ा नहीं होता। रोजी-रोटी का संकट प्रभावित दुकानों में फल आढ़त, फर्नीचर, मीट दुकान, पान गुमटी और अन्य छोटे व्यवसाय शामिल है। इस दौरान स्थानीय कुदुस के घर में भी आग लग गई। परिवार के सदस्य जान बचाकर भागे। घर का सारा सामान जल गया। घटना के बाद का मंजर काफी मार्मिक था। रीना देवी अपनी जली दुकान की राख में काम आने वाला सामान खोजती नजर आईं। उनकी आंखों में आंसू थे और चेहरे पर बेबसी साफ दिख रही थी। कई दुकानदारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। प्रशासन से मुआवजे की मांग स्थानीय लोगों का कहना है कि भुसुंडा इलाके में ज्यादातर दुकानें लकड़ी और टीन से बनी है। जिससे आग ने विकराल रूप ले लिया। आग लगने के कारणों को लेकर अब तक स्थिति साफ नहीं है। कुछ लोग शॉर्ट सर्किट की आशंका जता रहे हैं, जबकि कुछ इसे साजिश भी मान रहे हैं। पुलिस मौके पर पहुंची जरूर, लेकिन मदद नाकाफी रही। अब पीड़ित प्रशासन से मुआवजा और राहत की मांग कर रहे हैं।


