बाबू जगदेव प्रसाद के जीवन पर आधारित बायोपिक फिल्म ‘द इंडियन लेनिन : बाबू जगदेव’ 29 मई को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी। इसमें बिहार और झारखंड के करीब 200 कलाकारों ने अलग-अलग भूमिकाएं निभाई हैं। इसकी जानकारी फिल्म के निर्माता सुभाष कुमार और सिद्धार्थ कुमार ने दी। उन्होंने बताया कि बाबू जगदेव प्रसाद बिहार के सर्वमान्य जननेता थे। उन्होंने दलित, पिछड़े, अतिपिछड़े, आदिवासी और अल्पसंख्यक समेत समाज के 90 प्रतिशत शोषित एवं वंचित लोगों के अधिकारों के लिए आजीवन संघर्ष किया। फिल्म में 1932 से 1974 तक के परिवेश को दिखाया गया निर्देशक प्रेम कुमार विद्यार्थी ने कहा कि फिल्म की शूटिंग 2 फरवरी 2023 से कुरहारी, जहानाबाद, गया के डुमरिया, इमामगंज, बांकेबाजार और झारखंड के कई क्षेत्रों में हुई। फिल्म में 1932 से 1974 तक के सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक परिवेश को दिखाया गया है। साथ ही बाबू जगदेव प्रसाद के बचपन, परिवार, गांव और सामाजिक जीवन की घटनाओं को प्रमुखता से दर्शाया गया है। 2 करोड़ के बजट में यह फिल्म बनाई गई 2 करोड़ के बजट में यह फिल्म बनाई गई है। फिल्म में छुआछूत, अंधविश्वास, अमीरी-गरीबी, ऊँच-नीच और ब्राह्मणवादी व्यवस्था जैसी सामाजिक विसंगतियों को दर्शाया गया है। यह युवाओं, महिलाओं, किसानों और आम जनता की भावनाओं को छूती है। दमदार एक्शन, प्रभावशाली संवाद और सच्ची घटनाओं पर आधारित कहानी के साथ फिल्म में बिहार की राजनीति की झलक भी देखने को मिलेगी। बाबू जगदेव प्रसाद के जीवन पर आधारित बायोपिक फिल्म ‘द इंडियन लेनिन : बाबू जगदेव’ 29 मई को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी। इसमें बिहार और झारखंड के करीब 200 कलाकारों ने अलग-अलग भूमिकाएं निभाई हैं। इसकी जानकारी फिल्म के निर्माता सुभाष कुमार और सिद्धार्थ कुमार ने दी। उन्होंने बताया कि बाबू जगदेव प्रसाद बिहार के सर्वमान्य जननेता थे। उन्होंने दलित, पिछड़े, अतिपिछड़े, आदिवासी और अल्पसंख्यक समेत समाज के 90 प्रतिशत शोषित एवं वंचित लोगों के अधिकारों के लिए आजीवन संघर्ष किया। फिल्म में 1932 से 1974 तक के परिवेश को दिखाया गया निर्देशक प्रेम कुमार विद्यार्थी ने कहा कि फिल्म की शूटिंग 2 फरवरी 2023 से कुरहारी, जहानाबाद, गया के डुमरिया, इमामगंज, बांकेबाजार और झारखंड के कई क्षेत्रों में हुई। फिल्म में 1932 से 1974 तक के सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक परिवेश को दिखाया गया है। साथ ही बाबू जगदेव प्रसाद के बचपन, परिवार, गांव और सामाजिक जीवन की घटनाओं को प्रमुखता से दर्शाया गया है। 2 करोड़ के बजट में यह फिल्म बनाई गई 2 करोड़ के बजट में यह फिल्म बनाई गई है। फिल्म में छुआछूत, अंधविश्वास, अमीरी-गरीबी, ऊँच-नीच और ब्राह्मणवादी व्यवस्था जैसी सामाजिक विसंगतियों को दर्शाया गया है। यह युवाओं, महिलाओं, किसानों और आम जनता की भावनाओं को छूती है। दमदार एक्शन, प्रभावशाली संवाद और सच्ची घटनाओं पर आधारित कहानी के साथ फिल्म में बिहार की राजनीति की झलक भी देखने को मिलेगी।


